इस दृश्य में हर किसी के कपड़े और गहने उनकी हैसियत बता रहे हैं। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दों पर बात हो रही है, लेकिन सबकी नज़रें एक-दूसरे के वेश पर टिकी हैं। वो हरा कीलक पहने व्यक्ति सबसे ज्यादा डरावना लग रहा है, जैसे कोई राज़ छिपा रहा हो।
कमरे में तनाव इतना है कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की चर्चा के बीच सबके चेहरे पर अलग-अलग रंग हैं। कोई गुस्से में है, तो कोई डरा हुआ। ये नाटक नेटशॉर्ट मंच पर देखने में बहुत रोचक लगता है, हर दृश्य में कुछ नया है।
संवाद से ज्यादा असर इन किरदारों की आंखों से हो रहा है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे विषय पर सबकी प्रतिक्रिया अलग-अलग है। वो महिला जो काली पोशाक में है, उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है, जैसे वो सब कुछ जानती हो लेकिन चुप रहे।
इस कमरे में कौन असली मालिक है, ये साफ नहीं है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की बातें हो रही हैं, लेकिन हर कोई अपनी शक्ति दिखा रहा है। वो व्यक्ति जो बीच में खड़ा है, उसकी शारीरिक भाषा से लगता है कि वो सबको नियंत्रण करना चाहता है।
ये दृश्य किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दे पर बात हो रही है, लेकिन सब कुछ इतना रहस्यमयी है। हर किरदार के पीछे कोई न कोई राज़ छिपा है, और ये नाटक नेटशॉर्ट मंच पर देखने में बहुत मज़ेदार लगता है।