इस सीन में क्लेयर का अहंकार चूर-चूर हो जाता है जब वह प्रोफेसर से भिड़ती है। उसकी आँखों में जो गुस्सा और निराशा है, वह साफ़ दिख रही है। (डब्ड) न्याय का भार में ऐसे डायलॉग बहुत कम देखने को मिलते हैं जहाँ पावर डायनामिक्स इतनी खूबसूरती से बदलते हैं। क्लेयर को लगता था कि वह सब कुछ खरीद सकती है, लेकिन यहाँ उसे अपनी औकात याद दिला दी गई। यह सीन देखकर मन में एक अजीब सा सुकून मिला।
प्रोफेसर का किरदार इतना शांत और नियंत्रित है कि देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वह क्लेयर के सामने बिल्कुल नहीं घबराती, बल्कि उसकी हर बात का जवाब बड़ी चालाकी से देती है। (डब्ड) न्याय का भार में ऐसे किरदार बहुत कम देखने को मिलते हैं जो इतने प्रभावशाली हों। उसका हर शब्द क्लेयर के अहंकार पर वार करता है। यह सीन देखकर लगता है कि न्याय की राह में कोई भी रुकावट नहीं आ सकती।
क्लेयर का अहंकार इस सीन में पूरी तरह से टूट जाता है। वह सोचती थी कि वह सब कुछ खरीद सकती है, लेकिन यहाँ उसे अपनी औकात याद दिला दी गई। (डब्ड) न्याय का भार में ऐसे डायलॉग बहुत कम देखने को मिलते हैं जहाँ पावर डायनामिक्स इतनी खूबसूरती से बदलते हैं। उसकी आँखों में जो गुस्सा और निराशा है, वह साफ़ दिख रही है। यह सीन देखकर मन में एक अजीब सा सुकून मिला।
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