नर्स के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था जब उसने फोन देखा। उसकी आंखों में बेचैनी थी जो किसी बड़े झूठ की ओर इशारा करती है। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी में हर मोड़ पर नई उत्सुकता है। अस्पताल के सीन बहुत भावुक हैं। क्या वो मरीज ठीक हो पाएगा? नर्स की हिम्मत की दाद देनी होगी कि उसने सच सामने रखने की कोशिश की।
बेटा शराब की बोतल लेकर सोफे पर बैठा था, उसकी हालत देखकर दिल दुखी हो गया। माँ की डांट उसे अंदर तक हिला गई थी। झूठी कसम, सच्ची लगन में रिश्तों की टूटन बहुत खूबसूरती से दिखाई गई है। पुरानी यादों वाले सीन में उसकी और नर्स का लगाव लाजवाब था। क्या प्यार जीत पाएगा या परिवार की जिद? यह सवाल हर दर्शक के मन में है।
फोन की घंटी बजते ही माहौल बदल गया। लूका नाम देखते ही दादी माँ का चेहरा उतर गया। झूठी कसम, सच्ची लगन में छोटी छोटी चीजें बड़े राज खोलती हैं। नर्स ने जब फोन दिखाया तो सबकी सांसें रुक गईं। यह मोड़ बिल्कुल उम्मीद नहीं था। रहस्य बनाए रखने का यह तरीका बहुत पसंद आया। रात भर जागकर भी यह धारावाहिक देखने का मन करता है।
महल जैसा घर और अस्पताल का कमरा, हर जगह अमीरी झलकती है। दादी माँ की टोपी और मोती की माला बहुत शाही लग रही थी। झूठी कसम, सच्ची लगन की दृश्य गुणवत्ता फिल्म जैसी है। रंगों का इस्तेमाल और रोशनी का खेल देखने लायक है। सिर्फ कहानी नहीं, नज़ारा भी दिल को सुकून देता है। ऐसे निर्माण स्तर वाले कार्यक्रम कम ही मिलते हैं।
नर्स और दादी माँ के बीच की बहस बहुत तेज थी। नर्स ने हाथ उठाकर मना किया तो लगा जैसे उसने हद पार कर दी हो। झूठी कसम, सच्ची लगन में सत्ता संतुलन बहुत दिलचस्प है। कौन किस पर राज चला रहा है, यह समझना मुश्किल हो रहा है। गुस्सा और बेचैनी दोनों ही किरदारों में साफ़ दिख रहे थे। नाटक देखने का असली मज़ा यहीं है।
पुरानी मुलाकात वाला सीन यादों की तरह ताज़ा था। दोनों का प्रेम भरा पल बहुत सुंदर था पर अब वही पल दर्द बन गया है। झूठी कसम, सच्ची लगन में बिछड़ने का दर्द बहुत गहराई से दिखाया गया है। उनकी आंखों में अभी भी एक दूसरे के लिए प्यार साफ़ दिखता है। क्या वो फिर से मिल पाएंगे? यह उम्मीद बनाए रखती है।
बिस्तर पर लेटे मरीज के बारे में कोई कुछ नहीं बता रहा। सबके चेहरे पर एक रहस्य छिपा है। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी में यह रहस्य सबसे बड़ा आकर्षण है। दादी माँ क्यों छुपा रही हैं सच? नर्स को क्या पता चल गया है? हर कड़ी नए सवाल खड़े करता है। पहेली सुलझाने जैसा लगता है यह कार्यक्रम।
दादी माँ के अभिनय के कायल हो गए। गुस्से से लेकर चिंता तक, हर भाव उत्कृष्ट था। नर्स की घबराहट भी बहुत असली लगी। झूठी कसम, सच्ची लगन के कलाकारों ने जान डाल दी है। अतिरंजना नहीं, बस शुद्ध जज़्बात हैं। ऐसे अभिनय से कहानी में जान आ जाती है। दर्शक खुद को कहानी में खो पाता है।
अमीरी, प्यार, धोखा और परिवार का झगड़ा, सब कुछ इस कार्यक्रम में है। गति बहुत तेज है, बोरियत का नाम नहीं। झूठी कसम, सच्ची लगन देखने का अनुभव बहुत शानदार रहा। रोमांचक अंत पर खत्म हुआ तो गुस्सा आ गया। अगला भाग कब आएगा? नाटक पसंद करने वालों के लिए यह किसी खजाने से कम नहीं है।
दादी माँ की कार से उतरने वाली शान देखते ही बनती थी। उनकी साड़ी और अंदाज किसी रानी से कम नहीं था। झूठी कसम, सच्ची लगन में परिवार के राज धीरे धीरे खुल रहे हैं। नर्स और दादी के बीच की तनावपूर्ण चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है। क्या वो नर्स सच में दोषी है या बस फंस गई है? यह जानने के लिए मैं अगली कड़ी देखने के लिए बेताब हूं। परिवार की यह लड़ाई बहुत गहरी लग रही है।