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दीवार के पार दुश्मनवां10एपिसोड

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दीवार के पार दुश्मन

आदित्य सिंह की पूरी फाल्कन टीम को ब्लैक टाइगर गैंग मार चुका है। सिर्फ आदित्य बचा। पंद्रह साल तक वह दुश्मन को ढूंढता रहा, पर कोई सुराग नहीं मिला। आत्महत्या करने से पहले वह सुनता है कि बगल की बेसमेंट में आवाज़ है, जहाँ सालों से कोई नहीं रहता। छुपकर देखने पर पता चलता है कि अंदर वही लोग हैं जिन्हें वह ढूंढ रहा था। अब आदित्य उन बुजुर्गों और साथियों के माता-पिता की रक्षा भी करना चाहता है और अपना बदला भी लेना चाहता है। वह दुश्मन को आपस में लड़ाता है, लेकिन क्या वह इन सबके बीच सबको बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

सुरंग का खतरनाक खेल

यह दृश्य वास्तव में रोंगटे खड़े करने वाला है। कीचड़ में रेंगते हुए उस व्यक्ति की मेहनत देखकर पसीना आ जाता है। घड़ी की टिकटिक और बम का समय यंत्र दिल की धड़कन बढ़ा देता है। दीवार के पार दुश्मन में ऐसा रोमांच पहले कभी नहीं देखा। रोशनी में चेहरे का डर साफ दिख रहा था। सच में बहुत ही तनावपूर्ण माहौल बनाया गया है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

चमड़े के जैकेट वाला गुस्सा

लंबे बालों वाले नेता का गुस्सा देखकर लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। फोन पर बात करते समय उसकी आंखों में आग थी। नक्शे पर योजना बनाना और फिर अचानक सुरंग में पहुंचना कहानी को नया मोड़ देता है। दीवार के पार दुश्मन की यह कड़ी सबसे बेहतरीन है। गुस्से में उसने सिगरेट को जमीन पर फेंक दिया जो उसकी बेचैनी को दिखाता है।

बम का टाइमर और मौत

लाल रंग का अंकीय समय यंत्र जब उल्टी गिनती शुरू करता है तो सांसें रुक जाती हैं। उस व्यक्ति ने मुंह में मशाल दबाकर बम को संभाला जो बहुत जोखिम भरा था। हर सेकंड कीमती था और मौत सामने खड़ी थी। दीवार के पार दुश्मन में कार्रवाई का यह स्तर लाजवाब है। बच पाना नामुमकिन लग रहा था पर उसने हिम्मत नहीं हारी।

चूहे का डरावना आगमन

अचानक सामने आए चूहे ने माहौल को और भी डरावना बना दिया। फावड़ा लेकर खड़ा वह व्यक्ति किसी भी पल हमला कर सकता था। कीचड़ और अंधेरे का मिश्रण बहुत अच्छा बनाया गया है। दीवार के पार दुश्मन में ऐसे छोटे विवरण कहानी को गहरा करते हैं। सच में रोंगटे खड़े हो गए और दिल की धड़कन तेज हो गई।

योजना में खराबी

टेबल पर रखे कागजात और फोन की कॉल ने सब कुछ बदल दिया। दल के बीच तनाव साफ झलक रहा था। गुस्से में सिगरेट फेंकना और घड़ी देखना दिखाता है कि समय कम है। दीवार के पार दुश्मन की कहानी में यह मोड़ जरूरी था। अब आगे क्या होगा यह जानना जरूरी है। सभी कलाकारों ने अपना किरदार बहुत अच्छे से निभाया है।

कीचड़ में संघर्ष

उस व्यक्ति के कपड़े पूरी तरह गंदे हो चुके थे लेकिन उसने हार नहीं मानी। पेट के बल रेंगते हुए आगे बढ़ना आसान नहीं था। मशाल की रोशनी में रास्ता ढूंढना किसी चुनौती से कम नहीं। दीवार के पार दुश्मन में यह संघर्ष दिल को छू गया। मेहनत रंग लाएगी या नहीं यह तो आगे पता चलेगा। बहुत ही कठिन परिस्थितियां थीं।

आमना सामना

जब दोनों एक दूसरे के सामने आए तो हवा में तनाव था। एक के पास फावड़ा था और दूसरा जमीन पर था। नजरों की लड़ाई सबसे खतरनाक थी और जानलेवा भी। दीवार के पार दुश्मन में यह आमना सामना दृश्य यादगार बन गया। कौन जीतेगा यह अभी कहना मुश्किल है। दोनों की आंखों में अलग अलग मकसद साफ दिख रहे थे।

अंधेरी सुरंग का सच

सुरंग की दीवारों पर लगी रोशनी और पानी का बहना माहौल बनाता है। वहां पहुंचकर उस व्यक्ति को अहसास हुआ कि वह अकेला नहीं है। दीवार के पार दुश्मन का मंच नक्शा बहुत असली लगता है। हर कोने पर खतरा छिपा हुआ था और मौत का साया था। देखते रहने को मन करता है और कुछ पल के लिए सांस रुक जाती है।

वक्त की पाबंदी

घड़ी में देखे गए समय और बम के समय यंत्र में सीधा संबंध था। हर पल कीमत चुकानी पड़ रही थी और जान जोखिम में थी। उस व्यक्ति की आंखों में डर और जिद्द दोनों थे। दीवार के पार दुश्मन में समय की यह दौड़ बहुत तेज है। अंत तक सांसें थमी रहती हैं और पता नहीं चलता। समय बहुत कम बचा था उनके पास।

धोखे की बू

फोन पर बात करने वाले का लहजा बदलते ही सबको शक हो गया। दल में दरार पड़ना तय था और विश्वास टूट गया। फावड़ा उठाने वाला व्यक्ति अब किसी को नहीं छोड़ेगा। दीवार के पार दुश्मन में धोखे की यह परत बहुत गहरी है। कौन किसका साथ देगा यह देखना बाकी है। कहानी में बहुत उतार चढ़ाव आने वाले हैं।