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दीवार के पार दुश्मनवां4एपिसोड

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दीवार के पार दुश्मन

आदित्य सिंह की पूरी फाल्कन टीम को ब्लैक टाइगर गैंग मार चुका है। सिर्फ आदित्य बचा। पंद्रह साल तक वह दुश्मन को ढूंढता रहा, पर कोई सुराग नहीं मिला। आत्महत्या करने से पहले वह सुनता है कि बगल की बेसमेंट में आवाज़ है, जहाँ सालों से कोई नहीं रहता। छुपकर देखने पर पता चलता है कि अंदर वही लोग हैं जिन्हें वह ढूंढ रहा था। अब आदित्य उन बुजुर्गों और साथियों के माता-पिता की रक्षा भी करना चाहता है और अपना बदला भी लेना चाहता है। वह दुश्मन को आपस में लड़ाता है, लेकिन क्या वह इन सबके बीच सबको बचा पाएगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

आदित्य की आंखों का दर्द

आदित्य सिंह की आंखों में गहरा दर्द साफ दिख रहा है। लाल पोशाक वाली महिला के इरादे कुछ साफ नहीं लग रहे हैं। जब उसने केक दिया तो लगा कोई खेल चल रहा है। दीवार के पार दुश्मन सीरीज में ऐसा मोड़ नहीं देखा था। व्हीलचेयर पर बैठे नायक की मजबूरी और गुस्सा दोनों ही दिल को छू लेते हैं। क्या ये प्यार है या कोई साजिश? जानने के लिए देखना होगा। बहुत ही रोमांचक लग रहा है।

बंदूक और केक का खेल

शुरुआत में ही बंदूक साफ करते हुए आदित्य का चेहरा बता रहा है कि वो बदला लेने वाले हैं। फिर अचानक प्रेम भरा सीन आता है। दीवार के पार दुश्मन की कहानी में ये उतार चढ़ाव बहुत अच्छे हैं। छत पर मोमबत्तियों के बीच का दृश्य खूबसूरत है पर खतरा भी बना हुआ है। वो महिला जो केक लेकर आई, क्या वो सच्ची है? हर दृश्य में रहस्य बना हुआ है।

पुरानी यादों का साया

पुरानी यादें ताजा कर देने वाला सीन जब पत्नी हेमा और बेटी आदिति केक लेकर आती हैं। आदित्य की मुस्कान देखकर लगता है सब ठीक था। पर अब दीवार के पार दुश्मन में वो अकेला है। लाल लिबास वाली महिला शायद उसका फायदा उठाना चाहती है। भावनात्मक पल और कार्रवाई का मिश्रण बहुत जबरदस्त है। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखना सुकून देता है।

खतरे की घंटी

गुंडों के साथ झगड़ा और डायनामाइट वाला सीन दिखाता है कि खतरा कितना गहरा है। आदित्य सिंह चुपचाप सब देख रहे हैं। दीवार के पार दुश्मन में हर किरदार की अपनी कहानी है। छत वाला सीन बहुत प्रेम भरा है पर आंखों में डर साफ है। क्या वो महिला दुश्मन है या दोस्त? ये पहेली सुलझानी होगी। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा।

मोमबत्ती और शक

केक पर मोमबत्ती जलती है तो लगता है जश्न का माहौल है। पर आदित्य के चेहरे पर शक की लकीरें साफ हैं। दीवार के पार दुश्मन की पटकथा बहुत मजबूत है। लाल पोशाक वाली महिला का अंदाज बहुत रहस्यमयी है। वो उसके चेहरे को छूती है तो लगता है कोई जादू चल रहा है। क्या ये प्यार का इजहार है या मौत का संदेश? बहुत ही रोमांचक है।

वर्कशॉप का सच

वर्कशॉप में अकेले बैठे आदित्य की हालत देखकर तरस आता है। वो कुछ बना रहे हैं या तोड़ रहे हैं, साफ नहीं है। दीवार के पार दुश्मन में ऐसा रहस्य हर भाग में मिलता है। फिर वो महिला आती है और सब बदल जाता है। छत की रोशनी और शहर की लाइट्स पृष्ठभूमि में बहुत प्यारी लग रही हैं। कहानी में गहराई है।

परिवार की याद

बेटी आदिति की मासूमियत और पत्नी हेमा का प्यार याद आता है। अब वो व्हीलचेयर में हैं पर हिम्मत नहीं हारी है। दीवार के पार दुश्मन में परिवार की अहमियत बहुत दिखाई गई है। लाल लिबास वाली महिला शायद उसी का हिस्सा हो या दुश्मन। केक वाला सीन बहुत भावुक है। हर संवाद और अभिनय पर ध्यान देना जरूरी है।

छत वाली मुलाकात

रात के वक्त छत पर ये मुलाकात किसी फिल्म से कम नहीं लगती। आदित्य सिंह की आंखों में सवाल हैं और महिला के चेहरे पर मुस्कान। दीवार के पार दुश्मन का ये सीन सबसे खास है। मोमबत्तियों की रोशनी में सब कुछ साफ नहीं दिखता। क्या ये धोखा है? नेटशॉर्ट पर ऐसे रोमांचक दृश्य देखना बहुत पसंद आया। लागत कम पर निर्माण शानदार है।

आंधी से पहले

गुंडों के सरदार का गुस्सा और आदित्य की शांति देखकर लगता है आंधी आने वाली है। दीवार के पार दुश्मन में कार्रवाई और नाटक का संतुलन बहुत अच्छा है। लाल पोशाक वाली महिला का किरदार बहुत पेचीदा लग रहा है। वो केक लेकर आई पर इरादे कुछ और ही लग रहे हैं। आदित्य को सावधान रहना होगा। कहानी बहुत आगे बढ़ रही है।

अंत का इंतजार

अंत में जब वो महिला उसके करीब आती है तो सांसें रुक सी जाती हैं। आदित्य सिंह का किरदार बहुत मजबूत है। दीवार के पार दुश्मन में हर मोड़ पर नया झटका लगता है। छत का नजारा और शहर की लाइट्स बहुत खूबसूरत हैं। पर कहानी में खतरा बना हुआ है। क्या आदित्य फिर से चल पाएंगे? ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।