PreviousLater
Close

70 Saal Pehle Ki Slave Devi वां22एपिसोड

2.0K2.1K

70 Saal Pehle Ki Slave Devi

70 saal pehle Isis ne Abyss Gate seal kiya, ab slave bankar jaagi. Beta King Horus marne wala, palace pahunchi, chita se bandhi, tab Goddess of Life ka roop dikha, raakh se glory wapas lene aayi.
  • Instagram
आपके लिए अनुशंसित
सुझाव

इस एपिसोड की समीक्षा

नवीनतम

पत्थर पर हुई ताकत की परीक्षा

जब योद्धा ने पत्थर उठाया तो लगा कि अब युद्ध होगा, पर असली लड़ाई तो बांहों की जंग में हुई। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। राजकुमार की हार और फिर घुटने टेकना दिखाता है कि प्यार में अहंकार नहीं, समर्पण जीतता है।

घुटनों पर आया समर्पण

राजकुमार का घुटनों पर बैठकर हाथ थामना सबसे खूबसूरत पल था। ७० साल पहले की दासी देवी की कहानी में यह मोड़ बहुत भावुक है। जब वह उसे उठाती है, तो लगता है जैसे दो दिल एक हो गए हों। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखना सुकून देता है।

सफेद पोशाक वाली रहस्यमयी महिला

शुरुआत में जो महिला सफेद वस्त्रों में थी, उसकी मौजूदगी ही अलग थी। ७० साल पहले की दासी देवी में उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि कुछ बड़ा होने वाला है। जब सिपाही दौड़ता हुआ आया, तो रहस्य और बढ़ गया। ऐसे कथानक के मोड़ बहुत पसंद आए।

बांहों की जंग और दिल की जीत

बांहों की कुश्ती का दृश्य सिर्फ ताकत का नहीं, इरादों का भी था। ७० साल पहले की दासी देवी में राजकुमार जानबूझकर हारा या सच में कमजोर पड़ा, यह सवाल बना रहता है। पर अंत में जो नज़ारा था, वह दिल को छू गया। नेटशॉर्ट की कहानी कहने का तरीका कमाल की है।

पहाड़ों के बीच रोमांस

पृष्ठभूमि में पहाड़ और समुद्र का नज़ारा देखते ही बनता है। ७० साल पहले की दासी देवी के मंच सजावट पर दाद देनी पड़ती है। जब राजकुमार और योद्धा एक-दूसरे को देखते हैं, तो लगता है समय थम गया हो। ऐसे दृश्य नेटशॉर्ट ऐप पर देखना एक अलग अनुभव है।

सिपाही की दौड़ और रहस्य

जब बख्तरबंद सिपाही दौड़ता हुआ आया, तो लगा अब कहानी में मोड़ आएगा। ७० साल पहले की दासी देवी में हर किरदार का अपना महत्व है। उस महिला का चेहरा देखकर लग रहा था कि वह सब जानती है। ऐसे रहस्यमय मोड़ कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

राजकुमार का अहंकार टूटा

राजकुमार का घमंड उस पत्थर के सामने टूट गया। ७० साल पहले की दासी देवी में यह दृश्य बहुत गहराई से लिखा गया है। जब वह घुटनों पर बैठता है, तो उसकी आंखों में पछतावा और प्यार दोनों दिखते हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे भावुक दृश्य देखकर मन भर आता है।

योद्धा का तेवर और मुस्कान

योद्धा का चेहरा शुरू में सख्त था, पर बाद में मुस्कान ने सब बदल दिया। ७० साल पहले की दासी देवी में किरदारों के भाव बहुत बारीकी से दिखाए गए हैं। जब वह राजकुमार का हाथ थामती है, तो लगता है जैसे युद्ध खत्म हो गया हो। नेटशॉर्ट की अभिनय शानदार है।

प्राचीन काल का रोमांच

पोशाकें, गहने और संवाद सब कुछ प्राचीन काल की याद दिलाते हैं। ७० साल पहले की दासी देवी में इतिहास और कल्पना का बेहतरीन मिश्रण है। जब राजकुमार ताज पहने खड़ा होता है, तो राजसी ठाठ साफ झलकता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ऐतिहासिक नाटक देखना मजेदार है।

आंखों की भाषा और खामोशी

कई जगह संवाद नहीं, बस आंखों की बात चल रही थी। ७० साल पहले की दासी देवी में मौन का इस्तेमाल बहुत प्रभावशाली ढंग से किया गया है। जब दोनों एक-दूसरे को घूरते हैं, तो हजारों बातें बिना कहे कह दी जाती हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखना उच्च कोटि का लगता है।