पार्किंग का माहौल इतना डरावना था कि रोंगटे खड़े हो गए। जब उसने गले पर हाथ रखा तो लगा सब खत्म, पर (डब्ड) न्याय का भार में ऐसे ट्विस्ट तो आम हैं। भागने की कोशिश और फिर स्प्रे का वार, बिल्कुल एक्शन मूवी जैसा लगा।
शुरुआत में वो बेचारी लग रही थी, पर जैसे ही मौका मिला उसने पलटवार कर दिया। बैग से स्प्रे निकालना और सीधा आंखों पर वार, कमाल की चालाकी थी। (डब्ड) न्याय का भार में किरदारों की ये फुर्ती देखकर मजा आ गया।
उसका घमंड देखकर गुस्सा आ रहा था, वो सोच रहा था कि कोई उससे भाग नहीं सकता। पर जब वो खुद दर्द से तड़प रहा था तो मजा आया। (डब्ड) न्याय का भार में ऐसे अहंकारी विलेन को सबक मिलना ही चाहिए था।
लाइटिंग और साउंड इतना परफेक्ट था कि हर पल लग रहा था कुछ भी हो सकता है। जब वो कार की तरफ धकेल रहा था तो सांसें रुक गई थीं। (डब्ड) न्याय का भार का ये सीन सच में दिल की धड़कन बढ़ा देता है।
पहले वो कार में बैठने से मना करती है, फिर भागती है और फिर पकड़ी जाती है। ये भागम-भाग देखकर लगा जैसे चूहा-बिल्ली का खेल चल रहा हो। (डब्ड) न्याय का भार में एक्शन के साथ इमोशन भी अच्छे दिखाए गए हैं।
जब उसने बैग से स्प्रे निकाला तो लगा अब पलटी मारेगी। सीधा चेहरे पर मारा और वो आदमी तड़पने लगा। (डब्ड) न्याय का भार में ऐसे छोटे-छोटे डिटेल्स कहानी को बहुत इंटरेस्टिंग बना देते हैं।
जैसे ही पुलिस दौड़ती हुई आई, लगा कि अब बच गई। उसने उंगली से इशारा किया और वो भाग खड़ा हुआ। (डब्ड) न्याय का भार में क्लाइमेक्स के बाद राहत मिलना बहुत जरूरी होता है।
दीवार से टिककर बैठते ही उसके चेहरे पर जो राहत थी, वो देखने लायक थी। आंसू और डर दोनों साफ दिख रहे थे। (डब्ड) न्याय का भार में एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि आप खुद को उसकी जगह पाते हैं।
पहले लगा कि वो बस डरा रहा है, पर जब उसने गला दबाने की कोशिश की तो पता चला ये सीरियस है। (डब्ड) न्याय का भार में हर सीन के साथ सस्पेंस बढ़ता जाता है और अंत तक बांधे रखता है।
उसने हर तरीके से बचने की कोशिश की, चाहे वो भागना हो या फिर हमला करना। आखिर में जब वो सुरक्षित हुई तो सुकून मिला। (डब्ड) न्याय का भार में संघर्ष और जीत का ये सफर बहुत प्रेरणादायक है।
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