जब वो सुनहरी बालों वाली औरत गुड़िया को पकड़े खड़ी थी, तो लगा जैसे कोई श्रापित कहानी शुरू हो रही हो। जब बुराई आती है में डर का माहौल इतना गहरा है कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जादुई चक्र और जंजीरों का दृश्य तो बिल्कुल दिल दहला देने वाला था।
पादरी साहब का क्रॉस लेकर सामने आना और फिर उस लकड़ी जैसे राक्षस से टकराव, ये सब जब बुराई आती है का सबसे रोमांचक हिस्सा था। धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करके बुराई को हराने की कोशिश देखकर लगता है कि अच्छाई अभी भी जिंदा है।
जब वो औरत चीखती है और उसका चेहरा लकड़ी जैसा हो जाता है, तो सच में डर लगता है। जब बुराई आती है में ऐसे विजुअल इफेक्ट्स हैं जो आपको स्क्रीन से चिपकाए रखते हैं। उस राक्षसी रूप की आवाज़ और हुलिया बिल्कुल यादगार है।
फर्श पर बना वो चमकता हुआ चक्र और उसमें कैद आत्माएं, ये सब जब बुराई आती है की सबसे खूबसूरत और डरावनी डिजाइन है। ऐसे सीन्स देखकर लगता है जैसे हम किसी प्राचीन अनुष्ठान का हिस्सा बन गए हों।
जब वो औरत रोती है और उसके आंसू गिरते हैं, तो दिल पिघल जाता है। जब बुराई आती है में भावनाओं को इतनी खूबसूरती से दिखाया गया है कि आप खुद को उस दर्द में खो पाते हैं। ये सिर्फ डर नहीं, इंसानियत की कहानी भी है।
जब वो आदमी दौड़ता हुआ आता है और सब कुछ देखकर हैरान रह जाता है, तो लगता है जैसे जब बुराई आती है में हर किरदार की अपनी कहानी है। उसकी चिंता और घबराहट आपको भी चिंतित कर देती है।
दीवार पर खून के निशान और जमीन पर पड़ा फोन, ये सब जब बुराई आती है में एक नए रहस्य की शुरुआत करते हैं। जब वो लड़की फोन उठाती है, तो लगता है कि अब कहानी में नया मोड़ आएगा।
कमरे में फैला धुआं और टूटी हुई रोशनी, ये सब जब बुराई आती है के माहौल को और भी डरावना बनाते हैं। ऐसे सीन्स देखकर लगता है जैसे हम किसी भूतिया हवेली में फंस गए हों।
जब पादरी और वो आदमी जमीन पर गिरते हैं, तो लगता है जैसे जब बुराई आती है में बुराई की ताकत बहुत ज्यादा है। उनका संघर्ष और दर्शकों की सांसें रुक सी जाती हैं।
जब वो नई लड़की सीढ़ियों से उतरती है और खून देखकर चौंक जाती है, तो जब बुराई आती है में एक नई उम्मीद जगती है। शायद वो इस रहस्य को सुलझा ले। उसकी आंखों में डर और जिज्ञासा दोनों साफ दिखते हैं।
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