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पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराजवां48एपिसोड

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पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज

आदित्य गलती से एक चालाक पिस्सू बनकर जन्म लेता है। खून चूसकर वह ताकत हासिल करता है, उसके शरीर पर नए निशान उभरते हैं, और एक दिन वह पंख निकालकर आसमान में उड़ेगा। वह हर मुश्किल से बचने के लिए सैकड़ों चालें चलता है। गुप्त अकादमी की ठंडी स्वभाव वाली छात्रा तारा सिंह, जो बाहर से सख्त लेकिन अंदर से कोमल है, उसके भाग्य से जुड़ जाती है। देखते हैं यह छोटा पिस्सू पूरे संसार में तूफान कैसे खड़ा करता है, खून चूसकर देवराज बनता है, और अपनी धमाकेदार कहानी लिखता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

आईने का राज़

शुरुआत में ही मूछों वाले व्यक्ति का तनाव देखकर लगता है कि कुछ गड़बड़ है। जब आईने में बूढ़ा व्यक्ति दिखाई दिया, तो रोंगटे खड़े हो गए। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में ऐसे सीन दिलचस्प हैं। कमरे का माहौल बहुत रहस्यमयी है और संगीत ने डर को बढ़ाया। दर्शक के रूप में मैं हैरान था कि आखिर ये आईना क्या संदेश दे रहा है। यह दृश्य बहुत प्रभावशाली था और मुझे बहुत पसंद आया।

जादुई पोर्टल

पहाड़ों के बीच ब्लॉन्ड व्यक्ति द्वारा नीला पोर्टल बनाना बहुत शानदार लगा। हरी वर्दी वाली लड़की की चुप्पी में भी एक कहानी छिपी है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की विजुअल इफेक्ट्स कमाल की हैं। लगता है ये दोनों किसी बड़ी मुसीबत की ओर बढ़ रहे हैं। नेटशॉर्ट मंच पर देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। मुझे यह जादू बहुत पसंद आया और मैं हैरान रह गया।

प्यारा कीड़ा

अंत में दिखाई दिया वो कीड़ा बहुत प्यारा है, पर नाम सुनकर लगता है ये खतरनाक भी हो सकता है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का टाइटल ही बताता है कि कहानी कीड़ा बनकर शुरू होती है। उसकी बड़ी आँखें और मुस्कान देखकर मन खुश हो गया। शायद ये ही असली हीरो है जो सबको हैरान कर देगा। इसका डिजाइन बहुत अनोखा है और सबको पसंद आएगा।

मूछों वाली चाल

मूछों वाले व्यक्ति के चेहरे के भाव बदलते देखना मजेदार था। पहले डर, फिर गुस्सा और अंत में चालाकी। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में किरदारों की गहराई अच्छी है। कमरे की सजावट पुराने जमाने की लगती है जो कहानी को वजन देती है। मैं जानना चाहता हूँ कि वो आईने से क्या चाहता है। एक्टिंग बहुत सटीक है और दर्शक को बांधे रखती है।

कहानी का मोड़

जब लगा कि ये सिर्फ एक साधारण कमरा है, तभी आईने वाला दृश्य आया। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में प्लॉट ट्विस्ट बहुत तेज हैं। बाहर के दृश्य और अंदर के तनाव में बहुत अंतर है। सफेद बालों वाली लड़की के कंधे पर वो छोटा प्राणी भी कुछ इशारा कर रहा है। कहानी आगे क्या होगी ये सोचकर उत्सुकता बढ़ रही है। यह रोमांचक है और मैं आगे क्या होगा देखना चाहता हूँ।

माहौल की बात

नीली दीवारों वाले कमरे में जो सन्नाटा था वो बहुत भारी लग रहा था। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज का निर्देशन बहुत सटीक है। पहाड़ों वाले दृश्य में खुली हवा का अहसास हुआ। हर सीन में एक नया रंग और नया अहसास है। दर्शक को बांधे रखने के लिए ये जरूरी है। मुझे ये स्टाइल बहुत पसंद आया। माहौल जबरदस्त है और निर्देशन सराहनीय है।

दोस्त या दुश्मन

ब्लॉन्ड व्यक्ति और सफेद बालों वाली लड़की के बीच की केमिस्ट्री देखने लायक है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में रिश्तों की परतें धीरे धीरे खुल रही हैं। वो कीड़ा जो कंधे पर बैठता है, शायद उनका साथी है। जादू की दुनिया में ऐसे साथी ही ताकत बनते हैं। मुझे उनकी जोड़ी बहुत जच रही है। यह अनोखा है और उनकी दोस्ती देखने लायक है।

रंगों का खेल

एनिमेशन के रंग बहुत जीवंत हैं। कमरे की नीलक और बाहर की हरियाली में अच्छा कंट्रास्ट है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज की कलात्मक शैली अनोखी है। कीड़े का डिजाइन बहुत क्यूट है पर नाम से लगता है वो खून चूसने वाला है। ये विरोधाभास बहुत दिलचस्प है। मैं फिर से देखना चाहूंगा। रंग संयोजन अच्छा है और कला बहुत सुंदर है।

सस्पेंस बना रहे

हर सीन के बाद एक नया सवाल खड़ा हो जाता है। आईने वाला बूढ़ा कौन था? पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज में सस्पेंस का डोज़ सही है। मूछों वाले व्यक्ति की चालाकी देखकर लगता है वो विलेन हो सकता है। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसे शो देखना सुकून देता है। कहानी की रफ्तार बिल्कुल सही है। यह रोचक है और मैं अगला भाग देखना चाहता हूँ।

कुल मिलाकर

ये शो अपनी श्रेणी में बेहतरीन है। जादू, रहस्य और कीड़े का कॉम्बिनेशन नया है। पिस्सू बनकर जन्म: खून चूसके देवराज ने मेरी उम्मीदों पर खरा उतरा है। पात्रों के कपड़े और सेटिंग बहुत विस्तृत हैं। मैं अगले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ। सभी को एक बार जरूर देखना चाहिए। यह सर्वश्रेष्ठ है और सभी को देखना चाहिए।