अन्वी शर्मा की मुस्कान में अब वो पुराना दर्द नहीं था। हंटिंग नेट ने साबित कर दिया कि वक्त सबका इलाज है। जेल के बाद की जिंदगी आसान नहीं होती, पर वो लड़ रही है। बचपन की यादें और वो खुला मैदान सब कुछ सुकून दे रहा था। ये कहानी हर किसी को सिखाती है कि हार नहीं माननी चाहिए।
कब्र पर रखे गए सफेद फूल जैसे अन्वी शर्मा के आंसू थे। हंटिंग नेट ने इस सीन को बहुत खूबसूरती से फिल्माया। बीते वक्त को भुलाकर आगे बढ़ना ही असली जीत है। रोहन वर्मा और बच्ची का साथ उसे ताकत दे रहा था। ये अंत देखकर लगा कि सबको सुकून मिल गया। बहुत ही संजीदा और गहरी कहानी है ये।
अन्वी शर्मा और रोहन वर्मा का रिश्ता बहुत गहरा है। हंटिंग नेट ने दिखाया कि मुश्किल वक्त में कौन साथ खड़ा होता है। जब वो कब्र पर मिले, तो लगा जैसे सब कुछ ठीक हो गया हो। गलतियां होती हैं, पर रिश्ते निभाना जरूरी है। ये सीरीज देखकर दिल भारी हो गया। सच में बहुत भावनात्मक यात्रा थी।
अंधेरे बादलों के बीच से निकली धूप जैसे अन्वी शर्मा की जिंदगी में आई। हंटिंग नेट का ये संदेश बहुत पॉजिटिव है। जेल की सलाखें टूट गईं, पर यादें बाकी हैं। बच्ची की मुस्कान ने सब दर्द धो दिया। ये कहानी सिर्फ सजा के बारे में नहीं, फिर से खड़ा होने के बारे में है। बहुत प्रेरणादायक लगा।
अन्वी शर्मा की आंखों में वो दर्द साफ दिख रहा था जब वो जेल से बाहर निकली। पांच साल का सफर आसान नहीं होता किसी के लिए भी। हंटिंग नेट ने इस सीन को बहुत ही भावुक तरीके से दिखाया है जो दिल को छू गया। रोहन वर्मा का साथ भी देखकर लगा कि वो अकेली नहीं है इस दुनिया में। अंत में वो मुस्कुराई जरूर लेकिन आंखों में आंसू थे। ये कहानी दिल को छू गई। सच में बहुत गहरा असर छोड़ती है ये सीरीज।
जब अन्वी शर्मा ने कब्र पर फूल रखे, तो लगा जैसे वो अपने बीते वक्त को विदा कर रही हो। हंटिंग नेट की कहानी में ये पल सबसे ज्यादा भारी था और सबको रुला गया। बारिश का मौसम और वो उदासी सब कुछ सही था। रोहन वर्मा और बच्ची का इंतज़ार देखकर लगा कि उम्मीद बाकी है। जीवन में दूसरा मौका मिलना कितना जरूरी है, ये दिखाया अच्छे से।
अंत का वो सीन जब अन्वी शर्मा रोते हुए मुस्कुराई, दिल बैठ गया। हंटिंग नेट ने बता दिया कि जीत सिर्फ सजा काटना नहीं, जीना भी है। बचपन की यादें और वो खुशियां अब सिर्फ यादें हैं। पर वो आगे बढ़ रही है। ये कहानी हर उस इंसान के लिए है जो टूट चुका है। बहुत ही खूबसूरत अंत था इसका। दर्शकों को ये पसंद आएगा।
पांच साल की सजा के बाद अन्वी शर्मा का चेहरा बदल चुका था। हंटिंग नेट में दिखाया गया कि वक्त कैसे सब बदल देता है। रोहन वर्मा का एक साल का साथ भी कम नहीं था। जब वो सब कब्रस्तान में खड़े थे, तो लगा जैसे एक अध्याय खत्म हुआ हो। नई शुरुआत हमेशा मुश्किल होती है, पर नामुमकिन नहीं। ये सीरीज देखनी चाहिए।
बारिश में छतरी के नीचे वो मुलाकात बहुत खास थी। अन्वी शर्मा और उसके परिवार का मिलन देखकर राहत मिली। हंटिंग नेट ने बिना डायलॉग के बहुत कुछ कह दिया। आंखों के इशारे और वो खामोशी सब कुछ बता रही थी। जीवन में कुछ गलतियां होती हैं, पर प्यार बचा रहता है। ये सीन हमेशा याद रहेगा।
अन्वी शर्मा जब मैदान में दौड़ती हुई दिखी, तो लगा वो फिर से जी रही है। हंटिंग नेट ने पुरानी यादों के दृश्य का इस्तेमाल बहुत स्मार्ट किया। खुशियों और गम का ये मिश्रण देखने लायक था। रोहन वर्मा की वफादारी भी तारीफ के लायक है। हर इंसान को अपनी गलतियों की सजा मिलती है, पर माफ़ी भी मिलनी चाहिए।
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