बूढ़े किरदार ने पड़ोसी को पकड़कर मदद मांगी पर सब बेकार गया और उम्मीद टूट गई। जब कोई उम्मीद टूटती है तो इंसान टूट जाता है और निराश हो जाता है। हंटिंग नेट में इमोशनल ड्रामा भी बराबर है जो एक्शन के साथ चलता है। एक्शन के बीच इंसानी जज्बात भी दिखाए गए हैं जो दिल को छू लेते हैं। यह शो सिर्फ डर नहीं बल्कि इंसानियत की कहानी भी है जो गहरा असर छोड़ती है। अंत बहुत ही भावुक कर देने वाला था।
लड़की के गीले बाल और सफेद कपड़े का कॉम्बिनेशन बहुत खूबसूरत पर डरावना था जो विरोधाभासी लग रहा था। कमरे की रोशनी भी बहुत धीमी और रहस्यमयी थी जो डर को बढ़ा रही थी। हंटिंग नेट का सिनेमेटोग्राफी विभाग बहुत तारीफ के लायक है और मेहनत साफ दिखती है। हर फ्रेम एक पेंटिंग जैसा लग रहा था जिसमें रंगों का खेल था। डर और खूबसूरती का अनोखा संगम यहां देखने को मिला जो याद रह जाएगा। दृश्य बहुत ही कलात्मक तरीके से बनाए गए हैं।
उस चाकू की नोक पर जो नक्काशी थी वह बहुत खतरनाक और पुरानी लग रही थी। जब वह फर्श में गड़ा तो लगा कि किसी की जान गई और खून बहा होगा। बूढ़े किरदार की हालत देखकर लग रहा था कि उसने कुछ बहुत बुरा किया है जिसकी सजा मिल रही है। हंटिंग नेट में हर प्रॉप का मतलब होता है और कुछ भी बेवजह नहीं दिखाया गया है। यह छोटी चीजें बड़ी कहानी कहती हैं जो हमें जोड़ती हैं। यह बारीकी से काम करने वाला शो है।
दरवाजे की दरार से दिखा वह नजारा किसी बुरे सपने जैसा था जो हकीकत लग रहा था। रोहन की आंखें फटी की फटी रह गईं और वह हिल भी नहीं पाया। हमें भी वही देखकर डर लगा और सांस रुक गई। हंटिंग नेट में सस्पेंस बनाए रखना आसान नहीं है पर यहां यह बहुत अच्छे से किया गया है। हर एपिसोड के बाद हम बस अगला पार्ट देखना चाहते हैं और इंतजार नहीं होता। यह नशा सा हो गया है जो छूटता नहीं है। कहानी का यह मोड़ बहुत ही चौंकाने वाला था।
इस शो में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस रुक जाती है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। बूढ़े किरदार की आंखों में मौत का डर साफ साफ दिख रहा था जो बहुत असली लगा। महिला के हाथ में चाकू और चेहरे पर अजीब सी शांति देखकर रोंगटे खड़े हो गए। हंटिंग नेट ने ऐसे थ्रिलर की नई परिभाषा लिखी है जो दिमाग में बैठ जाती है। हर सीन में एक नया सवाल खड़ा होता है जो सुलझता नहीं है। यह कहानी आपको अंदर तक हिला देती है और रात भर जगाए रखती है।
रोहन वर्मा का किरदार बहुत असली लगा क्योंकि वह बस एक आम इंसान था जो गलत जगह फंस गया। जब उसने दरवाजे से अंदर झांका तो उसकी हालत खराब हो गई और पसीना आने लगा। कोई भी इंसान ऐसा खौफनाक नजारा देखकर भाग जाएगा क्योंकि जान प्यारी होती है। हंटिंग नेट की कहानी में हर किरदार की अपनी मजबूरी है जो हमें समझ आती है। हमें नहीं पता कि अंदर क्या हुआ था पर डर साफ झलक रहा था और यही इसकी खूबी है। यह दृश्य बहुत यादगार बन गया है।
सफेद तौलिये में लिपटी वह लड़की किसी साये से कम नहीं लग रही थी जो मौत बनकर आई हो। उसके गीले बाल और खामोशी सबसे ज्यादा डरावने थे जो कमरे के माहौल को भारी कर रहे थे। बूढ़े किरदार की गिड़गिड़ाहट दिल दहला देने वाली थी और उसकी आवाज कांप रही थी। हंटिंग नेट में ऐसे दृश्य बार-बार दिमाग में आते हैं और डर पैदा करते हैं। निर्देशक ने माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है जो तारीफ के लायक है। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है।
फर्श पर गिरा वह किरदार अपनी जान की भीख मांग रहा था और रो रहा था। लेकिन सामने खड़ी मौत को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था और वह शांत खड़ी थी। यह पावर डायनामिक बहुत दिलचस्प था जो कहानी को आगे बढ़ाता है। हंटिंग नेट की स्क्रिप्ट में बहुत गहराई है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है। हमें नहीं पता कि अपराधी कौन है और शिकार कौन है असल में। सब कुछ उल्टा पल्टा लग रहा था और रहस्य बना हुआ है। यह अनिश्चितता दर्शकों को बांधे रखती है।
जब रोहन वर्मा सीढ़ियों से गिरते हुए भागा तो लगा कि हम भी उसके साथ उस गलियारे में हैं। कैमरा एंगल और एक्टिंग ने उस पल को जिंदा कर दिया और डर को महसूस कराया। डर का ऐसा असली अहसास कम ही मिलता है जो रोंगटे खड़े कर दे। हंटिंग नेट ने थ्रिलर जॉनर में नया जान डाला है जो पुराने ढर्रे से अलग है। अंत में वह चीख अभी भी कानों में गूंज रही है और डर बना हुआ है। भागने का वह सीन बहुत ही तेज रफ्तार था।
बिना ज्यादा डायलॉग के ही यह सीन इतना असरदार कैसे बना यह देखकर हैरानी हुई। चेहरे के हाव भाव सब कुछ बता रहे थे और आंखें सब कह रही थीं। बूढ़े किरदार का पसीना और कांपते हाथ देखकर तरस आया और डर भी लगा। हंटिंग नेट में विजुअल स्टोरीटेलिंग बहुत मजबूत है जो शब्दों से ज्यादा बोलती है। यह साबित करता है कि शोर मचाने की जरूरत नहीं है बल्कि खामोशी जरूरी है। खामोशी सबसे तेज चीख होती है जो दिल तक पहुंचती है।
इस एपिसोड की समीक्षा
नवीनतम