शुरुआत में बार में अकेले बैठे उसकी आँखों में जो दर्द था, वो दिल को छू गया। जब वह रोते हुए शराब पी रही थी, तो लगा जैसे कोई बहुत बड़ा गम हो। फिर अचानक वह व्यक्ति आया और सब बदल गया। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। उसकी आँखों में आँसू और फिर मुस्कान देखकर लगा प्यार जीत गया। सच में भावनाओं का खेल बहुत गहरा था।
अस्पताल वाले सीन में वह सूट वाला व्यक्ति जब डॉक्टरों के साथ चल रहा था, तो हीरो वाली एंट्री लगी। रोशनी और बैकग्राउंड म्यूजिक ने माहौल बना दिया। बाद में बार में जब उसने उस लड़की को बचाया, तो गुस्सा और प्यार दोनों दिखे। झूठी कसम, सच्ची लगन में एक्शन और रोमांस का संतुलन बहुत अच्छा है। हर फ्रेम में एक नई कहानी कहती है। देखने वाला बस देखता रह जाता है।
उस बदमाश ने जब उसका पीछा किया, तो बहुत गुस्सा आया। पर जैसे ही हीरो ने उसे गिराया, मज़ा आ गया। एक्शन सीन बहुत तेज़ और सटीक था। लड़की की घबराहट असली लग रही थी। झूठी कसम, सच्ची लगन के इस पार्ट में टेंशन बहुत थी। फिर जब दोनों पास आए, तो साँसें रुक गईं। प्यार में ताकत होती है, यह साबित हो गया। विलेन का अंत भी बहुत अच्छा दिखाया।
प्रपोजल वाला सीन देखकर दिल पिघल गया। अंगूठी की चमक और उसकी आँखों के आँसू सब कुछ कह रहे थे। भीड़ की तालियाँ और शोर माहौल को और खास बना रहे थे। झूठी कसम, सच्ची लगन में ऐसा क्लाइमेक्स उम्मीद से बेहतर था। वह घुटनों पर बैठकर जब अंगूठी दिखा रहा था, तो लगा समय थम गया। प्यार की जीत का यह पल कभी नहीं भूलेगा। बहुत खूबसूरत अंजाम मिला।
बार की रोशनी और शहर की लाइट्स बैकग्राउंड में बहुत सुंदर लग रही थीं। जब वह दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, तो शब्दों की ज़रूरत नहीं थी। बस नज़रें सब कह रही थीं। झूठी कसम, सच्ची लगन की सिनेमेटोग्राफी बहुत गजब की है। हर डिटेल पर ध्यान दिया गया है। कपड़ों से लेकर ज्वेलरी तक सब कुछ परफेक्ट था। ऐसे सीन बार बार देखने को मन करता है।