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सिंहासन का संकल्प: एक पुरुषार्थ की गाथावां1एपिसोड

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सिंहासन का संकल्प: एक पुरुषार्थ की गाथा

एक सेनापति का अवैध पुत्र केवल शांत और समृद्ध जीवन चाहता था, पर उसकी असाधारण प्रतिभा उसे राजसत्ता के घमासान में धकेल देती है। राजकुमार उसके प्राणों का शत्रु बन जाता है और विभिन्न राज्य उसे घेर लेते हैं। जब चारों ओर शत्रु हों, वह निडर होकर संपूर्ण साम्राज्य पर अधिकार का संकल्प लेता है—और यहीं से उसकी अद्भुत उन्नति आरंभ होती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

भावुक बिस्तर का दृश्य

चेंद्रेश चंद के बिस्तर पर लेटे होने का दृश्य बहुत भावुक था। दादा दादी की रोने की आवाज़ सुनकर दिल पसीज गया। जब वह अचानक उठा तो सबकी सांसें रुक गईं। इस सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में ऐसे मोड़ देखकर मज़ा आया। अभिनय बहुत प्राकृतिक लगा। परिवार का प्यार साफ़ झलकता है। हर कोई चिंतित था। फिर अचानक खुशी का माहौल हो गया। यह बदलाव बहुत अच्छा लगा। दर्शक भी हैरान रह गए। सबने राहत की सांस ली। कमरे की रोशनी भी अच्छी थी।

दादा दादी का प्यार

ललित चंद और ज्योत्सना राजपूत की जोड़ी कमाल की है। उनकी आंखों में आंसू देखकर लगा कि सच्चा दर्द है। पोते को होश आते देख उनकी खुशी देखने लायक थी। कुहू वर्मा भी घबरा गई थी। इस शो सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। कमरे की सजावट भी बहुत सुंदर थी। पुराने जमाने का अहसास होता है। हर पल में नया मोड़ है। कहानी आगे बढ़ती है। सबको पसंद आएगा।

अचानक जागृति

चेंद्रेश चंद के उठते ही माहौल बदल गया। पहले सब रो रहे थे, फिर सब हैरान थे। उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी। शायद उसे कुछ याद आ गया हो। दादा जी तो डर ही गए थे। सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा की कहानी में यह पल बहुत अहम है। लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है। तोता भी शोर मचा रहा था। सबकी नज़रें उसी पर थीं। बहुत रोमांचक दृश्य था। सब हैरान थे। देखने में मज़ा आया।

शांत बाहरी दृश्य

बाहर का दृश्य बहुत शांत था। चेंद्रेश चंद अब बिल्कुल बदल गया लग रहा था। उसकी चाल में अलग तेज़ थी। पेड़ों के पत्ते पीले हो रहे थे। सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में दृश्य बहुत प्यारे हैं। वह अकेले खड़ा सोच रहा था। शायद वह अपनी किस्मत सोच रहा हो। दादा दादी अब चाय पी रहे थे। सब ठीक हो गया लग रहा था। पर कुछ होने वाला है। कहानी जारी है। आगे क्या होगा।

नौकरानी का डर

कुहू वर्मा का रोल छोटा पर असरदार था। वह सबसे पहले घबरा गई थी। जब युवक उठा तो वह चीख पड़ी। इस सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में हर किरदार अपनी जगह सही है। नौकरानी का डर असली लगा। मालिक के जागने पर राहत भी मिली। कमरे में मोमबत्तियां जल रही थीं। रोशनी बहुत अच्छी थी। रंग बहुत गहरे थे। देखने में बहुत सुंदर लगा। माहौल गंभीर था। सबने ध्यान दिया।

रिश्तों की अहमियत

दादा जी ललित चंद का गुस्सा और प्यार दोनों देखा। पहले वो रो रहे थे, फिर डांट रहे थे। पोते को गले लगा लिया। सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में रिश्तों की अहमियत दिखाई है। परिवार एक साथ है। बिस्तर पर चादर नीली थी। तकिए लाल थे। रंगों का खेल अच्छा था। अभिनेता ने बहुत अच्छा किया। आंखों से सब कह दिया। दिल छू गया। सबको रोना आ गया। फिर हंसी आई।

सुंदर पोशाकें

ज्योत्सना राजपूत का गुस्सा बहुत मज़ेदार था। वह पोते को डांट रही थीं पर प्यार भी था। कपड़े बहुत सुंदर थे। बैंगनी रंग की साड़ी थी। सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में पोशाक डिजाइन बहुत अच्छा है। हर कोई अपने किरदार में डूबा है। बाहर बगीचे में फूल खिले थे। नज़ारा बहुत सुहावना था। चाय पीते हुए बातें हो रही थीं। सब खुश थे। माहौल बदल गया। सबने राहत ली।

चोट और दर्द

चेंद्रेश चंद के सिर पर पट्टी थी। चोट लगी थी शायद। वह उठा तो उसे दर्द हुआ। उसने सिर पकड़ लिया। सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में दर्द को भी अच्छे से दिखाया है। वह हैरान लग रहा था। फिर सब समझ गया। दादा जी ने उसे सहारा दिया। परिवार का साथ सबसे बड़ा है। यह बात दिल को छू गई। बहुत अच्छा लगा देखकर। सबने मदद की। उसे संभाला। वह ठीक हुआ।

तोते का कमाल

तोते की आवाज़ ने सबका ध्यान खींचा। वह सफेद रंग का था। पिंजरे में नहीं था। खुला घूम रहा था। सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा में छोटी चीज़ों का ध्यान रखा है। जब युवक चिल्लाया तो तोता भी बोला। सब हंसने लगे। डर का माहौल हल्का हो गया। यह हास्य भरा पल अच्छा था। वरना सब बहुत रो रहे थे। अब सब खुश हैं। माहौल बदल गया। सबने राहत ली। अच्छा लगा।

अंत की उम्मीद

अंत में वह अकेले खड़ा था। उसकी आंखों में कुछ और था। शायद वह बदल चुका है। बाहर का नज़ारा सुंदर था। सिंहासन का संकल्प एक पुरुषार्थ की गाथा का अंत अच्छा हुआ। दादा दादी अब खुश हैं। सब ठीक हो गया है। पर कहानी अभी बाकी है। अगला भाग देखने को मन कर रहा है। बहुत मज़ा आया। सबको देखना चाहिए। कहानी आगे बढ़ेगी। सब इंतज़ार करेंगे।