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दीवार के पार दुश्मनवां12एपिसोड

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दीवार के पार दुश्मन

आदित्य सिंह की पूरी फाल्कन टीम को ब्लैक टाइगर गैंग मार चुका है। सिर्फ आदित्य बचा। पंद्रह साल तक वह दुश्मन को ढूंढता रहा, पर कोई सुराग नहीं मिला। आत्महत्या करने से पहले वह सुनता है कि बगल की बेसमेंट में आवाज़ है, जहाँ सालों से कोई नहीं रहता। छुपकर देखने पर पता चलता है कि अंदर वही लोग हैं जिन्हें वह ढूंढ रहा था। अब आदित्य उन बुजुर्गों और साथियों के माता-पिता की रक्षा भी करना चाहता है और अपना बदला भी लेना चाहता है। वह दुश्मन को आपस में लड़ाता है, लेकिन क्या वह इन सबके बीच सबको बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुफा से संघर्ष की शुरुआत

गुफा में घायल अवस्था में रेंगते हुए निकलना किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं लगता। पिता की आंखों में दर्द साफ झलक रहा था जब वह व्हीलचेयर पर बैठे। दीवार के पार दुश्मन की कहानी में यह संघर्ष बहुत गहराई से दिखाया गया है। हर चोट के साथ लगता है कि बदला लेने की आग अभी बुझी नहीं है।

पिता का ममतामय पल

घर का शांत माहौल और सोती हुई बच्ची देखकर दिल पिघल गया। पिता ने धीरे से कंबल ओढ़ाया, यह पल बहुत नाजुक था। दीवार के पार दुश्मन में परिवार की सुरक्षा की चिंता साफ दिखती है। कुत्ते के साथ भी वही ममता दिखाई दी। ऐसा लगा कि बाहर का युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है।

बंधी हुई पत्नी का रहस्य

बिस्तर पर बंधी हुई पत्नी को देखकर हैरानी हुई। पति ने फोन दिखाया तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। दीवार के पार दुश्मन का यह मोड़ बहुत चौंकाने वाला था। सच्चाई सामने आने पर रिश्तों में दरारें कैसे दिखती हैं, यह दृश्य वही बताता है। बहुत तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

कुत्ते के कॉलर का राज

कुत्ते के कॉलर में डिवाइस लगाना किसी जासूसी मिशन जैसा लगा। पिता की हरकतें बहुत सावधानी से थीं। दीवार के पार दुश्मन में हर छोटी चीज का मतलब निकलता है। शायद यह कुत्ता ही किसी राज की चाबी है। देखने वाले को हर पल संदेह होता रहता है कि आगे क्या होगा।

धोखे के आंसू

रोती हुई पत्नी को देखकर लगा कि कोई बड़ा धोखा हुआ है। पति ने उसे सांत्वना दी लेकिन आंखों में गुस्सा था। दीवार के पार दुश्मन में भावनाओं का यह टकराव बहुत तेज है। सच सामने आने के बाद का दर्द हर चेहरे पर साफ झलक रहा था। कहानी बहुत गहरी होती जा रही है।

व्हीलचेयर पर हौसला

अंधेरी सुरंग से निकलकर रोशनी में आना जैसे नई जिंदगी पाना था। लेकिन व्हीलचेयर ने सब बदल दिया। दीवार के पार दुश्मन में पात्रों की मजबूरी बहुत अच्छे से दिखाई गई है। शारीरिक कमजोरी के बाहर भी हौसला नहीं टूटा है। यह जिद देखकर सम्मान बढ़ जाता है।

बेटी की सुरक्षा

बेटी की नींद नहीं टूटे इसका पूरा ध्यान रखा गया। पिता का प्रेम साफ झलकता है। दीवार के पार दुश्मन में परिवार के लिए लड़ने का जज्बा देखने को मिलता है। खतरनाक रास्तों से गुजरकर भी बस एक ही मकसद है। बच्चों को सुरक्षित रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

रिकॉर्डिंग का सच

फोन में रिकॉर्डिंग सुनकर पत्नी का रंग उड़ गया। सच का सामना करना कितना मुश्किल होता है यह दृश्य बताता है। दीवार के पार दुश्मन में सबूतों का खेल बहुत चलता है। एक छोटी सी आवाज पूरी कहानी बदल सकती है। सस्पेंस बना हुआ है कि आखिर रिकॉर्डिंग में क्या था।

डरावना कमरा

कमरे का माहौल बहुत डरावना और रहस्यमयी था। दीवारों पर पेंटिंग और हल्की रोशनी ने डर बढ़ा दिया। दीवार के पार दुश्मन का सेट डिजाइन बहुत शानदार है। हर कोने से लगता है कि कोई छिपा हुआ है। दर्शक भी इसी कशमकश में रहते हैं कि अगला वार कौन करेगा।

माफ़ी या नया झटका

अंत में पति ने पत्नी को गले लगाया तो लगा शायद माफ़ी मिल गई। लेकिन आंखों में अभी भी सवाल थे। दीवार के पार दुश्मन में रिश्तों की यह उठापटक बहुत दिलचस्प है। क्या सब ठीक हो पाएगा या फिर कोई नया झटका लगेगा। देखने वाले की सांसें रुकी हुई हैं।