शुरुआत में केक और मोमबत्तियों वाला मासूम जन्मदिन देखकर लगा सब ठीक है, पर अचानक जब बुराई आती है तो माहौल बदल जाता है। पादरी का खुद को घायल करना और गुड़िया पर खून बहाना रोंगटे खड़े कर देता है। आग और कीड़ों वाला दृश्य तो बिल्कुल दिमाग घुमा देने वाला था। डर का ये सफर दिलचस्प है।
पादरी का चाकू से अपना हाथ काटना और उस खून को कांच की बोतल में भरना बहुत ही अजीब लगा। लगता है जब बुराई आती है तो धर्म भी डगमगा जाता है। गुड़िया पर खून गिरते ही उसका हिलना और काला धुआं निकलना दिखाता है कि ये कोई साधारण शैतान नहीं है। रहस्य गहरा होता जा रहा है।
जब छत से खून की बूंदें टपकने लगीं और फिर पूरा कमरा आग की लपटों में घिर गया, तो सांस रुक सी गई। जब बुराई आती है तो घर भी जलने लगता है। लड़की का गुस्से में चिल्लाना और दांत दिखाना बताता है कि शायद वो भी किसी शक्ति के अधीन है। ये दृश्य बहुत तनावपूर्ण था।
पंचकोण के बीच बैठी गुड़िया पर जब पादरी ने खून बहाया, तो उसका जीवित हो उठना और काला धुआं छोड़ना बहुत डरावना था। जब बुराई आती है तो बेजान चीजें भी जान लेने लगती हैं। मोमबत्तियों की रोशनी में वो दृश्य किसी बुरे सपने जैसा लग रहा था। गुड़िया की आंखें अब भी दिमाग में हैं।
जब काले लिबास में टीम लेजर लाइट्स के साथ अंदर आई, तो लगा अब कुछ बड़ा होने वाला है। जब बुराई आती है तो कार्रवाई भी बढ़ जाती है। खिड़की से झांकते हुए उनका अंदाज बहुत पेशेवर लगा। लगता है अब लड़ाई असली मैदान में उतरेगी। ये मोड़ कहानी को नई दिशा देता है।
ब्लॉन्ड आदमी का लकड़ी का क्रॉस उठाकर दरवाजे को रोकना और उसके हाथों से खून बहना बहुत नाटकीय था। जब बुराई आती है तो इंसान भी टूटने लगता है। उसका चेहरा पसीने और खून से सना हुआ था, जो दर्द और संघर्ष दिखा रहा था। ये दृश्य बहुत भावनात्मक था।
आग और कीड़ों के बीच लड़की का अचानक गुस्से में चिल्लाना और दांत दिखाना बहुत चौंकाने वाला था। जब बुराई आती है तो इंसान का रूप भी बदल जाता है। उसकी आंखों में नफरत और चेहरे पर क्रोध साफ दिख रहा था। लगता है वो किसी शक्ति के कब्जे में है। ये पल बहुत तनावपूर्ण था।
कमरे में आग लगने के बाद दीवारों से कीड़ों का निकलना और सब तरफ फैल जाना बहुत अजीब लगा। जब बुराई आती है तो प्रकृति भी विद्रोह कर देती है। लड़कियां डर के मारे चीख रही थीं और कीड़े हर जगह थे। ये दृश्य बहुत ही अश्लील और डरावना था। माहौल बिल्कुल बदल गया।
पादरी का चाकू निकालना और खुद को घायल करना बताता है कि उसके इरादे कुछ और ही हैं। जब बुराई आती है तो धर्मगुरु भी रास्ता भटक जाते हैं। उसका चेहरा गंभीर था और आंखों में कुछ छिपा हुआ था। लगता है वो किसी बड़े श्राप को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। ये कथानक में मोड़ दिलचस्प है।
छत से टपकती खून की बूंदें और फिर अचानक आग का फैलना बहुत ही डरावना था। जब बुराई आती है तो घर भी जलने लगता है। लकड़ी के फर्श पर खून का फैलना और फिर आग की लपटें उठना बहुत ही दृश्य था। ये दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण और डरावना था। माहौल बिल्कुल बदल गया।
इस एपिसोड की समीक्षा
नवीनतम