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70 Saal Pehle Ki Slave Devi वां37एपिसोड

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70 Saal Pehle Ki Slave Devi

70 saal pehle Isis ne Abyss Gate seal kiya, ab slave bankar jaagi. Beta King Horus marne wala, palace pahunchi, chita se bandhi, tab Goddess of Life ka roop dikha, raakh se glory wapas lene aayi.
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इस एपिसोड की समीक्षा

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सुनहरी देवी का अवतार

जब उस घायल योद्धा ने अपनी आखिरी सांस ली, तो मुझे लगा कहानी खत्म हो गई। लेकिन फिर वो सुनहरी कवच वाली नायिका उठी और उसकी आँखों में चमक देखकर रोंगटे खड़े हो गए। ७० साल पहले की दासी देवी में ऐसा जादूई मोड़ कम ही देखने को मिलता है। उसका गुस्सा और फिर देवी बनना सच में दिल दहला देने वाला था।

बूढ़े जादूगर की हार

वो बूढ़ा जादूगर जो शुरू में इतना घमंडी लग रहा था, अंत में कैसे टूट गया ये देखकर अजीब लगा। उसने काला जादू किया पर सुनहरी देवी के आगे उसकी एक नहीं चली। ७० साल पहले की दासी देवी के इस चरमोत्कर्ष में डर और हैरानी दोनों थी। उसका चीखना और भागना सच में यादगार था।

पंखों वाली रानी

जब उस सुंदर योद्धा के पीछे से सुनहरे पंख निकले, तो मैं बस देखता ही रह गया। वो हवा में उड़ी और उसका वो रूप सच में किसी देवी जैसा था। ७० साल पहले की दासी देवी में दृश्य प्रभाव का ये स्तर कमाल का है। उसका ताज और कवच सब कुछ इतना भव्य था कि बस देखते रहने का मन किया।

राक्षस का आगमन

जब वो काला जादूगर हारा तो उसने एक विशाल राक्षस को बुला लिया। उस राक्षस का रूप इतना डरावना था कि मैंने पलकें भी नहीं झपकाईं। ७० साल पहले की दासी देवी में ये मोड़ बिल्कुल अप्रत्याशित था। उसकी दहाड़ और सुनहरी देवी का सामना करना सच में भव्य लग रहा था।

प्रेम और बदला

उस घायल एल्फ को गोद में लेकर रोना और फिर गुस्से में बदल जाना, ये भावनात्मक यात्रा बहुत गहरी थी। ७० साल पहले की दासी देवी ने दिखाया कि प्यार कैसे ताकत बन सकता है। उसकी आँखों में आंसू और फिर आग, दोनों ही दिल को छू गए। ये दृश्य मुझे लंबे समय तक याद रहेगा।

जादूई युद्ध का मंजर

सुनहरी देवी का ऊर्जा से भरा होना और फिर उसका हमला, ये सब इतना शानदार था। ७० साल पहले की दासी देवी में कार्रवाई और जादू का ये मिश्रण बेहतरीन था। उसकी ताकत के आगे सब कुछ फीका पड़ गया। वो कैसे हवा में तैरती है और हमला करती है, ये देखना ही एक अनुभव था।

अंधेरे का अंत

वो काला जादूगर जब हार गया और उसका जादू टूट गया, तो मुझे बहुत राहत मिली। ७० साल पहले की दासी देवी में बुराई पर अच्छाई की ये जीत बहुत संतोषजनक थी। उसका डर और सुनहरी देवी का साहस, ये विरोधाभास बहुत अच्छा था। अंत में वो मुस्कुराया, ये देखकर अच्छा लगा।

सुनहरी देवी का गुस्सा

जब उस सुनहरी देवी की आँखें चमकीं और उसका शरीर आग से घिर गया, तो मैं डर गया। ७० साल पहले की दासी देवी में उसका ये रूप इतना शक्तिशाली था कि सामने वाले का डरना जायज था। उसका गुस्सा और ताकत, सब कुछ इतना तीव्र था कि सांस रुक सी गई।

जादूगर का अहंकार

वो बूढ़ा जादूगर शुरू में इतना घमंडी था, पर अंत में कैसे गिर गया ये देखकर मजा आया। ७० साल पहले की दासी देवी में उसका किरदार बहुत अच्छा लिखा गया था। उसका अहंकार टूटना और फिर डर के मारे भागना, ये सब बहुत अच्छे से दिखाया गया। उसकी हार ही कहानी का सबसे अच्छा हिस्सा था।

देवी का आशीर्वाद

अंत में जब सुनहरी देवी ने उस घायल योद्धा को बचाया और फिर हवा में तैरने लगी, तो मुझे लगा सब ठीक हो गया। ७० साल पहले की दासी देवी का ये अंत बहुत सुकून देने वाला था। उसका वो रूप और उसकी मुस्कान, सब कुछ इतना सुंदर था कि बस देखते रहने का मन किया। ये कहानी दिल को छू गई।