लाल बालों वाले व्यक्ति का गुस्सा देखकर डर लग रहा था। उसकी मुट्ठी से निकली सुनहरी शक्ति काफी शानदार लग रही थी। एक्शन दृश्य बहुत तेज़ हैं और हर पल कुछ नया होता है। मुझे यह एनिमेशन शैली बहुत पसंद आई। कहानी में रहस्य बना हुआ है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का नाम सुनकर ही उत्सुकता बढ़ गई।
एकेडमी का माहौल काफी तनावपूर्ण लग रहा है। छात्रों को स्ट्रेचर पर ले जाते देख दुख हुआ। सफेद दाढ़ी वाले शिक्षक की डांट में भी चिंता झलक रही थी। यह सिर्फ पढ़ाई नहीं, जानलेवा जंग लगती है। हर कोई अपनी ताकत साबित करने में लगा है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसा ही कुछ दिखाया गया है।
काले सूट वाला आदमी अचानक कैसे आ गया? उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी। जब उसने काला गोला फेंका तो सब हैरान रह गए। लगता है वह खलनायक है या कोई गुप्तचर। उसका प्रवेश बहुत नाटकीय था। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कहानी में यह मोड़ जरूरी था।
अंत में काला ड्रेगन देखकर रोंगटे खड़े हो गए। वह आसमान में उड़ रहा था और सब उसे देख रहे थे। यह दृश्य बहुत भव्य था। लगता है अब असली लड़ाई शुरू होने वाली है। सभी पात्रों के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का अंत धमाकेदार होगा।
गंजे सिर वाला व्यक्ति टक्सीडो में बहुत घबराया हुआ लग रहा था। उसके दोस्त उसे संभाल रहे थे। यह कॉमेडी दृश्य था या गंभीर? माहौल में अचानक बदलाव आया। ऐसे पात्र कहानी को हल्का करते हैं। दर्शकों को राहत मिलती है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे पल भी हैं।
दीवार पर खड़े छात्रों का जोश देखकर अच्छा लगा। वे चीयर कर रहे थे जबकि नीचे खतरा था। युवाओं का उत्साह हमेशा देखने लायक होता है। वर्दी भी काफी स्टाइलिश लग रहे थे। हरा रंग सूट करता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज के सेट डिजाइन पर मेहनत साफ दिखती है।
लाल कोट वाले नायक की गति देखकर दंग रह गया। वह हवा में उड़ रहा था और सीधा दुश्मन पर टूट पड़ा। एनिमेशन सरल था। ऐसे एक्शन बार-बार देखने को मिलते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर वीडियो गुणवत्ता अच्छी थी। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज जैसे शो का मजा ही अलग है।
महल की दीवारें बहुत पुरानी और मजबूत लग रही थीं। पृष्ठभूमि में पहाड़ और जंगल सुंदर थे। विजुअल्स पर काफी काम किया गया है। हर फ्रेम एक चित्र जैसा लग रहा था। कलाकारों की मेहनत रंगों में दिखती है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कलाकारी बेमिसाल है।
सफेद बालों वाले बुजुर्ग की आवाज में दम था। वे सबको निर्देश दे रहे थे। लगता है वे प्रधानाचार्य हैं। उनकी उपस्थिति से अनुशासन बना रहता है। छात्र उनका सम्मान करते हैं। यह संबंध अच्छा लगा। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में पात्रों के बीच का बंधन दिखता है।
कहानी में जादू और ताकत का मिश्रण है। कुछ लोग बिना हथियार के लड़ रहे हैं। यह विशेष शक्तियों वाली दुनिया है। हर किसी की अपनी खासियत है। देखने में बहुत रोचक लग रहा है। आगे क्या होगा जानने को मन कर रहा है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का अगला एपिसोड कब आएगा।