अंत में वो कमरा जिसमें निजी वस्त्र लटके थे, सबसे ज्यादा डरावना था। वो बूढ़ा आदमी किस जाल में फंसा है? हंटिंग नेट का अंत दिमाग घुमा देने वाला है। ये लघु फिल्म नहीं, उत्कृष्ट कृति है। छत से लटके कपड़े और अंधेरा कमरा। माहौल इतना भारी है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
चेहरे पर खून और माथे पर पट्टी, ये महिला कोई साधारण नहीं है। उसकी आंखों में बदले की आग साफ दिखती है। हंटिंग नेट के किरदार इतने जटिल हैं कि समझना मुश्किल हो जाता है। कौन शिकारी है और कौन शिकार? उसने खून को ऐसे पोंछा जैसे कोई मेकअप हो। ये ठंडक खतरनाक है।
तीन भाइयों की पुरानी फोटो और अब अकेलापन। शराब की बोतल और अखबारों का ढेर बता रहा है वक्त कितना बदल गया। हंटिंग नेट में भूतकाल और वर्तमान का खेल खूबसूरती से दिखाया गया है। टेबल पर पड़ी चाबी और रिमोट। छोटी चीजें बड़ी कहानी कहती हैं। ये विवरण बहुत मायने रखते हैं।
वार्डरोब से निकलते ही मौत तय थी। उस आदमी की आंखों में डर साफ दिख रहा था। हंटिंग नेट ने बिना संवाद के कहानी कह दी। डंडे से वार करने का दृश्य रोंगटे खड़ा करने वाला था। पसीने से तरबतर चेहरा और कांपते हुए हाथ। अभिनय इतना सटीक है कि लगता है हम वहीं मौजूद हैं।
लाल साड़ी वाली महिला का गुस्सा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। अलमारी में छिपी मौत और फिर डंडे से वार करना। हंटिंग नेट ने सस्पेंस का नया स्तर छू लिया है। वो खून पोंछते हुए जिस तरह मुस्कुराती है, लगता है बदला लेना ही उसका मकसद था। उसकी आंखों में ठंडक थी जो किसी भी इंसान को डरा सकती है। ये कहानी सिर्फ खून की नहीं, बल्कि टूटे हुए भरोसे की है।
बूढ़े आदमी की हंसी ने तो नींद उड़ा दी। कमरे में लटके कपड़े और मोबाइल पर उसी महिला को देखना। क्या ये भी उसी गैंग का है? हंटिंग नेट की कहानी में हर किरदार के राज़ दफन हैं। वो तीन भाइयों की फोटो जरूर कुछ इशारा कर रही है। शराब की बोतल और अखबार बता रहे हैं कि वो अकेला पड़ गया है। अब वो क्या करेगा ये देखना बाकी है।
शुरू में लगा भूत है, पर बाद में पता चला इंसानियत ही खतरनाक है। वो तीन भाई मिलकर क्या कर रहे थे? हंटिंग नेट में दिखाया गया हर दृश्य एक पहेली है। खून की बूंदें और वो खामोशी, छायांकन कमाल का है। फर्श पर गिरा हुआ आदमी और उसकी सहमी हुई आंखें। हर पल लगता है कुछ बड़ा होने वाला है।
संदेश समूह वाला दृश्य बहुत अहम था। वो संदेश पढ़कर समझ आया कि ये सब योजनाबद्ध है। बूढ़ा आदमी शराब पीते हुए जिस तरह टाइप करता है, डरावना लगता है। हंटिंग नेट ने थ्रिलर की परिभाषा बदल दी है। स्क्रीन पर टाइप होते शब्द और फिर अचानक खामोशी। ये डर असली लगता है।
अलमारी के अंदर लिपटे हुए शव देखकर सांस रुक गई। लाल पोशाक वाली महिला इतनी निर्दय कैसे हो सकती है? शायद उसने बहुत कुछ सहा होगा। हंटिंग नेट की पटकथा में गहराई है जो बार-बार देखने पर मजबूर करती है। प्लास्टिक में लिपटी लाशें और खून के निशान। ये दृश्य आसानी से भुलाया नहीं जा सकता।
सीधा प्रसारण देखते हुए वो पागल हंसी हंस रहा था। क्या उसे पता है कि उसके भाई मारे जा चुके हैं? हंटिंग नेट में मोड़ का इंतज़ार बेचैन करता है। हर फ्रेम में खौफ छिपा हुआ है। बिस्तर पर लेटकर मोबाइल देखना और फिर हंसना। ये पागलपन की हद को पार कर जाता है।
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