शुरुआत में ही हीरो की आँखें लाल हो जाती हैं, जो बताता है कि वह कोई साधारण इंसान नहीं है। विलेन का टेक्नोलॉजी वाला चश्मा और हीरो का पुराना अंदाज, दोनों का टकराव देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जानिटर का माइटि फिस्ट में ऐसे सीन देखकर लगता है कि असली ताकत मशीनों में नहीं, इंसान के हौसले में होती है। एक्शन सीन्स की कोरियोग्राफी बहुत शानदार है।
विलेन ने इंजेक्शन लगाकर अपनी ताकत बढ़ाई, फिर भी हीरो से हार गया। यह साबित करता है कि बाहरी ताकत कभी भी अंदरूनी हुनर को नहीं हरा सकती। हीरो ने बिना किसी हथियार के विलेन को धूल चटा दी। जानिटर का माइटि फिस्ट की कहानी हमें यही सिखाती है कि सच्ची जीत दिल और मेहनत से मिलती है, न कि शॉर्टकट से।
एपिसोड के अंत में जो मास्क वाला शख्स आता है, उसने पूरी कहानी में नया मोड़ ला दिया है। उसकी एंट्री और चेहरे का भाव बता रहा है कि असली खेल अब शुरू होगा। हीरो और विलेन की लड़ाई तो बस एक ट्रेलर थी। जानिटर का माइटि फिस्ट में आगे क्या होने वाला है, यह जानने के लिए मैं बेताब हूँ।
लड़की का किरदार बहुत ही रहस्यमयी और शांत है। वह बीच में खड़ी होकर सब कुछ देखती रहती है, जैसे उसे पहले से पता हो कि अंत क्या होगा। उसकी ड्रेसिंग और गहने उसकी पर्सनालिटी को और भी निखार रहे हैं। जानिटर का माइटि फिस्ट में उसका रोल आगे चलकर बहुत अहम साबित होने वाला है, मेरा अंदाजा यही कहता है।
विलेन के पास हाई टेक चश्मा और इंजेक्शन था, जबकि हीरो के पास सिर्फ उसकी मार्शल आर्ट्स थीं। फिर भी जीत हीरो की हुई। यह दृश्य बहुत प्रेरणादायक है और दिखाता है कि पुरानी विधाएं कभी पुरानी नहीं होतीं। जानिटर का माइटि फिस्ट ने इस संघर्ष को बहुत खूबसूरती से पेश किया है।