वह बुजुर्ग आदमी जो छड़ी पकड़े खड़ा है, उसकी आवाज़ में इतना दम है कि पूरा हॉल शांत हो जाता है। जब वह चिल्लाता है, तो लगता है कि वह इस परिवार का असली मुखिया है। उसकी नाराजगी सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे माहौल पर हावी है। यह दृश्य बिना पते की माफ़ी के अंत जैसा तनावपूर्ण है।
लाल साड़ी पहनी महिला की हालत देखकर बहुत बुरा लगा। उसे जबरदस्ती बाहर खींचा गया और वह जमीन पर गिर पड़ी। उसका चेहरा डर और शर्म से भरा हुआ था। यह दृश्य बहुत ही दर्दनाक था और लगता है कि उस पर कोई बड़ा आरोप लगा है। बिना पते की माफ़ी में भी इतना दर्द नहीं होगा।
चांदी जैसे चमकदार गाउन वाली लड़की का रवैया बहुत ही शांत और आत्मविश्वास से भरा है। जब सब कुछ हंगामा मच रहा होता है, तो वह बिल्कुल स्थिर खड़ी रहती है। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है, जैसे वह सब कुछ पहले से जानती हो। यह बिना पते की माफ़ी जैसी कहानी का असली हीरोइन लगती है।
जब चश्मे वाला आदमी और लाल साड़ी वाली महिला जमीन पर गिरते हैं, तो यह दृश्य बहुत ही नाटकीय लगता है। ऐसा लगता है कि यह सब एक साजिश का हिस्सा है। उनकी हालत देखकर हंसी भी आती है और गुस्सा भी। बिना पते की माफ़ी में भी ऐसे ही ट्विस्ट होते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं।
अंत में जब हीरोइन फोन पर बात करती है, तो उसका चेहरा गंभीर हो जाता है। ऐसा लगता है कि उसने कोई बड़ा फैसला ले लिया है या किसी को कोई जरूरी जानकारी दी है। यह कॉल कहानी के आगे के मोड़ को तय कर सकती है। बिना पते की माफ़ी के क्लाइमेक्स जैसा लग रहा है।