यह दृश्य वाकई चौंकाने वाला है। एक तरफ शोक है तो दूसरी तरफ एक अजीब सी हंसी-मजाक का माहौल। महिला का व्यवहार बहुत ही रहस्यमयी लग रहा है, जैसे वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो। जब बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे गंभीर विषयों की बात आती है, तो यह हल्कापन और भी खटकता है। शव को ले जाने का तरीका और कर्मचारी का व्यवहार सब कुछ बहुत संदिग्ध बना रहा है।
शुरुआत में लगा कि यह कोई गंभीर ड्रामा है, लेकिन फिर अचानक टोन बदल गई। वह महिला जो ताबूत के ऊपर बैठी है, उसकी हरकतें बहुत अजीब हैं। कर्मचारी का कंडोम निकालना और फिर शव का अचानक उठ बैठना, यह सब कुछ एक भयानक कॉमेडी जैसा लग रहा है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे मुद्दों पर इतना लापरवाह रवैया देखकर हैरानी होती है। क्या यह सब एक बड़ा धोखा है?
जिस महिला को मरा हुआ दिखाया गया था, वह अचानक कैसे जिंदा हो गई? यह ट्विस्ट बिल्कुल अप्रत्याशित था। कर्मचारी का डरना और फिर उस महिला का हमला करना, यह सब बहुत तेजी से हुआ। शायद वह मरी नहीं थी, बस बेहोश थी। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की कहानियों में अक्सर ऐसे ही चमत्कार दिखाए जाते हैं। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखने के लिए काफी है।
लाल लिपस्टिक और फर कोट वाली महिला का किरदार बहुत गहरा लग रहा है। वह न तो रो रही है और न ही दुखी है, बल्कि एक अजीब सी मुस्कान के साथ सब कुछ देख रही है। जब उसने कर्मचारी को इशारा किया, तो लगा कि वह सब कुछ पहले से योजनाबद्ध था। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दों को इस तरह पेश करना जोखिम भरा है, लेकिन कहानी को रोचक जरूर बनाता है।
मैथ्यू नाम के कर्मचारी ने शव के साथ बहुत ही अनुचित व्यवहार किया। उसे लगा कि महिला मर चुकी है, इसलिए उसने मजाक किया। लेकिन जब वह जिंदा हो गई, तो उसकी हालत खराब हो गई। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे जल्दबाजी में किए गए फैसले बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। बुज़ुर्गों पर अत्याचार की कहानियों में अक्सर ऐसे ही गलतफहमी वाले पल आते हैं।