महल की छत की चमक-धमक और झुग्गी बस्तियों की गंदगी के बीच का अंतर देखकर रोंगटे खड़े हो गए। प्लूटस के आते ही माहौल में तनाव छा गया। यह कहानी ७० साल पहले की दासी देवी जैसी पुरानी कहानियों को याद दिलाती है जहाँ अमीर और गरीब के बीच की खाई बहुत गहरी होती है।
जैसे ही प्लूटस घोड़े पर सवार होकर आया, पूरी गली में दहशत फैल गई। सैनिकों का हमला और लोगों की चीखें दिल दहला देने वाली थीं। यह दृश्य ७० साल पहले की दासी देवी के उन पलों जैसा था जब सत्ता का दुरुपयोग आम जनता पर होता था। अभिनय बहुत ही दमदार लगा।
महल के झरोखे पर युवक और युवती के बीच की बहस बहुत तीखी थी। उनकी आँखों में गुस्सा और दर्द दोनों साफ दिख रहा था। यह कहानी ७० साल पहले की दासी देवी की तरह ही भावनाओं से भरी हुई है जहाँ रिश्ते सत्ता के आगे कुर्बान हो जाते हैं।
झुग्गी बस्तियों के दृश्य बहुत ही यथार्थपूर्ण थे। कीचड़, टूटी झोपड़ियाँ और भूखे चेहरे। युवक और युवती का साधारण कपड़ों में चलना उनकी मजबूरी को दर्शाता है। ७० साल पहले की दासी देवी में भी ऐसे ही दृश्य थे जो समाज की कड़वी सच्चाई दिखाते थे।
रात के समय महल के झरोखे पर चाँदनी में उनकी बातचीत बहुत ही रहस्यमयी लग रही थी। युवती की आँखों में कुछ छुपा हुआ था। यह माहौल ७० साल पहले की दासी देवी के उन सीनों जैसा था जहाँ रात के समय बड़े फैसले लिए जाते थे।
प्लूटस के इशारे पर सैनिकों ने बेचारे लोगों पर हमला कर दिया। कुल्हाड़ियाँ और तलवारें देखकर डर लग रहा था। यह अत्याचार ७० साल पहले की दासी देवी के उन दृश्यों को याद दिलाता है जहाँ कमजोर वर्ग पर जुल्म ढाया जाता था।
राजा के सुनहरे कपड़े और साधारण लोगों के फटे हुए वस्त्र। कला निर्देशक ने महल और झोपड़ियों के बीच का अंतर बहुत बारीकी से दिखाया है। ७० साल पहले की दासी देवी में भी ऐसे ही दृश्य थे जो कहानी को और भी प्रभावशाली बनाते थे।
युवक के चेहरे पर चिंता और गुस्सा साफ झलक रहा था। वह कुछ कहना चाहता था लेकिन शायद मजबूर था। उसकी आँखों में ७० साल पहले की दासी देवी के नायक जैसी बेबसी थी जो व्यवस्था के खिलाफ लड़ना चाहता है।
युवती ने महल में राजसी पोशाक पहनी थी लेकिन गली में साधारण कपड़ों में वह बहुत अलग लग रही थी। उसकी आँखों में संघर्ष की चमक थी। ७० साल पहले की दासी देवी की नायिका भी ऐसी ही थी जो हर हालात में डटी रहती थी।
प्लूटस के आने के बाद कहानी में एक नया मोड़ आ गया है। अब देखना यह है कि यह युवक और युवती इस अत्याचार का कैसे सामना करेंगे। ७० साल पहले की दासी देवी की तरह ही इसमें भी अब बड़ा मोड़ आने वाला है जो दर्शकों को चौंका देगा।
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