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दीवार के पार दुश्मनवां7एपिसोड

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दीवार के पार दुश्मन

आदित्य सिंह की पूरी फाल्कन टीम को ब्लैक टाइगर गैंग मार चुका है। सिर्फ आदित्य बचा। पंद्रह साल तक वह दुश्मन को ढूंढता रहा, पर कोई सुराग नहीं मिला। आत्महत्या करने से पहले वह सुनता है कि बगल की बेसमेंट में आवाज़ है, जहाँ सालों से कोई नहीं रहता। छुपकर देखने पर पता चलता है कि अंदर वही लोग हैं जिन्हें वह ढूंढ रहा था। अब आदित्य उन बुजुर्गों और साथियों के माता-पिता की रक्षा भी करना चाहता है और अपना बदला भी लेना चाहता है। वह दुश्मन को आपस में लड़ाता है, लेकिन क्या वह इन सबके बीच सबको बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

कागज का हवाई जहाज और रहस्य

शुरुआत बहुत इमोशनल थी। कागज का हवाई जहाज और बच्ची की मासूमियत देखकर दिल पिघल गया। लेकिन फिर अचानक कहानी में बड़ा मोड़ आया। व्हीलचेयर वाले व्यक्ति का असली चेहरा सामने आया। दीवार के पार दुश्मन में ऐसा मोड़ बिल्कुल उम्मीद नहीं था। रहस्य बना हुआ है और आगे क्या होगा जानने की उत्सुकता बढ़ रही है।

बेसमेंट का डरावना सच

बेसमेंट वाला दृश्य बहुत डरावना था। अपराधी सरदार का अभिनय जबरदस्त है। चाकू देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बंधक बना व्यक्ति बेचारा लग रहा था। व्हीलचेयर वाला व्यक्ति सब देख रहा था। दीवार के पार दुश्मन की कहानी काफी गहरी लग रही है। आगे क्या होगा देखना बाकी है। हर पल नया खुलासा हो रहा है।

गर्माहट और ठंडक का खेल

घर का माहौल और बेसमेंट का माहौल बिल्कुल अलग था। गर्माहट और ठंडक का अच्छा कंट्रास्ट दिखाया। बच्ची की हंसी और फिर व्हीलचेयर वाले व्यक्ति का गुस्सा। दीवार के पार दुश्मन में निर्देशन बहुत अच्छा है। हर दृश्य में कुछ छिपा है। दर्शक को बांधे रखने की ताकत है इसमें। मुझे यह शैली बहुत पसंद आया।

श्रेडर और नई योजना

कागज को श्रेडर में डालना एक संकेत था। शायद पुरानी यादों को मिटा रहा था। या फिर नई योजना बना रहा था। कंप्यूटर स्क्रीन पर जो चल रहा था वो खतरनाक था। दीवार के पार दुश्मन की कहानी बहुत मजबूत है। एक्शन और इमोशन का सही मिश्रण है। मुझे यह शैली पसंद आया। कहानी में दम है।

खलनायक का खूंखार चेहरा

अपराधी सरदार की आंखों में खूंखारपान साफ दिख रहा था। सिगरेट पीते हुए उसका अंदाज लाजवाब था। बंधक को डराने का तरीका बहुत क्रूर था। व्हीलचेयर वाले व्यक्ति की आंखों में चिंता थी। दीवार के पार दुश्मन में खलनायक का किरदार बहुत यादगार है। ऐसे खलनायक कम ही देखने को मिलते हैं। प्रदर्शन शानदार है।

मासूमियत और बदले की आग

बच्ची और कुत्ते का दृश्य बहुत प्यारा था। लेकिन उसी बीच व्हीलचेयर वाले व्यक्ति का दिमाग कहीं और था। शायद वह बदला लेने की सोच रहा था। दीवार के पार दुश्मन में परिवार और अपराध का टकराव है। कहानी में दम है। हर दृश्य के बाद नया सवाल खड़ा होता है। दर्शक हैरान रह जाता है।

स्क्रीन पर छिपा राज

कंप्यूटर पर दृश्य देखते वक्त उसका चेहरा बदल गया। शायद वह किसी को बचाना चाहता था। या फिर यह सब उसकी योजना का हिस्सा था। दीवार के पार दुश्मन में रहस्य बना हुआ है। अभिनय में जान है। दर्शक को अंत तक बांधे रखने की क्षमता है इस कार्यक्रम में। मुझे यह किरदार बहुत प्रभावित कर गया।

तनावपूर्ण माहौल और आवाजें

व्हीलचेयर की पहियों की आवाज और सन्नाटा। बेसमेंट की ठंडी रोशनी। माहौल बहुत तनावपूर्ण था। अपराधी सरदार ने चाकू निकाला तो सांसें रुक गईं। दीवार के पार दुश्मन का निर्माण गुणवत्ता अच्छा है। हर डिटेल पर ध्यान दिया गया है। यह एक बेहतरीन रोमांचक लग रहा है। देखने में मजा आ रहा है।

खामोश चीख और हिंसा

बंधक बना व्यक्ति चीख रहा था लेकिन आवाज नहीं आई। अपराधी सरदार ने मुंह बंद कर दिया। व्हीलचेयर वाला व्यक्ति सब देख रहा था। दीवार के पार दुश्मन में हिंसा का चित्रण यथार्थवादी है। कहानी में गहराई है। मुझे यह किरदार बहुत प्रभावित कर गया। हर पल नया खुलासा हो रहा है।

अंत की ओर बढ़ते कदम

अंत में व्हीलचेयर वाले व्यक्ति की आंखों में आंसू थे। या फिर गुस्सा था। साफ नहीं पता चला। लेकिन इरादे पक्के लग रहे थे। दीवार के पार दुश्मन का अंत कैसे होगा। सबको इंतजार है। यह कार्यक्रम निराश नहीं करता। एक बार देखना शुरू करेंगे तो रुक नहीं पाएंगे। कहानी बहुत रोचक है।