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बुज़ुर्गों पर अत्याचारवां40एपिसोड

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बुज़ुर्गों पर अत्याचार

अपने गृहनगर में दादा के अंतिम संस्कार के दौरान एपेक्स ग्रुप की अध्यक्ष बेला पर दो पुरुष आरोप लगाते हैं कि उसके द्वारा वित्तपोषित प्रतिष्ठित वृद्धाश्रम ने उनके पिता की मृत्यु का कारण बना। सच जानने के लिए बेला परिचारिका बनकर भेष बदलती है और एक चौंकाने वाला अंधकारमय रहस्य उजागर करती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सौदे की कीमत

जुडी पार्सन्स के चेहरे पर वो चोट और आँखों में वो खालीपन देखकर दिल दहल गया। एपेक्स ग्रुप का वो ठंडा व्यवहार और कागजों का ढेर सब कुछ खरीदने की कोशिश लगता है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे मुद्दों पर जब कॉर्पोरेट दबाव डालता है, तो इंसानियत मर जाती है। वो चेक लेते वक्त उसकी उंगलियों का कांपना सब कुछ बता रहा था।

कागजों में दफन न्याय

वो लीगल एग्रीमेंट पढ़ते वक्त लगा जैसे शब्दों से खेलकर सब कुछ छीन लिया गया हो। जेफ की मुस्कान में कितनी क्रूरता थी! जुडी ने साइन किया, पर लगता है उसने अपनी आत्मा बेच दी। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की बातें तो दूर, यहाँ तो एक माँ के दर्द को भी नोट्स में बदल दिया गया। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखकर गुस्सा आता है।

मुआवजे का तमाशा

हजार डॉलर का चेक थमाकर सोचा सब सुलझ गया? जुडी के हाथ में वो कार्डबोर्ड साइन और चेक का कॉन्ट्रास्ट दिल तोड़ने वाला था। एपेक्स ग्रुप वाले जिस तरह उसे धक्का देकर बाहर निकाल रहे थे, वो देखकर लगा इंसानियत शर्मिंदा हो गई। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दों को ऐसे निपटाना कितना गलत है।

साइन की मजबूरी

जुडी पार्सन्स का वो कांपता हुआ हाथ और पेन को पकड़ने का तरीका सब कुछ कह गया। मजबूरी में लिया गया फैसला कभी सुकून नहीं देता। जेफ की बातों में वो झूठा भरोसा और धमकी का लहजा साफ दिख रहा था। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की चर्चा तो बाद की बात है, पहले इस सिस्टम को सुधारना होगा जो कमजोरों को कुचलता है।

कॉर्पोरेट का चेहरा

सूट-बूट वाले लोग और उनके बीच खड़ी एक टूटी हुई औरत। एपेक्स ग्रुप का लोगो दीवार पर चमक रहा था, पर उनकी नीयत काली थी। जुडी के चेहरे पर वो लाल निशान और आँसू किसी एक्टिंग नहीं लग रहे थे। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे मुद्दों पर जब पावर प्ले होता है, तो सच दब जाता है। नेटशॉर्ट की स्टोरीलाइन बहुत रियल लगी।

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