जब वह औरत बच्ची की ड्राइंग देखती है, तो उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। यह ड्राइंग शायद उसकी यादों को ताजा कर देती है। बिना पते की माफ़ी में ऐसे पल बहुत इमोशनल होते हैं। बच्ची की मासूमियत और औरत का दर्द एक साथ मिलकर एक गहरा असर छोड़ते हैं। यह सीन देखकर लगता है कि कहानी में कुछ बहुत बड़ा खुलने वाला है।
कपड़ों की दुकान में आदमी और औरत के बीच की बातचीत बहुत तनावपूर्ण लगती है। औरत के हाथ में सफेद कपड़ा और आदमी का हैरान चेहरा बताता है कि कुछ गड़बड़ है। बिना पते की माफ़ी में ऐसे सीन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। लगता है कि यह कपड़ा किसी खास याद से जुड़ा है, जो दोनों के रिश्ते को प्रभावित कर रहा है।
बारिश में कब्रिस्तान का सीन बहुत ही भावुक है। औरत के आंसू और उसके हाथ में फोटो फ्रेम बताता है कि उसने किसी बहुत करीबी को खो दिया है। बिना पते की माफ़ी में ऐसे पल दर्शकों को रोने पर मजबूर कर देते हैं। आदमी का फोन पर बात करना और फिर हैरान होना इस बात का संकेत है कि कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट आने वाला है।
बच्ची की मासूमियत और वयस्कों के दर्द के बीच का कंट्रास्ट बहुत ही दिलचस्प है। बच्ची की ड्राइंग और उसकी खुशी एक तरफ, और वयस्कों की चिंता और आंसू दूसरी तरफ। बिना पते की माफ़ी में ऐसे सीन कहानी को और भी गहरा बना देते हैं। लगता है कि यह बच्ची इन सभी समस्याओं का हल निकाल सकती है।
औरत के हाथ में फोटो फ्रेम और उसका दुखी चेहरा बताता है कि यह फोटो उसके लिए बहुत खास है। बिना पते की माफ़ी में ऐसे ऑब्जेक्ट्स कहानी को आगे बढ़ाते हैं। लगता है कि यह फोटो किसी गुमशुदा व्यक्ति की है, जिसकी याद में वह औरत इतनी दुखी है। आदमी का हैरान होना इस बात का संकेत है कि वह इस राज से अनजान था।