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पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराजवां14एपिसोड

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पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज

आदित्य गलती से एक चालाक पिस्सू बनकर जन्म लेता है। खून चूसकर वह ताकत हासिल करता है, उसके शरीर पर नए निशान उभरते हैं, और एक दिन वह पंख निकालकर आसमान में उड़ेगा। वह हर मुश्किल से बचने के लिए सैकड़ों चालें चलता है। गुप्त अकादमी की ठंडी स्वभाव वाली छात्रा तारा सिंह, जो बाहर से सख्त लेकिन अंदर से कोमल है, उसके भाग्य से जुड़ जाती है। देखते हैं यह छोटा पिस्सू पूरे संसार में तूफान कैसे खड़ा करता है, खून चूसकर देवराज बनता है, और अपनी धमाकेदार कहानी लिखता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कीड़े की अजीब कहानी

इस कार्टून में एक छोटा सा कीड़ा कैसे सबका ध्यान खींचता है, यह देखकर हैरानी हुई। सफेद बालों वाली लड़की उसे जार में बंद करके सो जाती है, जो काफी अजीब है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कहानी में ऐसा मोड़ नहीं देखा था। कक्षा में हरे बालों वाले लड़के का व्यवहार भी काफी अहंकारी लग रहा था। सब छात्र उस कीड़े को लेकर चर्चा कर रहे थे।

स्कूल का रहस्य

कक्षा के माहौल में जब वह लड़की जार लेकर दाखिल होती है, तो सबकी नज़रें उसी पर टिक जाती हैं। हरे जैकेट वाला लड़का उसे चिढ़ाता है और जार छीन लेता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे नाटक देखकर मज़ा आ गया। कीड़े के चेहरे के भाव बहुत ही भावुक थे जो बिना बोले सब कह रहे थे। यह सीन काफी तनाव बनाए रखता है।

जार में कैद जीवन

उस बेचारे कीड़े को कांच के जार में बंद देखकर तरस आया। वह बाहर निकलने की कोशिश करता है पर असफल रहता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कहानी काफी यूनिक है। रात के सीन में लड़की की नींद और कीड़े की बेचैनी का अंतर बहुत अच्छा दिखाया गया है। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।

हरे बालों वाले की एंट्री

जब हरे बालों वाला लड़का कक्षा में आता है तो माहौल बदल जाता है। वह सफेद बालों वाली लड़की से बहस करता है और कीड़े वाला जार ले लेता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में किरदारों के बीच के संबंध देखने लायक हैं। उसकी मुस्कान में एक अलग ही चालाकी थी जो दर्शकों को पसंद आएगी। कक्षा के बाकी बच्चे बस तमाशबीन बने रहे।

एनिमेशन की खूबियां

दृश्य शैली काफी आकर्षक है खासकर कीड़े की रचना में। नीले रंग का कीड़ा और चमकदार जार बहुत साफ दिखाई देते हैं। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की गुणवत्ता उम्मीद से बेहतर है। पृष्ठभूमि में कक्षा की बारीकियां भी अच्छी की गई हैं। हर दृश्य में एक अलग कहानी कही गई है जो दर्शकों को बांधे रखती है।

छात्रों की चर्चा

कक्षा में बैठे बाकी छात्रों की प्रतिक्रियाएं बहुत ही मजेदार थीं। कुछ हैरान थे तो कुछ चुपचाप देख रहे थे। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में भीड़ की प्रतिक्रिया को अच्छे से दिखाया गया है। जब वह लड़का जार उठाता है तो सबकी आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। यह सीन सामाजिक माहौल को अच्छे से दर्शाता है।

लड़की का रहस्य

सफेद बालों वाली लड़की शांत स्वभाव की लगती है पर कीड़ा क्यों पाला है यह समझ नहीं आया। वह बिना किसी डर के कक्षा में जार लेकर आती है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में उसके किरदार में गहराई है। हरे बालों वाले लड़के से उसकी बहस में कोई शोर नहीं था बस शांत तनाव था। यह चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी।

कीड़े की भावनाएं

कीड़े के चेहरे पर डर और उलझन साफ झलक रहा था जब वह जार में था। उसकी आंखें बड़ी बड़ी हो गई थीं जब उसे बंद किया गया। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में जानदारों के जज़्बात को अच्छे से दिखाया गया है। जब वह लड़का उसे हिलाता है तो कीड़ा घबरा जाता है। यह कार्टून बच्चों को भी पसंद आएगा।

स्कूल का माहौल

स्कूल की घंटी बजने से पहले का यह सीन काफी वास्तविक लगता है। डेस्क और चेयर की व्यवस्था वैसी ही है जैसे हमारे स्कूल में होती है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की पृष्ठभूमि बहुत अपने जैसी है। खिड़कियों से आती रोशनी और कक्षा का नज़ारा बहुत सुंदर है। ऐसा लगता है जैसे हम भी उसी कक्षा में बैठे हों।

आगे क्या होगा

इस कड़ी के अंत में यह सवाल उठता है कि आगे क्या होगा। क्या कीड़ा बाहर निकल पाएगा या लड़का उसे रख लेगा। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का अगला भाग देखने का इंतज़ार है। हरे बालों वाले लड़के की नीयत पर शक हो रहा है। कहानी में रहस्य बना हुआ है जो दर्शकों को जोड़े रखता है।