वह बिस्तर पर बैठी थी, लेकिन उसकी आँखें उससे कोसों दूर लग रही थीं। उसने हाथ पकड़ा, लेकिन दिल नहीं। अब देर हो गई थी, शायद बहुत पहले ही सब खत्म हो चुका था। उसके चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आँखों में दर्द। वह चिल्लाया, वह रोई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। यह प्यार नहीं, बस एक झगड़ा था जो खत्म नहीं हो रहा था।
उसने उसकी बांह पकड़ी, शायद रोकने के लिए, शायद समझाने के लिए। लेकिन अब देर हो गई थी। गुस्से में छिपा प्यार कभी-कभी ज्यादा दर्द देता है। उसकी आवाज़ ऊंची थी, लेकिन आँखें नम थीं। वह जानता था कि गलत हो रहा है, लेकिन रुक नहीं पा रहा था। यह वही पल था जब प्यार और नफरत एक ही सांस में सांस ले रहे थे।
कमरा गर्म था, लाइटें पीली थीं, लेकिन दिलों में बर्फ जमी हुई थी। अब देर हो गई थी, शायद बहुत पहले ही रास्ते अलग हो गए थे। वह उसके करीब था, लेकिन फिर भी दूर। उसने उसे छूने की कोशिश की, लेकिन वह पीछे हट गई। यह वह पल था जब स्पर्श भी अजनबी लगने लगते हैं।
उसकी आँखों में हजारों सवाल थे, लेकिन होठों पर कोई जवाब नहीं। अब देर हो गई थी, शायद जवाब देने का वक्त भी निकल चुका था। वह चिल्लाया, वह रोई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। यह वही पल था जब शब्द बेकार हो जाते हैं और सिर्फ आँखें बोलती हैं।
यह झगड़ा खत्म नहीं हुआ, बस एक पड़ाव था। अब देर हो गई थी, लेकिन फिर भी दोनों वहीं खड़े थे जहां से शुरू किया था। उसने उसे छोड़ा, लेकिन दिल नहीं छोड़ पाया। यह वही पल था जब रिश्ते टूटते नहीं, बस टूटने का नाटक करते हैं।