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70 Saal Pehle Ki Slave Devi वां23एपिसोड

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कथानक सार

70 saal pehle Isis ne Abyss Gate seal kiya, ab slave bankar jaagi. Beta King Horus marne wala, palace pahunchi, chita se bandhi, tab Goddess of Life ka roop dikha, raakh se glory wapas lene aayi.
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अलारिक की दहाड़ ने हिला दिया सिंहासन

जब अलारिक ने महल के दरवाजे तोड़े, तो लगा जैसे इतिहास खुद चल पड़ा हो। उसकी आँख में वो आग थी जो 70 साल पहले की गुलाम देवी में भी नहीं दिखी। रियो का खामोश साथ और राजा का डर—सब कुछ इतना तीव्र था कि सांस रुक गई।

रेओ की चुप्पी सबसे खतरनाक थी

रेओ ने एक शब्द नहीं कहा, पर उसकी आँखों में तूफान था। अलारिक के सामने खड़ा होकर भी वह नहीं डरा। 70 साल पहले की गुलाम देवी में ऐसे किरदार कम ही मिलते हैं जो बिना बोले सब कह जाएं। उसकी मौजूदगी ही एक बयान थी।

सिंहासन पर बैठे राजा की बेबसी

राजा के हाथ कांप रहे थे, जब अलारिक अंदर आया। उसकी ताजपोशी की चमक फीकी पड़ गई। 70 साल पहले की गुलाम देवी में भी ऐसे क्षण कम ही आते हैं जहां सत्ता का भ्रम टूटता दिखे। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था।

अलारिक का घायल चेहरा, अटूट इरादा

उसकी आँख पर पट्टी, चेहरे पर खून, पर इरादे में कोई कंपन नहीं। अलारिक जब बोला, तो लगा जैसे पत्थर भी पिघल जाएं। 70 साल पहले की गुलाम देवी में ऐसे योद्धा की कल्पना भी मुश्किल है। उसकी हर चोट एक कहानी कहती थी।

महल की दीवारें भी कांप उठीं

जब अलारिक ने तलवार निकाली, तो महल की सजावट भी डर गई। रियो के पीछे खड़े होने का मतलब साफ था—वह खून का रिश्ता निभा रहा था। 70 साल पहले की गुलाम देवी में ऐसे दृश्य कम ही मिलते हैं जहां खामोशी शोर मचा दे।

युवक की हिम्मत, अलारिक का गुस्सा

उस युवक ने तलवार उठाई, पर अलारिक के सामने वह बच्चा लग रहा था। एक झटके में सब खत्म। 70 साल पहले की गुलाम देवी में भी ऐसे संघर्ष कम ही दिखते हैं जहां अनुभव युवा जोश को निगल जाए। यह दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था।

रानी की आँखों में छिपा तूफान

वह चुप खड़ी थी, पर उसकी आँखें सब कह रही थीं। अलारिक के सामने उसका डर नहीं, गुस्सा था। 70 साल पहले की गुलाम देवी में महिला किरदारों की ऐसे गहराई कम ही दिखाई गई है। उसकी खामोशी सबसे तेज चीख थी।

अलारिक की चाल में था इतिहास

वह चलता था तो लगता जैसे युद्ध के मैदान से सीधा महल आ गया हो। उसकी हर कदम में वजन था। 70 साल पहले की गुलाम देवी में ऐसे किरदार की कल्पना भी मुश्किल है जो बिना बोले सब कुछ कह दे। उसकी मौजूदगी ही एक घोषणा थी।

रेओ और अलारिक का खूनी रिश्ता

दादा और पोते का रिश्ता नहीं, यह तो खून का बंधन था। रेओ की चुप्पी और अलारिक का गुस्सा—दोनों एक दूसरे के पूरक थे। 70 साल पहले की गुलाम देवी में ऐसे रिश्ते कम ही दिखते हैं जहां खामोशी सबसे बड़ी बात हो।

महल का सोना भी फीका पड़ गया

जब अलारिक अंदर आया, तो महल की चमक फीकी पड़ गई। उसकी लाल चादर पर सूरज का निशान जैसे आग लग गया हो। 70 साल पहले की गुलाम देवी में ऐसे दृश्य कम ही आते हैं जहां सत्ता का भ्रम टूटता दिखे। यह क्षण इतिहास बन गया।