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(डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तकवां32एपिसोड

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(डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक

पूर्व सैनिक सूरज सिंह, सीईओ जोया शेट्टी का नकली प्रेमी बनता है ताकि वह विक्रम राठौर के शादी के दबाव से बच सके। सूरज ने जोया के पिता की बीमारी ठीक की, जो उसके गुरु भाई की मौत से जुड़ी थी। विक्रम ने हत्यारे भेजे और बिजनेस में नुकसान पहुँचाया, लेकिन सूरज ने सब हराया। आखिर में सूरज को पता चला कि असली दुश्मन शर्मा परिवार है, और अब उसके सामने बदला और हिफाजत दोनों हैं।
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इस एपिसोड की समीक्षा

पैसे की खेल

इस दृश्य में तनाव बहुत ज्यादा है। बूढ़े आदमी को अपने बेटे की चिंता है लेकिन युवक शांत है। उसने कीमत बढ़ाई और फिर सच बता दिया। यह ट्विस्ट बहुत अच्छा लगा। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने में मज़ा आया। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक की कहानी में ऐसे मोड़ देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। पात्रों की एक्टिंग शानदार है। और अंत में सवाल छोड़ दिया।

धोखे का खेल

युवक ने बहुत चालाकी से बात की। पहले उसने दस लाख मांगे फिर तीस लाख कर दिए। बूढ़े व्यक्ति को लगा उसे सबक मिलेगा पर ऐसा हुआ नहीं। महिला भी इस खेल में शामिल है। यह ड्रामा बहुत रोचक है। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे किरदार मिलते हैं जो दिमाग से खेलते हैं। संवाद बहुत तेज़ और प्रभावशाली हैं। देखने वाला हर पल सोच में पड़ जाता है कि आगे क्या होगा।

कीमत की बात

बातचीत का तरीका बहुत अलग था। युवक बिना डरे कीमत बढ़ाता गया। बूढ़े आदमी ने गुस्से में भी पैसे देने का फैसला किया। यह दिखाता है कि उसे अपने बेटे से कितना प्यार है। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक की कहानी में भावनाएं और पैसा दोनों शामिल हैं। दृश्य की रोशनी और सेटिंग भी बहुत आधुनिक लग रही है। हर एक्टर ने अपने किरदार को पूरी तरह से निभाया है।

असली सच

अंत में पता चला कि वीडियो नकली था। यह सुनकर बूढ़े आदमी के चेहरे के भाव बदल गए। युवक ने इसे बिजनेस बता दिया। यह दृश्य बहुत हैरान करने वाला था। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे ट्विस्ट बार बार देखने को मिलते हैं। महिला का किरदार भी रहस्यमयी लग रहा है। क्या वे फिर से मिलेंगे। यह सवाल मन में बना रहता है। कहानी बहुत आगे बढ़ती है।

गुस्सा और शांति

बूढ़े व्यक्ति का गुस्सा साफ दिख रहा था। वह खड़ा हो गया और धमकी देने लगा। लेकिन युवक डरा नहीं। उसने अपनी शर्तें रखीं। यह संघर्ष बहुत अच्छा लगा। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में पात्रों के बीच की रसायन विज्ञान बहुत अच्छी है। संवाद हिंदी में हैं जो समझने में आसान हैं। हर दृश्य में कुछ नया होता है। दर्शक बोर नहीं होते हैं।

कार्ड का लेनदेन

काले रंग का कार्ड देकर सौदा पक्का हुआ। युवक ने कार्ड लिया और मुस्कुराया। यह पल बहुत महत्वपूर्ण था। लगता है यह पहली बार नहीं हुआ है। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक की कहानी में ऐसे कई राज छिपे हैं। सेटिंग बहुत अमीराना है। कपड़े और बातचीत का तरीका सब कुछ क्लास दिखाता है। देखने में बहुत अच्छा लग रहा है।

धंधा आसान है

युवक ने कहा यह धंधा बहुत आसान है। इससे लगता है कि वे ऐसे कई लोगों को जानते हैं। महिला भी इसमें साथ दे रही है। यह सामूहिक प्रयास है। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे समूह देखने को मिलते हैं जो मिलकर काम करते हैं। कहानी बहुत मजबूत है। हर संवाद का अपना वजन है। दर्शकों को यह पसंद आएगा।

शर्मा जी की एंट्री

अंत में शर्मा जी का जिक्र हुआ। युवक ने कहा वे आते रहेंगे। इसका मतलब यह सिलसिला जारी रहेगा। बूढ़े आदमी को अब चिंता होनी चाहिए। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में कहानी आगे बढ़ती जाती है। हर कड़ी में नया खुलासा होता है। यह शैली बहुत लोकप्रिय हो रही है। लोग ऐसे धारावाहिक देखना पसंद करते हैं।

कॉपी की बात

जाते जाते बूढ़े आदमी ने पूछा क्या और कॉपी हैं। महिला ने चुप रहना बेहतर समझा। यह सस्पेंस बना रहता है। क्या वे ब्लैकमेल करते रहेंगे। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में सस्पेंस का तड़का लगा रहता है। यह दर्शकों को अगली कड़ी के लिए तैयार करता है। एक्टिंग नेचुरल लग रही है। कोई भी संवाद झूठा नहीं लगता।

जीत किसकी हुई

पैसे तो मिल गए लेकिन क्या यह जीत है। बूढ़े आदमी को सबक मिला या नहीं। यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन युवक खुश है। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में जीत और हार का खेल चलता रहता है। यह जीवन का सच है। कहानी बहुत गहरी है। देखने के बाद बहुत कुछ सोचने को मिलता है। यह एक बेहतरीन प्रस्तुति है।