जब ब्राउन हुडी वाली लड़की ने चेतावनी दी थी, तभी समझ जाना चाहिए था कि कुछ गड़बड़ है। लेकिन ब्लॉन्ड लड़की को तो बस वायरल होना था। जब ईविल आता है में यही तो डरावना है, इंसान की लापरवाही। उस गुड़िया की आँखें तो जैसे जीवित थीं, और अंत में चेहरे पर दरारें देख रूह कांप गई।
क्या सच में लाइक्स और व्यूज के लिए लोग इतना जोखिम उठा लेंगे? ब्लॉन्ड लड़की का अहंकार ही उसकी मौत बना। जब ईविल आता है ने बहुत बारीकी से दिखाया कि कैसे टेक्नोलॉजी हमें अंधा बना देती है। उस पुराने कैबिनेट पर लिखा फिल्माने की मनाही साफ़ दिख रहा था, फिर भी उसने रिकॉर्ड किया।
वीडियो में तीन सप्ताहांत का टेक्स्ट आया तो लगा शायद समय कूद गया है, लेकिन डर वही का वही है। पादरी का आना और फिर वो छोटी बच्ची, सब कुछ एक पहेली जैसा है। जब ईविल आता है की कहानी में ये ट्विस्ट बहुत गहरा है। क्या वो बच्ची भी उसी श्राप का हिस्सा है? पादरी की आँखों में डर साफ़ दिख रहा था।
जब ब्लॉन्ड लड़की के चेहरे पर दरारें पड़ने लगीं, तो मैं सीट से उछल पड़ा। ये स्पेशल इफेक्ट्स कमाल के थे। जब ईविल आता है में डर को दिखाने का ये तरीका बहुत यूनिक है। वो गुड़िया धीरे-धीरे इंसानों को अपने जैसा बना रही है। आखिरी चीख सुनकर तो रात भर नींद नहीं आएगी।
ब्राउन हुडी वाली लड़की सच में दोस्त थी या बस डरी हुई? उसने बार-बार रोका, लेकिन ब्लॉन्ड ने नहीं सुना। जब ईविल आता है में दोस्ती और जिद्द का ये टकराव बहुत रियल लगा। अंत में जब दोनों फोन देख रहे थे, तो ब्लॉन्ड की हंसी और दूसरी की आतंकित आँखें, बस कमाल का सीन था।
पादरी का किरदार बहुत भारी था, लेकिन लगता है उस शक्ति के आगे वो भी बेबस था। जब ईविल आता है में धर्म और अंधविश्वास के बीच की लड़ाई को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। वो क्रॉस और पवित्र जल, सब बेकार गया। जब बुराई आती है, तो वो किसी को नहीं बख्शती।
उस गुड़िया की मुस्कान में इतनी मासूमियत और इतनी खौफनाकियत कैसे हो सकती है? जब ईविल आता है का मेकअप और प्रॉप्स डिजाइनिंग बहुत लेवल का है। हर बार जब कैमरा उस पर जाता है, लगता है वो हिलेगी। और वो आखिरी फोटो जहाँ वो पीछे खड़ी है, बस दिमाग घूम गया।
क्या ये श्राप अब नई जगह फैल गया है? जब लोग नए घर में शिफ्ट हुए, तो गुड़िया भी साथ चली गई। जब ईविल आता है की कहानी बताती है कि बुराई कहीं भी जा सकती है। ब्लॉन्ड लड़की की मौत के बाद भी कहानी रुकी नहीं, ये सबसे डरावनी बात है। अब उस बच्ची की बारी है।
अंधेरे में फोन की टॉर्च और स्क्रीन की रोशनी ने जो माहौल बनाया, वो काबिले तारीफ है। जब ईविल आता है ने दिखाया कि कैसे छोटी चीजें डर को बढ़ा देती हैं। जब दोनों लड़कियां फोन में गुड़िया को देख रही थीं, तो सस्पेंस अपने चरम पर था। टेक्नोलॉजी ही अब भूत है।
ब्लॉन्ड लड़की को लगा वो सब कंट्रोल कर सकती है, लेकिन अंत में वो चीखती रही और कोई सुनने वाला नहीं था। जब ईविल आता है में इंसानी अहंकार का पतन बहुत दर्दनाक दिखाया गया है। उसकी आखिरी मुस्कान और फिर चीख, ये कंट्रास्ट दिल दहला देने वाला था। कभी-कभी न सुनना महंगा पड़ता है।
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