अस्पताल के हॉल में डॉक्टर और आदमी की बहस देखकर लगता है कि कुछ गड़बड़ है। मॉनिटर पर बच्चे की तस्वीर देखकर आदमी का चेहरा पीला पड़ गया। बिना पते की माफ़ी जैसे कोई बड़ा झटका लगने वाला है। डॉक्टर की गंभीरता और आदमी की घबराहट ने सीन को और भी इंटेंस बना दिया। यह सीन देखकर लगता है कि कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट आने वाला है।
कब्रिस्तान में खड़ी औरत की आँखों में दर्द साफ दिख रहा है, जबकि आदमी हैरान और घबराया हुआ है। बिना पते की माफ़ी जैसे कोई बड़ा सच सामने आने वाला है। अस्पताल में मॉनिटर पर बच्चे की हालत देखकर आदमी का रोना दिल को छू लेता है। यह ड्रामा इतना इमोशनल है कि आँखें नम हो जाती हैं। हर सीन में नया ट्विस्ट और हर किरदार की भावनाएं सच्ची लगती हैं।
कब्रिस्तान से शुरू होकर अस्पताल तक की कहानी बेहद इंटेंस है। आदमी का कागज देखकर हैरान होना और फिर अस्पताल में मॉनिटर पर बच्चे की हालत देखकर रोना दिल को छू लेता है। बिना पते की माफ़ी जैसे कोई बड़ा राज खुलने वाला है। डॉक्टर की गंभीरता और आदमी की घबराहट ने सीन को और भी डरावना बना दिया। यह ड्रामा हर सीन में नया ट्विस्ट लाता है।
अस्पताल के कमरे में मॉनिटर पर बच्चे की तस्वीर देखकर आदमी का चेहरा पीला पड़ गया। बिना पते की माफ़ी जैसे कोई बड़ा झटका लगने वाला है। डॉक्टर की गंभीरता और आदमी की घबराहट ने सीन को और भी इंटेंस बना दिया। यह सीन देखकर लगता है कि कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। मॉनिटर पर बच्चे की हालत देखकर दिल दहल जाता है।
कब्रिस्तान की चुप्पी में तीन लोगों के बीच तनावपूर्ण बातचीत हो रही है। आदमी के हाथ में कागज है और वह हैरान लग रहा है, जबकि चश्मे वाली औरत शांत खड़ी है। बिना पते की माफ़ी जैसे कोई बड़ा राज खुलने वाला है। अस्पताल का सीन देखकर तो रोंगटे खड़े हो गए, जब मॉनिटर पर बच्चे की हालत देखी गई। यह ड्रामा दिल को छू लेता है और हर सीन में नया ट्विस्ट है।