जब वो काले जादू से घिरा हुआ युवक जमीन पर पड़ा था, तब उसकी छाती में चमकता हुआ दिल देखकर रूह कांप गई। फिर अचानक वो उठ बैठा, जैसे किसी देवी ने उसे नई जान दी हो। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि जादू सच में होता है। उसकी आंखों में डर और उम्मीद दोनों थे, बिल्कुल असली इंसान की तरह।
जब वो सुनहरे पंखों वाली देवी अपने सैनिकों के साथ आई, तो पूरा मैदान रोशन हो गया। उसका ताज और कवच इतना चमकदार था कि लग रहा था सूरज खुद उतर आया हो। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि देवताओं का युद्ध सच में हुआ होगा। उसकी मुस्कान में इतनी शक्ति थी कि दुश्मन भी घुटने टेक दें।
वो युवक जो खून से लथपथ कवच में पड़ा था, फिर भी मुस्कुरा रहा था। उसकी आंखों में दर्द था पर होंठों पर जीत की खुशी। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे किरदार देखकर लगता है कि असली बहादुरी क्या होती है। जब वो दर्द से कराह रहा था, तो दिल दुख गया, पर फिर भी वो हंस रहा था।
जब बूढ़े राजा ने अपनी बेटी को गले लगाया, तो उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। इतने सालों बाद मिलने का दर्द और खुशी दोनों एक साथ दिख रहे थे। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे पारिवारिक दृश्य देखकर लगता है कि राजा भी इंसान होते हैं। उनकी बाहों में इतना प्यार था कि सबकी आंखें नम हो गईं।
जब उस एक आंख वाले सेनापति ने तलवार ऊपर उठाई, तो पूरे सैनिक दल ने जयकारे लगाए। उनकी आवाजें इतनी ऊंची थीं कि पहाड़ भी हिल रहे हों। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे युद्ध के दृश्य देखकर लगता है कि इतिहास सच में ऐसा ही रहा होगा। हर सैनिक की आंखों में जीत का जुनून था।
जब वो युवती योद्धा ने घायल साथी के घावों को देखा, तो उसकी आंखों में चिंता थी। उसने धीरे से उसके घाव को छुआ, जैसे कोई मां अपने बच्चे को सहलाती है। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे मानवीय पल देखकर लगता है कि युद्ध में भी प्यार बच सकता है। उसकी आवाज में इतना दर्द था कि दिल पिघल गया।
जब सुनहरी देवी घोड़े पर सवार होकर राजमहल पहुंची, तो राजा की आंखों में आंसू थे। दोनों का मिलन इतना भावुक था कि लग रहा था सदियों का इंतजार खत्म हुआ। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि प्रेम कभी नहीं मरता। उनकी बाहों में इतना प्यार था कि सबकी सांसें रुक गईं।
जब उस युवक के शरीर से काली नसें गायब होने लगीं, तो लग रहा था कि अंधेरा खुद भाग रहा हो। उसकी त्वचा फिर से साफ होने लगी, जैसे किसी ने उसे नया जन्म दिया हो। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे जादुई दृश्य देखकर लगता है कि बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। उसकी आंखों में नई उम्मीद थी।
जब पूरा मैदान शांत हो गया और सैनिक अपने घायल साथियों की देखभाल करने लगे, तो लग रहा था कि युद्ध सच में खत्म हो गया। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे शांति के पल देखकर लगता है कि इंसानियत अभी जिंदा है। हर किसी के चेहरे पर थकान थी, पर आंखों में राहत भी थी।
जब बूढ़े राजा ने अपनी बेटी की बहादुरी देखी, तो उनके चेहरे पर गर्व था। उन्होंने उसे गले लगाया और कहा कि वो उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे पारिवारिक पल देखकर लगता है कि राजा भी बाप होते हैं। उनकी आवाज में इतना प्यार था कि सबकी आंखें नम हो गईं।
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