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दरबार का माहौल इतना तनावपूर्ण है कि हर कोई सांस रोके हुए है। शहज़ादे और बादशाह के बीच की दूरी देखकर लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य इतना रोमांचक है कि दर्शक अपनी सीट से उठ नहीं पाते। हर कोई इस नाटक का हिस्सा बनना चाहता है।
शहज़ादे की मुस्कान देखकर लगता है कि वह कुछ बहुत बड़ा जीत चुका है। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो उसकी जीत को बयां करती है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य इतना रोमांचक है कि दर्शक हैरान रह जाते हैं। उसकी हरकतें दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
बादशाह का वह दृश्य जब वे अपना फैसला सुनाते हैं, दरबार में सन्नाटा छा जाता है। उनकी आवाज़ में एक अजीब सी गंभीरता है जो उनके फैसले की अहमियत को बयां करती है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य इतना प्रभावशाली है कि दर्शक हैरान रह जाते हैं। उनका हर शब्द दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।
मंत्री का वह दृश्य जब वह अपनी चालाकी का खुलासा करता है, दरबार में हड़कंप मच जाता है। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो उसकी चालाकी को बयां करती है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य इतना रोमांचक है कि दर्शक हैरान रह जाते हैं। उसकी हरकतें दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
रानी का वह दृश्य जब वह अपना दर्द बयां करती है, दरबार में सन्नाटा छा जाता है। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी है जो उसके दिल के दर्द को बयां करती है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य इतना भावुक है कि दर्शक हैरान रह जाते हैं। उसकी हरकतें दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
शहज़ादे का वह दृश्य जब वह अपनी जीत का जश्न मनाता है, दरबार में खुशी का माहौल छा जाता है। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो उसकी जीत को बयां करती है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य इतना रोमांचक है कि दर्शक हैरान रह जाते हैं। उसकी हरकतें दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।