जब वो साधारण कपड़ों वाला लड़का मैदान में उतरा, तो सबको लगा ये कोई मामूली मुकाबला है। लेकिन जैसे ही उसने कवच वाले योद्धा को एक ही वार में गिरा दिया, पूरा दरबार सन्न रह गया। जानिटर का माइटि फिस्ट में ये दृश्य दिखाता है कि असली शक्ति बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक ऊर्जा में होती है। उसकी आँखों में जो ठहराव था, वो किसी महान योद्धा जैसा था।
भूरे वस्त्रों वाले गुरुजी का चेहरा देखकर लग रहा था जैसे वो किसी बड़े रहस्य को जानते हों। जब वो घायल योद्धा के पास दौड़े, तो उनकी आँखों में चिंता नहीं, बल्कि एक अजीब सी उत्सुकता थी। जानिटर का माइटि फिस्ट के इस मोड़ ने साबित कर दिया कि ये सिर्फ एक लड़ाई नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भाव थे, जो कहानी को और गहरा बना रहे थे।
अंत में जब वो काले वस्त्रों वाला व्यक्ति नीली चमक के साथ प्रवेश करता है, तो पूरा माहौल बदल जाता है। उसका मुखौटा और रहस्यमयी उपस्थिति बताती है कि असली खेल अब शुरू हुआ है। जानिटर का माइटि फिस्ट में ये दृश्य एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहाँ साधारण लगने वाला सफाई कर्मचारी असल में किसी बड़ी शक्ति का हिस्सा हो सकता है। ये दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
काले वस्त्रों वाले युवा योद्धा का चेहरा देखकर लग रहा था जैसे उसे अपनी हार का यकीन नहीं हो रहा हो। उसकी आँखों में आश्चर्य और थोड़ी सी ईर्ष्या थी। जानिटर का माइटि फिस्ट में ये पल दिखाता है कि कैसे एक साधारण व्यक्ति की असाधारण शक्ति सबके समीकरण बदल देती है। उसका मुंह खोलकर खड़ा रहना इस बात का सबूत था कि वो इस नतीजे की उम्मीद नहीं कर रहा था।
काले वस्त्रों वाले बुजुर्ग गुरुजी के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी, जैसे वो सब कुछ पहले से जानते हों। जब वो अपनी माला घुमाते हुए बैठे थे, तो लग रहा था जैसे वो इस पूरे नाटक के सूत्रधार हों। जानिटर का माइटि फिस्ट में उनका किरदार सबसे ज्यादा रहस्यमयी है। उनकी हर हरकत में एक गहरा मतलब छिपा हुआ लगता है, जो आगे की कहानी को और दिलचस्प बना देगा।