सफेद पोशाक वाले शख्स ने जब लाल रंग की उंगली चाटी तो मेरी रूह कांप गई! यह बदला जो रूका नहीं का सबसे डरावना पल था। उसकी मुस्कान में छिपी खतरनाक चाल देखकर लगता है कि वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। नीली पोशाक वाले की घबराहट और बूढ़े आदमी की हैरानी ने माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया।
सुनहरे मुखौटे वाला योद्धा अचानक सामने आया और नीले कपड़ों वाले को घायल कर दिया। बदला जो रूका नहीं में यह एक्शन सीन बहुत तेज था। लाल साड़ी वाली महिला की चीख और बूढ़े व्यक्ति का सदमे में आ जाना दिखाता है कि यह हमला किसी ने नहीं सोचा था। खून बहता देखकर दिल दहल गया।
पीली पोशाक पहनी महिला की आंखों में डर और हैरानी साफ दिख रही थी। जब सफेद कपड़ों वाला शख्स अपने खूनी हाथ दिखा रहा था, तो वह बस देखती रही। बदला जो रूका नहीं में उसके चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वह इस खून-खराबे से अनजान थी या फिर सब कुछ जानबूझकर हो रहा है। उसकी खामोशी सबसे बड़ा सवाल है।
दाढ़ी वाले बूढ़े व्यक्ति का चेहरा देखकर लगता है जैसे उसकी दुनिया हिल गई हो। बदला जो रूका नहीं में जब जमीन पर खून गिरा, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। वह शायद इस हिंसा की उम्मीद नहीं कर रहा था। उसकी स्थिति बताती है कि यह हमला किसी बहुत करीबी या भरोसेमंद ने किया है, जिससे धोखा मिला है।
नीली पोशाक वाला नौजवान शुरू में बहुत उत्साहित लग रहा था, लेकिन अंत में वह तलवार से घायल होकर गिर पड़ा। बदला जो रूका नहीं में उसका संघर्ष और दर्द देखकर बुरा लगा। वह शायद सच बोलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सुनहरे मुखौटे वाले ने उसे चुप करा दिया। उसकी आंखों में मौत का डर साफ दिखा।
सफेद लिबास वाले शख्स ने जब अपने खूनी हाथ को चाटा और मुस्कुराया, तो वह पल सबसे खौफनाक था। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य बताता है कि वह इंसान नहीं, बल्कि एक खूंखार जानवर है। उसकी इस हरकत ने सबको सन्न कर दिया। उसकी आंखों में पागलपन और क्रूरता साफ झलक रही थी, जो रोंगटे खड़े कर देती है।
लाल और सफेद साड़ी वाली महिला ने जब तलवार निकाली, तो लगता है वह बदला लेने के लिए तैयार है। बदला जो रूका नहीं में उसका गुस्सा और आक्रोश देखने लायक था। शायद उसका कोई अपना इस हमले में मारा गया है। उसकी आंखों में आंसू और हाथ में तलवार देखकर लगता है कि अब वह किसी को नहीं बख्शेगी।
सुनहरे मुखौटे वाले की एंट्री ने सबको चौंका दिया। बदला जो रूका नहीं में वह कौन है? क्या वह सफेद कपड़ों वाले का साथी है या कोई नया दुश्मन? उसने बिना कुछ बोले ही हमला कर दिया। उसका रहस्यमयी होना और तलवारबाजी में माहिर होना बताता है कि वह कोई साधारण योद्धा नहीं, बल्कि कोई खास मिशन पर आया है।
शुरुआत में सब कुछ शांत लग रहा था, लेकिन अचानक खून बहने लगा। बदला जो रूका नहीं में यह धोखा किसने दिया? सफेद पोशाक वाला शख्स सबके सामने ही इतना बेरहम कैसे हो गया? लगता है कि यह सब पहले से योजनाबद्ध था। हर किसी के चेहरे पर हैरानी थी, जिससे साफ है कि यह धोखा बहुत गहरा और दर्दनाक है।
जमीन पर पड़ा हुआ घायल योद्धा और चारों तरफ फैला खून देखकर लगता है जैसे मौत का तमाशा रचा हो। बदला जो रूका नहीं का यह अंत बहुत खूनी और दर्दनाक था। बूढ़े व्यक्ति की सिसकियां और महिलाओं की चीखें माहौल को और भी भयानक बना रही हैं। यह अंत किसी सुखद समाधान की उम्मीद नहीं छोड़ता, बस बदले की आग बाकी है।