जब शेरिफ ने वह ट्रे उठाई और सोने की अंगूठियां हवा में उड़ने लगीं, तो पूरा शहर सन्न रह गया। भूला हुआ बंदूकबाज़ की यह दुनिया इतनी जादुई है कि लगता है जैसे पुराने वेस्टर्न फिल्में फिर से जी उठी हों। हर फ्रेम में एक नया सस्पेंस है जो दर्शकों को बांधे रखता है।
दो काउबॉय के बीच तनाव इतना गहरा था कि हवा में गोली चलने से पहले ही पता चल गया था कि खून बहेगा। भूला हुआ बंदूकबाज़ ने दिखाया कि कैसे एक छोटी सी घटना पूरे शहर की किस्मत बदल सकती है। एक्शन सीन्स दिल दहला देने वाले हैं।
जब वह घायल होकर भी मुस्कुराया, तो लगा जैसे मौत भी उसके सामने हार मान गई हो। भूला हुआ बंदूकबाज़ के किरदार इतने जटिल हैं कि हर बार देखने पर नया कुछ मिलता है। यह दृश्य मेरे दिल में हमेशा रहेगा।
जब वह घोड़े पर सवार होकर शहर से निकला, तो पीछे छोड़ी धूल ने जैसे उसके अतीत को ढक दिया। भूला हुआ बंदूकबाज़ की सिनेमेटोग्राफी इतनी खूबसूरत है कि हर शॉट एक पेंटिंग लगता है। सूरज ढलने का दृश्य तो जादू था।
लकड़ी के फर्श पर खून की लकीरें देखकर रोंगटे खड़े हो गए। भूला हुआ बंदूकबाज़ ने दिखाया कि हिंसा कितनी खूबसूरती से भी भयानक हो सकती है। यह दृश्य देखकर लगा जैसे मैं खुद उस कमरे में खड़ा हूं।
उसने अंगूठी को ऐसे देखा जैसे वह उसकी जिंदगी का सबसे कीमती खजाना हो। भूला हुआ बंदूकबाज़ में हर वस्तु का एक मतलब है और यह अंगूठी शायद किसी वादे की निशानी है। कहानी में गहराई है जो धीरे-धीरे खुलती है।
शेरिफ की आंखों में जो चुप्पी थी, वह हजार शब्दों से ज्यादा बोल रही थी। भूला हुआ बंदूकबाज़ के किरदार बिना बोले ही अपनी कहानी कह देते हैं। यह अभिनय की सबसे ऊंची मिसाल है जो मैंने देखी है।
कमरे में टूटी कुर्सी और जलती आग ने उस तबाही की कहानी कही जो वहां हुई थी। भूला हुआ बंदूकबाज़ के सेट डिजाइन इतने रियलिस्टिक हैं कि लगता है जैसे हम सचमुच उस जमाने में हैं। हर डिटेिल पर ध्यान दिया गया है।
बंदूक की नली से सिगार जलाना उसकी बेपरवाही का सबूत था। भूला हुआ बंदूकबाज़ के हीरो इतने कूल हैं कि खतरे में भी उनकी मुस्कान नहीं जाती। यह अंदाज सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिलता है।
जब वह उस सुनसान घर में पहुंचा, तो लगा जैसे कहानी का अंत होने वाला है, लेकिन शायद यह तो बस शुरुआत है। भूला हुआ बंदूकबाज़ ने हमें एक ऐसे सफर पर ले जाया है जहां हर मोड़ पर नया रहस्य है।
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