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70 Saal Pehle Ki Slave Devi वां19एपिसोड

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कथानक सार

70 saal pehle Isis ne Abyss Gate seal kiya, ab slave bankar jaagi. Beta King Horus marne wala, palace pahunchi, chita se bandhi, tab Goddess of Life ka roop dikha, raakh se glory wapas lene aayi.
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इस एपिसोड की समीक्षा

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राजसी महल से गंदी गलियों तक का सफर

महल की छत की चमक-धमक और झुग्गी बस्तियों की गंदगी के बीच का अंतर देखकर रोंगटे खड़े हो गए। प्लूटस के आते ही माहौल में तनाव छा गया। यह कहानी ७० साल पहले की दासी देवी जैसी पुरानी कहानियों को याद दिलाती है जहाँ अमीर और गरीब के बीच की खाई बहुत गहरी होती है।

प्लूटस का खौफनाक आगमन

जैसे ही प्लूटस घोड़े पर सवार होकर आया, पूरी गली में दहशत फैल गई। सैनिकों का हमला और लोगों की चीखें दिल दहला देने वाली थीं। यह दृश्य ७० साल पहले की दासी देवी के उन पलों जैसा था जब सत्ता का दुरुपयोग आम जनता पर होता था। अभिनय बहुत ही दमदार लगा।

प्यार और सत्ता का टकराव

महल के झरोखे पर युवक और युवती के बीच की बहस बहुत तीखी थी। उनकी आँखों में गुस्सा और दर्द दोनों साफ दिख रहा था। यह कहानी ७० साल पहले की दासी देवी की तरह ही भावनाओं से भरी हुई है जहाँ रिश्ते सत्ता के आगे कुर्बान हो जाते हैं।

गरीबी का असली चेहरा

झुग्गी बस्तियों के दृश्य बहुत ही यथार्थपूर्ण थे। कीचड़, टूटी झोपड़ियाँ और भूखे चेहरे। युवक और युवती का साधारण कपड़ों में चलना उनकी मजबूरी को दर्शाता है। ७० साल पहले की दासी देवी में भी ऐसे ही दृश्य थे जो समाज की कड़वी सच्चाई दिखाते थे।

चंद्रमा की रोशनी में राज़

रात के समय महल के झरोखे पर चाँदनी में उनकी बातचीत बहुत ही रहस्यमयी लग रही थी। युवती की आँखों में कुछ छुपा हुआ था। यह माहौल ७० साल पहले की दासी देवी के उन सीनों जैसा था जहाँ रात के समय बड़े फैसले लिए जाते थे।

सैनिकों का क्रूर व्यवहार

प्लूटस के इशारे पर सैनिकों ने बेचारे लोगों पर हमला कर दिया। कुल्हाड़ियाँ और तलवारें देखकर डर लग रहा था। यह अत्याचार ७० साल पहले की दासी देवी के उन दृश्यों को याद दिलाता है जहाँ कमजोर वर्ग पर जुल्म ढाया जाता था।

वेशभूषा और सजावट कमाल की

राजा के सुनहरे कपड़े और साधारण लोगों के फटे हुए वस्त्र। कला निर्देशक ने महल और झोपड़ियों के बीच का अंतर बहुत बारीकी से दिखाया है। ७० साल पहले की दासी देवी में भी ऐसे ही दृश्य थे जो कहानी को और भी प्रभावशाली बनाते थे।

युवक की बेचैनी

युवक के चेहरे पर चिंता और गुस्सा साफ झलक रहा था। वह कुछ कहना चाहता था लेकिन शायद मजबूर था। उसकी आँखों में ७० साल पहले की दासी देवी के नायक जैसी बेबसी थी जो व्यवस्था के खिलाफ लड़ना चाहता है।

युवती का संघर्ष

युवती ने महल में राजसी पोशाक पहनी थी लेकिन गली में साधारण कपड़ों में वह बहुत अलग लग रही थी। उसकी आँखों में संघर्ष की चमक थी। ७० साल पहले की दासी देवी की नायिका भी ऐसी ही थी जो हर हालात में डटी रहती थी।

कहानी का अगला मोड़

प्लूटस के आने के बाद कहानी में एक नया मोड़ आ गया है। अब देखना यह है कि यह युवक और युवती इस अत्याचार का कैसे सामना करेंगे। ७० साल पहले की दासी देवी की तरह ही इसमें भी अब बड़ा मोड़ आने वाला है जो दर्शकों को चौंका देगा।