इस दृश्य में दादी का गुस्सा और नाती का डर साफ दिखाई देता है। जब दादी ने कहा कि वह उस औरत को सबक सिखाएंगी, तो नाती का चेहरा पीला पड़ गया। यह डर सिर्फ दादी के गुस्से का नहीं, बल्कि उस औरत के खिलाफ जाने के डर का भी है। (डब्ड) न्याय का भार में यह डर और गुस्सा बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
नाती की चिंता साफ दिखाई देती है जब वह दादी से कहती है कि वह उस औरत को सबक सिखाएंगी। दादी का आश्वासन कि वह सब ठीक कर देंगी, नाती को थोड़ा राहत देता है। लेकिन नाती का डर अभी भी बना हुआ है। (डब्ड) न्याय का भार में यह चिंता और आश्वासन बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
जब दादाजी आए और नाती से कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं करेगी, तो नाती का डर और बढ़ गया। दादाजी का यह कहना कि जन राय अभी उनके साथ है, लेकिन बात उससे ज्यादा जटिल है, नाती को और भी डरा देता है। (डब्ड) न्याय का भार में यह डर और जटिलता बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
दादी का गुस्सा और दादाजी का डर इस दृश्य में साफ दिखाई देता है। जब दादी ने दादाजी से कहा कि वह उस औरत के वश में है, तो दादाजी का चेहरा पीला पड़ गया। यह डर सिर्फ दादी के गुस्से का नहीं, बल्कि उस औरत के खिलाफ जाने के डर का भी है। (डब्ड) न्याय का भार में यह डर और गुस्सा बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
नाती का दादाजी से सवाल कि वह क्यों डर रहे हैं, और दादी का जवाब कि वह उस औरत को सबक सिखाएंगी, इस दृश्य में बहुत अच्छे से दिखाया गया है। दादी का यह कहना कि वह उस औरत को सबक सिखाएंगी, नाती को थोड़ा राहत देता है। (डब्ड) न्याय का भार में यह सवाल और जवाब बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
दादी का रोना और दादाजी का सोचना इस दृश्य में साफ दिखाई देता है। जब दादी ने कहा कि वह उस औरत को सबक सिखाएंगी, तो दादाजी ने सोचा कि शायद वह ज्यादा सोच रहा है। यह सोच और रोना बहुत अच्छे से दिखाया गया है। (डब्ड) न्याय का भार में यह सोच और रोना बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
नाती का दादाजी से गले लगना और दादी का मुस्कुराना इस दृश्य में बहुत अच्छे से दिखाया गया है। जब दादाजी ने कहा कि वह पत्रकार वार्ता करेंगे, तो नाती ने उन्हें गले लगा लिया और दादी मुस्कुराई। यह गले लगना और मुस्कुराना बहुत अच्छे से दिखाया गया है। (डब्ड) न्याय का भार में यह गले लगना और मुस्कुराना बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
इस दृश्य में दादी का गुस्सा और नाती का डर साफ दिखाई देता है। जब दादी ने कहा कि वह उस औरत को सबक सिखाएंगी, तो नाती का चेहरा पीला पड़ गया। यह डर सिर्फ दादी के गुस्से का नहीं, बल्कि उस औरत के खिलाफ जाने के डर का भी है। (डब्ड) न्याय का भार में यह डर और गुस्सा बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
नाती की चिंता साफ दिखाई देती है जब वह दादी से कहती है कि वह उस औरत को सबक सिखाएंगी। दादी का आश्वासन कि वह सब ठीक कर देंगी, नाती को थोड़ा राहत देता है। लेकिन नाती का डर अभी भी बना हुआ है। (डब्ड) न्याय का भार में यह चिंता और आश्वासन बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
जब दादाजी आए और नाती से कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं करेगी, तो नाती का डर और बढ़ गया। दादाजी का यह कहना कि जन राय अभी उनके साथ है, लेकिन बात उससे ज्यादा जटिल है, नाती को और भी डरा देता है। (डब्ड) न्याय का भार में यह डर और जटिलता बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
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