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70 Saal Pehle Ki Slave Devi वां26एपिसोड

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कथानक सार

70 saal pehle Isis ne Abyss Gate seal kiya, ab slave bankar jaagi. Beta King Horus marne wala, palace pahunchi, chita se bandhi, tab Goddess of Life ka roop dikha, raakh se glory wapas lene aayi.
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इस एपिसोड की समीक्षा

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देवी का क्रोध

जब उसने अपना धनुष उठाया, तो हवा में भी सन्नाटा छा गया। 70 साल पहले की स्लेव देवी में यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर संकल्प देखकर लगता है कि अब युद्ध का अंत केवल उसी के हाथ में है।

सूर्य की किरण जैसा वार

वह तीर जब आसमान की ओर गया, तो लगा जैसे सूरज ही टूटकर गिर रहा हो। 70 साल पहले की स्लेव देवी के इस एपिसोड में विजुअल्स इतने शानदार थे कि सांस रुक गई। सेना के सामने खड़ा वह बूढ़ा जनरल भी डर गया, जो कभी नहीं डरता था।

खून से सनी मिट्टी

कीचड़ में गिरा हुआ वह युवा सैनिक और पीछे आते राक्षस... दिल दहल गया। 70 साल पहले की स्लेव देवी ने दिखाया कि युद्ध कितना क्रूर होता है। जब देवी ने फिर से वार किया, तो लगा जैसे उम्मीद की कोई किरण बची हो।

आँखों में छिपा दर्द

उस बूढ़े जनरल की आँख में जो दर्द था, वह हजार तलवारों से ज्यादा चुभता है। 70 साल पहले की स्लेव देवी में किरदारों के भाव इतने गहरे हैं कि आप खुद को उस स्थिति में पाते हैं। उसने अपना हेलमेट उतारा, तो लगा जैसे वह अपनी हार मान रहा हो।

सुनहरी कवच वाली देवी

जब वह युद्ध के मैदान में उतरी, तो उसका सुनहरा कवच सूरज की रोशनी में चमक रहा था। 70 साल पहले की स्लेव देवी में उसका रूप किसी स्वर्ग की अप्सरा जैसा लग रहा था, जो मृत्यु का तांडव रोकने आई हो। उसका हर कदम इतिहास रच रहा था।

आसमान से गिरती आग

जैसे ही वह तीर फूटा, आसमान से आग की बारिश होने लगी। 70 साल पहले की स्लेव देवी का यह दृश्य किसी महाकाव्य से कम नहीं था। दुश्मन की सेना में भगदड़ मच गई, और हमें लगा कि अब जीत निश्चित है।

अंत की शुरुआत

जब उसने अपना धनुष छोड़ा, तो लगा जैसे समय थम गया हो। 70 साल पहले की स्लेव देवी में यह मोड़ बहुत ही ड्रामेटिक था। उस बूढ़े योद्धा का चेहरा देखकर लगा कि वह अपने अतीत को याद कर रहा है, जब वह भी ऐसा ही युद्ध लड़ा था।

राक्षसों का सामना

वे राक्षस इतने भयानक थे कि देखकर डर लग रहा था। 70 साल पहले की स्लेव देवी में वीएफएक्स का इस्तेमाल कमाल का है। जब देवी ने उन पर वार किया, तो लगा जैसे बुराई पर अच्छाई की जीत हो रही हो।

आँखों में प्रतिबिंब

उस युवा सैनिक की आँख में देवी का प्रतिबिंब देखकर लगा जैसे उसे नई शक्ति मिल गई हो। 70 साल पहले की स्लेव देवी में ऐसे छोटे-छोटे डिटेल्स कहानी को और भी गहरा बना देते हैं। वह उम्मीद की किरण बनकर उभरी।

विजय का संकेत

जब उसने अपना धनुष ऊपर उठाया, तो लगा जैसे विजय का ढोल बज रहा हो। 70 साल पहले की स्लेव देवी का यह अंत बहुत ही शक्तिशाली था। उस बूढ़े जनरल ने अपना हेलमेट उतारकर सम्मान में सिर झुकाया, जो उसकी जीत का प्रतीक था।