बिजली कड़कने के साथ ही कहानी अपने चरम पर थी। प्रकृति भी जैसे कहानी में शामिल हो गई। हंटिंग नेट का अंत बहुत धमाकेदार था। अंधेरा और रोशनी का खेल बहुत अच्छा था। अगले भाग का इंतजार मुश्किल होगा।
पीड़ित की चीखें सुनकर रूह कांप गई थी। उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया। हंटिंग नेट में भावनात्मक ड्रामा बहुत गहरा है। बेचारे की किस्मत बहुत ही खराब साबित हुई। ऐसे अंत की उम्मीद किसी को नहीं थी।
मॉल से लेकर नदी तक का सफर बहुत तेजी से हुआ। कहानी की रफ्तार कभी धीमी नहीं पड़ती है। हंटिंग नेट के एपिसोड बहुत रोमांचक होते हैं। हर जगह कुछ न कुछ होता रहता है। दर्शक बिल्कुल भी बोर नहीं होते हैं।
सूट पहने उस व्यक्ति की हंसी पागलपन की हद तक थी। उसने बारिश में खुलकर जोर से हंसी थी। हंटिंग नेट के विलेन का किरदार बहुत यादगार है। उसकी आंखों में जीत की चमक साफ दिख रही थी। ऐसा अभिनय बहुत कम देखने को मिलता है।
नदी किनारे का वो खौफनाक दृश्य सच में दिल दहला देने वाला था। बूढ़े आदमी की पागलपन भरी हंसी ने रोंगटे खड़े कर दिए। हंटिंग नेट की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। बारिश और खून का मिश्रण बहुत गहरा प्रभाव छोड़ता है। मैं अगला एपिसोड देखने के लिए बेताब हूं।
हाईवे पर पुलिस की चेसिंग सीन बहुत ही शानदार थी। महिला अधिकारी का गुस्सा साफ दिख रहा था। हंटिंग नेट में एक्शन का तड़का बहुत बढ़िया है। सुनहरी कार और पुलिस कार का पीछा देखते ही बनता था। काश ये सीन बड़े पर्दे पर देखने को मिलता।
टोपी वाले आदमी की आंखों में डर साफ झलक रहा था। उसकी बेचैनी ने पूरा माहौल गंभीर कर दिया। हंटिंग नेट के किरदार इतने असली लगते हैं। अंत में उसकी हालत देखकर बहुत बुरा लगा। कहानीकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
बादलों का छाया रहना और तूफानी मौसम कहानी का हिस्सा लग रहा था। हंटिंग नेट की सिनेमेटोग्राफी बहुत प्रशंसनीय है। हर फ्रेम में एक अलग ही तरह का तनाव महसूस हुआ। बारिश में खड़ा वो आदमी किसी विलेन से कम नहीं लगा। माहौल बहुत ही डरावना था।
काले कपड़े वाली महिला छाता लेकर अचानक आ गई। उसका रहस्य अभी तक खुल नहीं पाया है। हंटिंग नेट में ऐसे ट्विस्ट बहुत पसंद आते हैं। वो कौन थी और क्यों आई ये जानना जरूरी है। कहानी में अब और भी रोमांच बढ़ गया है।
बैग से निकला हथियार देखकर सब कुछ बदल गया। हिंसा का स्तर अचानक से बहुत बढ़ गया था। हंटिंग नेट में ऐसे दृश्य सावधानी से बनाए गए हैं। पुराने आदमी के इरादे साफ हो गए थे। दर्शक को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं हुआ।
इस एपिसोड की समीक्षा
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