जब वो आदमी सोफे पर गिर जाता है और उसकी आंखें खुली रह जाती हैं तो लगता है कहानी खत्म हो गई। हंटिंग नेट ने हमें यहाँ तक लाकर छोड़ दिया है। क्या वो ज़िंदा बचेगा या उस औरत का शिकार बन जाएगा? यह सस्पेंस बनाये रखना आसान नहीं है। हर भाग के बाद अगले भाग का इंतज़ार होता है। अगर आपको रोमांचक पसंद है तो इसे चूकना नहीं चाहिए। बहुत ही ज़बरदस्त अनुभव था।
निगरानी दृश्य में वो सुनसान गलियां देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हंटिंग नेट की चित्रण ने इस डर को और बढ़ा दिया है। एक अकेली आकृति धीरे धीरे आगे बढ़ रही है। वो आदमी लैपटॉप के सामने कांप रहा है। यह दृश्य बताता है कि वो कितना अकेला और बेचारा है। उसके पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। डर का यह माहौल पूरे कार्यक्रम में बराबर बना रहता है।
अचानक से जब उसके हाथ पर खून टपकता है तो वो चीखने ही वाला होता है। हंटिंग नेट ने यह मोड़ बहुत अच्छे से संभाला है। क्या ये उसका अपना खून है या किसी और का? ये सवाल दिमाग में घूमता रहता है। वो सोफे पर गिर जाता है और उसकी सांसें तेज हो जाती हैं। यह दृश्य प्रभाव देखकर लगता है कि वो अब बच नहीं पाएगा। बहुत ही तेज दृश्य था जो नींद उड़ा देता है।
उस छोटी सी बिल्ली का आना और उस औरत का उसे प्यार से पकड़ना एक अजीब अंतर था। हंटिंग नेट में ये बारीकी बहुत मायने रखती है। ऐसा लगता है कि वो बिल्ली ही उसकी असली ताकत है या शायद वो भी कोई राज रखती है। जब वो मुस्कुराती है तो लगता है कुछ बुरा होने वाला है। ये छोटा सा तत्व पूरे दृश्य को और भी रहस्यमयी बना देता है और दिमाग में सवाल छोड़ जाता है।
शुरुआत में ही एक अजीब सा माहौल बन जाता है जब लाल ड्रेस वाली महिला लिपस्टिक लगाती है और पीछे बंधा हुआ खूनी इंसान दिखता है। उसके बाद आती है एक प्यारी बिल्ली जो इस खौफनाक दृश्य को और भी डरावना बना देती है। हंटिंग नेट ने सच में सस्पेंस का नया स्टार स्थापित किया है। उसकी मुस्कुराहट में छुपा खतरा देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह दृश्य बताता है कि खूबसूरती के पीछे कितना अंधेरा छुपा हो सकता है और दर्शक हैरान रह जाते हैं।
जब वो बूढ़ा आदमी फोन का संदेश पढ़ता है तो उसके चेहरे का डर साफ दिखता है। उसे पता चल जाता है कि वो महिला मामूली नहीं है। हंटिंग नेट की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से असली खेल शुरू होता है। उसके पसीने और कांपते हाथ देखकर लगता है कि वो किसी बड़ी मुसीबत में फंस चुका है। दर्शक भी उसके साथ डरने लगते हैं और पर्दे से नज़रें नहीं हटा पाते हैं।
लैपटॉप पर निगरानी रिकॉर्डिंग देखते वक्त वो आदमी हैरान रह जाता है। गलियां सुनसान हैं लेकिन एक परछाईं दिखती है। हंटिंग नेट में यह तनाव बहुत अच्छे से बनाया गया है। जब उसे अपने हाथ पर खून दिखता है तो समझ नहीं आता कि ये सच है या उसका वहम। यह उलझन दर्शकों को भी बांध कर रखती है। अंत तक पता नहीं चलता कि खून किसका है और कहां से आया है।
पहले दृश्य में फर्श पर पड़ा खूनी पुलिंदा देखकर ही दिमाग सुन्न हो जाता है। लाल ड्रेस वाली महिला उसकी परवाह किए बिना तैयार हो रही है। हंटिंग नेट ने हिंसा को बहुत ही कलात्मक तरीके से दिखाया है। यह विरोधाभास बहुत शक्तिशाली है कि एक तरफ श्रृंगार है और दूसरी तरफ मौत। इस दृश्य ने मुझे शुरू से ही बांध लिया और मैं आगे क्या होगा ये जानने के लिए बेकरार हो गया हूं।
रात का वक्त, पुराना घर और अकेला आदमी। जब वो दरवाजा जांच करने जाता है तो लगता है कोई बाहर है। हंटिंग नेट का माहौल बहुत ही भारी है। हर आवाज़ से डर लगता है। उसके बाद वो लैपटॉप खोलता है और जो देखता है उससे उसकी होश उड़ जाती है। यह मनोवैज्ञानिक रोमांचक पसंद करने वालों के लिए उत्तम है। हर पल में एक अलग ही डर छुपा है जो दिल की धड़कन तेज कर देता है।
फोन पर आया वो संदेश उसके लिए किसी चेतावनी से कम नहीं था। उसने लिखा था कि उस औरत को अभी छेड़ना नहीं है। हंटिंग नेट की कहानी में यह बातचीत बहुत गहरा असर छोड़ती है। वो आदमी समझ जाता है कि वो किसी जाल में फंस चुका है। उसकी आंखों का डर और सांस का रुक रुक कर चलना अभिनय का कमाल था। मैंने ऐसा तनाव लंबा समय तक नहीं देखा था और ये बहुत अच्छा लगा।
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