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दीवार के पार दुश्मनवां22एपिसोड

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दीवार के पार दुश्मन

आदित्य सिंह की पूरी फाल्कन टीम को ब्लैक टाइगर गैंग मार चुका है। सिर्फ आदित्य बचा। पंद्रह साल तक वह दुश्मन को ढूंढता रहा, पर कोई सुराग नहीं मिला। आत्महत्या करने से पहले वह सुनता है कि बगल की बेसमेंट में आवाज़ है, जहाँ सालों से कोई नहीं रहता। छुपकर देखने पर पता चलता है कि अंदर वही लोग हैं जिन्हें वह ढूंढ रहा था। अब आदित्य उन बुजुर्गों और साथियों के माता-पिता की रक्षा भी करना चाहता है और अपना बदला भी लेना चाहता है। वह दुश्मन को आपस में लड़ाता है, लेकिन क्या वह इन सबके बीच सबको बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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भावुक पल की गहराई

इस शो में दिखाया गया हर दृश्य दिल को छू लेता है और दर्शक को बांधे रखता है। नायिका की आंखों में आंसू और घायल नायक का दर्द बहुत असली लगता है। जब वे एक दूसरे को गले लगाते हैं तो लगता है जैसे समय थम गया हो। दीवार के पार दुश्मन की कहानी में यह रोमांटिक पल बहुत खास है। बारिश की आवाज़ पृष्ठभूमि में तनाव बढ़ाती है। अभिनय बहुत शानदार है। हर कोई इस जोड़ी को पसंद करेगा।

वॉल्ट का रोमांच

तिजोरी वाले कमरे का दृश्य बहुत ही सस्पेंस से भरा हुआ है और रोमांचक है। दो चोर पैसे लेकर भाग रहे हैं लेकिन अलार्म बज उठता है। लाल बत्ती की रोशनी में उनका डर साफ दिखाई देता है। दीवार के पार दुश्मन में एक्शन और थ्रिल का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता है। जमीन टूटने का दृश्य बहुत अच्छा लगा। अंत में वे फंस जाते हैं। अब वे क्या करेंगे यह देखना बाकी है।

प्रेम और संघर्ष

बिस्तर पर बैठकर बातचीत करने वाला दृश्य बहुत इंटेन्स है और गहरा है। नायक चोटिल है फिर भी वह नायिका को सुरक्षा देने की कोशिश करता है। उनकी नज़रों में जो बातें हैं वे शब्दों से कहीं ज्यादा गहरी हैं। दीवार के पार दुश्मन में रिश्तों की यह जटिलता बहुत पसंद आई। संगीत भी मौके के हिसाब से बहुत सही है। यह पल हमेशा याद रहेगा।

बारिश और आंसू

खिड़की से बाहर तेज बारिश हो रही है और कमरे के अंदर भावनाओं का तूफान है। नायिका के गिरते आंसू और नायक की बेचैनी देखकर दर्शक भी भावुक हो जाता है। दीवार के पार दुश्मन का यह एपिसोड बहुत गहरा है। कैमरा एंगल और लाइटिंग ने माहौल को और भी ड्रामेटिक बना दिया है। बहुत ही खूबसूरत सीन है। प्रकृति और भावनाओं का संगम है।

खतरे की घंटी

जब लाल अलार्म बजता है तो सांसें रुक सी जाती हैं और डर लगता है। चोरों के चेहरे पर पसीना और डर साफ झलक रहा है। वे भागने की कोशिश करते हैं लेकिन रास्ता बंद हो जाता है। दीवार के पार दुश्मन में सस्पेंस बनाए रखने का यह तरीका बहुत अनोखा है। दर्शक को यह जानने की उत्सुकता होती है कि आगे क्या होगा। कहानी बहुत रोचक है।

घायल योद्धा की मजबूरी

नायक के हाथ में पट्टी बंधी है और वह दर्द में है, फिर भी वह हार नहीं मानता। नायिका उसका सहारा बनकर खड़ी है। उनकी केमिस्ट्री स्क्रीन पर बहुत अच्छी लगती है। दीवार के पार दुश्मन में पात्रों की यह मजबूरी और जिद देखने लायक है। संवाद कम हैं लेकिन अभिनय सब कुछ कह जाता है। बहुत प्रभावशाली है। यह जोड़ी बहुत पसंद आई।

लूट का अंजाम

थैलों में भरे नोट और टूटी हुई जमीन देखकर लगता है कि कोई बड़ी वारदात हुई है। दोनों आरोपी अब फंस चुके हैं। पीछे बड़ा लोहे का दरवाजा बंद हो चुका है। दीवार के पार दुश्मन में अपराध और सजा का यह पहलू बहुत रोचक है। सेट डिजाइन बहुत रियलिस्टिक लगता है। अंधेरा और रोशनी का खेल कमाल का है। माहौल बहुत डरावना है।

चुंबन का पल

जब वे एक दूसरे को चुंबन देते हैं तो उस पल में सारा दर्द भूल जाता है। यह सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव है। नायिका की हिम्मत और नायक का समर्पण देखने लायक है। दीवार के पार दुश्मन में रोमांस को जिस तरह दिखाया गया है वह बहुत परिपक्व है। यह दृश्य यादगार बन गया है। प्रेम की जीत होती है।

फंसने का डर

तिजोरी के कमरे में दोनों व्यक्ति अब घबरा गए हैं और डरे हुए हैं। उनके पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है। दीवार पर लगी बत्ती लगातार जल रही है। दीवार के पार दुश्मन में क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ते हुए यह दृश्य बहुत महत्वपूर्ण है। निर्देशक ने तनाव को बहुत अच्छे से कैद किया है। दर्शक बंधा रह जाता है। अंत क्या होगा।

कहानी का मोड़

बिस्तर वाले कमरे से लेकर वॉल्ट तक की कहानी बहुत तेजी से आगे बढ़ती है। हर दृश्य में कुछ नया खुलासा होता है। पात्रों के बीच का संघर्ष और प्रेम दोनों ही बराबर हैं। दीवार के पार दुश्मन को देखने का अनुभव बहुत रोमांचक रहा है। अगले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार होगा। बहुत ही शानदार प्रस्तुति है। सबको देखना चाहिए।