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70 Saal Pehle Ki Slave Devi वां29एपिसोड

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70 Saal Pehle Ki Slave Devi

70 saal pehle Isis ne Abyss Gate seal kiya, ab slave bankar jaagi. Beta King Horus marne wala, palace pahunchi, chita se bandhi, tab Goddess of Life ka roop dikha, raakh se glory wapas lene aayi.
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इस एपिसोड की समीक्षा

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कीचड़ में फंसी महान सेना

शुरुआत में विशाल सेना का दृश्य देखकर लगता है कि कोई बड़ी जीत होने वाली है, लेकिन कीचड़ में फंसा पहिया सब बदल देता है। ७० साल पहले की स्लेव देवी में दिखाया गया है कि कैसे एक साधारण सी रुकावट योद्धाओं के अहंकार को तोड़ देती है। जब वो दोनों कीचड़ में बैठकर हंसते हैं, तो लगता है कि असली ताकत तलवार में नहीं, बल्कि एक-दूसरे का साथ देने में है। यह दृश्य बहुत ही मानवीय और दिल को छूने वाला था।

सुनहरी कवच वाली योद्धा का जलवा

सफेद घोड़े पर सवार वो योद्धा रानी का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली है कि नजरें नहीं हटतीं। उसका सुनहरा कवच और गंभीर चेहरा बताता है कि वो सिर्फ सुंदर नहीं, बल्कि खतरनाक भी है। ७० साल पहले की स्लेव देवी के इस हिस्से में जब वो आगे बढ़ती है, तो लगता है जैसे मौत भी उसके रास्ते से हट जाएगी। उसकी आंखों में जो दृढ़ संकल्प है, वो किसी भी पुरुष योद्धा को शर्मिंदा कर दे।

आंधी और तूफान का खौफनाक मंजर

जब आसमान में बिजली कड़कती है और काले बादल छा जाते हैं, तो माहौल एकदम डरावना हो जाता है। ७० साल पहले की स्लेव देवी में इस मौसम का इस्तेमाल बहुत ही बखूबी किया गया है। सूखे पेड़ और कीचड़ भरा रास्ता देखकर लगता है कि अब कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है। यह दृश्य दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है और अगले पल क्या होगा, इसकी बेचैनी बढ़ा देता है।

बिना सवार के दौड़ता घोड़ा

अंधेरे में अकेले दौड़ते हुए घोड़े का दृश्य बहुत ही रहस्यमयी और दुखद था। लगता है जैसे उसने अपने मालिक को खो दिया हो। ७० साल पहले की स्लेव देवी में इस दृश्य ने बता दिया कि युद्ध का असली चेहरा कितना क्रूर होता है। जब वो घोड़ा गिर जाता है, तो दिल भर आता है। यह दृश्य बिना किसी संवाद के ही युद्ध की विनाशकारी सच्चाई को बयां कर देता है।

चांदी के कवच वाला योद्धा

चांदी के कवच और बैंगनी पंख वाले हेलमेट में वो युवा योद्धा किसी देवता से कम नहीं लग रहा। ७० साल पहले की स्लेव देवी में उसका किरदार बहुत ही आकर्षक है। जब वो तलवार निकालता है, तो उसकी आंखों में जो आग है, वो साफ दिखाई देती है। उसका कवच इतना चमकदार है कि अंधेरे में भी चमक रहा है। यह किरदार युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है।

आग के पास बैठकर खाना

जंगल में आग के पास बैठकर खाना खाते योद्धाओं का दृश्य बहुत ही शांत और सुकून भरा है। ७० साल पहले की स्लेव देवी में यह दृश्य बताता है कि युद्ध के बीच भी इंसानियत जिंदा रहती है। जब वो एक-दूसरे को खाना देते हैं, तो लगता है कि वो सिर्फ साथी नहीं, बल्कि परिवार हैं। यह दृश्य दर्शकों को युद्ध की भयावहता से थोड़ा राहत देता है।

एक आंख वाला वीर योद्धा

काली पट्टी बांधे उस बूढ़े योद्धा का चेहरा हजारों कहानियां बयां करता है। ७० साल पहले की स्लेव देवी में उसका किरदार बहुत ही गहरा और प्रभावशाली है। उसकी एक आंख में जो अनुभव है, वो दो आंखों वाले कई योद्धाओं में नहीं है। जब वो युवा रानी के साथ खड़ा होता है, तो लगता है कि वो उसका मार्गदर्शक है। उसका हर भावनात्मक अभिनय दिल को छू लेता है।

मृत घोड़े के पास खड़ी रानी

अंत में जब रानी मरे हुए घोड़े के पास खड़ी होती है, तो दृश्य बहुत ही दर्दनाक और शक्तिशाली है। ७० साल पहले की स्लेव देवी में यह दृश्य बताता है कि युद्ध में सिर्फ इंसान नहीं, बेजुबान जानवर भी मारे जाते हैं। रानी के चेहरे पर जो गुस्सा और दुख है, वो साफ दिखाई देता है। यह दृश्य दर्शकों को युद्ध की असली कीमत समझा देता है और दिल दहला देता है।

कीचड़ में हंसते हुए योद्धा

जब दोनों योद्धा कीचड़ में गिरकर हंसते हैं, तो लगता है कि उन्होंने जीवन का असली मज़ा पा लिया है। ७० साल पहले की स्लेव देवी में यह दृश्य बहुत ही हल्का-फुल्का और दिलचस्प है। यह बताता है कि चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हों, हंसना नहीं छोड़ना चाहिए। उनकी दोस्ती और मज़ाकिया अंदाज दर्शकों को भी हंसा देता है और तनाव कम करता है।

अंधेरे में खड़ी सेना

काले बादलों के नीचे खड़ी विशाल सेना का दृश्य बहुत ही भयावह और शक्तिशाली है। ७० साल पहले की स्लेव देवी में यह दृश्य बताता है कि अब बड़ा युद्ध होने वाला है। सैनिकों के चेहरे पर जो डर और दृढ़ संकल्प है, वो साफ दिखाई देता है। यह दृश्य दर्शकों के मन में उत्सुकता और डर दोनों पैदा करता है और अगले पल की प्रतीक्षा कराता है।