दफतर का वो माहौल देखकर रोंगटे खड़े हो गए। मालिक की डांट और लड़की की चुप्पी में कुछ छिपा है। कागजात पर दस्तखत करते वक्त जो नज़ारे देखने को मिले, वो सीधे दिल पर वार करते हैं। झूठी कसम, सच्ची लगन में ऐसा मोड़ कोई उम्मीद नहीं कर सकता। सिगरेट जलाने वाला दृश्य तो बिल्कुल आग लगा दिया। हर पल संदेह और आकर्षण का खेल चल रहा है। देखने वाले को हर पल हैरानी होती है।
कोट पहने उस शख्स की आंखों में एक अलग ही चमक थी। जब उसने सिगरेट मुंह में लगाई, तो हवा में तनाव साफ महसूस हुआ। लड़की ने हिचकिचाहट के बाद लाइटर जलाया, ये सब कुछ इतना गहरा है। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी में ये पल सबसे अहम लगता है। व्यापारिक दुनिया के पीछे छिपे राज अब खुलने वाले हैं। सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है।
बूढ़ी महिला का फोन पर गुस्सा देखकर लगता है कि असली खेल अब शुरू हुआ है। सुनहरी बालों वाली लड़की के हाथ में फाइलें थीं, पर नज़रें कुछ और ही ढूंढ रही थीं। गलियारे में चलते हुए जो बातचीत हुई, उसने सब कुछ बदल दिया। झूठी कसम, सच्ची लगन में परिवार की साजिशें भी कम नहीं हैं। हर कदम पर खतरा मंडरा रहा है। कोई भी भरोसा नहीं कर सकता।
हरी पोशाक वाली लड़की की मासूमियत देखकर तरस आता है। वो जिस तरह से उस शख्स की बात सुन रही थी, लगता था जैसे कोई सजा मिल रही हो। पर आंखों में डर नहीं, एक अलग ही जिद थी। झूठी कसम, सच्ची लगन में भावनाओं की ये लड़ाई देखने लायक है। दफतर की चारदीवारी में प्यार और नफरत एक साथ हैं। ये कहानी दिल को छू लेती है।
गोपनीय समझौते पर उंगली रखते ही सब चुप हो गए। वो शख्स जानता था कि वो क्या कर रहा है। लड़की के चेहरे के भाव पल भर में बदल गए। झूठी कसम, सच्ची लगन में हर दस्तावेज के पीछे एक राज छिपा है। ये सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, इज्जत का मामला बन गया है। देखने वाला हर पल हैरान होता रहता है। सस्पेंस बना हुआ है।
सिगरेट का धुआं और आंखों का संपर्क, ये दृश्य किसी फिल्म से कम नहीं था। उस शख्स ने जैसे ही गले की पट्टी ढीली की, माहौल बदल गया। लड़की की सांसें रुक सी गई थीं। झूठी कसम, सच्ची लगन में रोमांस का ये अंदाज बहुत नया लगा। सत्ता के खेल को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। हर पल में कहानी छिपी है। बहुत खूबसूरत तरीके से बनाया गया है।
गलियारे में वो दो महिलाएं जब मिलीं, तो बिजली सी कड़क गई। बूढ़ी महिला की डांट और युवा लड़की की घबराहट साफ दिखी। कागजात गिरने का डर था, पर संभल गईं। झूठी कसम, सच्ची लगन में रिश्तों की ये कशमकश दिलचस्प है। व्यापारिक चालबाजी के बीच इंसानियत बची है या नहीं, ये देखना बाकी है। हर कोई अपनी चाल चल रहा है।
उस शख्स की मुस्कान में एक चालाकी थी जो छिपी नहीं रही। जब वो कुर्सी पर बैठा तो लगा जैसे पूरे दफतर का मालिक वही हो। लड़की के सामने खड़े होकर जो अंदाज अपनाया, वो लाजवाब था। झूठी कसम, सच्ची लगन में किरदारों की गहराई बहुत ज्यादा है। हर संवाद के पीछे एक मकसद छिपा हुआ है। अभिनय बहुत ही शानदार लगा है।
खिड़की से बाहर शहर का नज़ारा था, पर अंदर तूफान मचा था। लड़की ने जब लाइटर आगे बढ़ाया, तो हाथ कांप रहे थे। उस शख्स ने धुआं छोड़ते हुए जो देखा, वो हजार शब्दों के बराबर था। झूठी कसम, सच्ची लगन में खामोशी भी शोर मचाती है। ये कहानी सीधे रूह को छू लेती है। बहुत ही गहरा असर छोड़ती है।
अंत में जब वो दोनों आमने सामने आए, तो हवा में बिजली थी। बूढ़ी महिला के दखल ने सबकी नींद उड़ा दी। सुनहरी बालों वाली लड़की की चालाकी अब सबके सामने है। झूठी कसम, सच्ची लगन का अगला भाग देखने की बेचैनी बढ़ गई है। हर मोड़ पर नया झटका लगता है। ये नाटक आसान नहीं है। दर्शक बंधे हुए हैं।