इस बार का माहौल इतना गहरा है कि लगता है हर बूंद बीयर में कोई पुरानी कहानी डूबी हुई है। सोलारी किड के बारे में चर्चा करते हुए बूढ़े आदमी की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो खुद उस लड़ाई का हिस्सा रहा हो। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में ऐसे सीन्स दर्शक को बांधे रखते हैं।
जब वो मैकेनिकल हाथ बीयर का गिलास पकड़ते हैं, तो लगता है तकनीक और इंसानियत का मिलन हो रहा है। बग क्वीन को चीरने वाली कहानी सुनकर मेरी रूह कांप गई। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में एक्शन के साथ इमोशन भी बराबर है।
हाइव मदर का नाम लेते ही सबकी चुप्पी छा गई। लगता है वो कोई ऐसा दुश्मन था जिससे सब डरते हैं। इस शो में डायलॉग कम लेकिन असर ज्यादा है। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान का ये एपिसोड सस्पेंस से भरा पड़ा है।
वो सोलारी लड़का जो नेचुरल था, बिना किसी साइबोर्ग पार्ट के लड़ा। ये बात सुनकर हैरानी हुई कि आज के दौर में भी कोई ऐसा हो सकता है। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में ऐसे किरदार उम्मीद की किरण हैं।
बार की रोशनी इतनी कम है कि चेहरे आधे छुपे हुए लगते हैं, जैसे हर शख्स कोई राज छुपा रहा हो। फ्रंटलाइन वालों की बातें सुनकर लगता है युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान का माहौल बेमिसाल है।
ब्लड नेबुला बैटल का जिक्र होते ही सबकी आँखों में दर्द झलकने लगा। लगता है वो लड़ाई सबके लिए किसी ना किसी तरह निजी थी। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में पुराने घाव अभी तक हरे हैं।
तीनों दोस्त जब बीयर उठाते हैं, तो लगता है वो सिर्फ पीने नहीं, बल्कि एक दूसरे को सहारा देने आए हैं। उनकी चुप्पी में भी एक कहानी है। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में दोस्ती की मिसाल है ये।
जिस आदमी की आंख में साइबोर्ग पार्ट लगा है, उसकी आंखें बता रही हैं कि उसने कितना कुछ देखा है। वो सिर्फ एक योद्धा नहीं, एक गवाह भी है। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में हर किरदार के पास एक इतिहास है।
फ्रंटलाइन वालों से सुनी बातें इतनी चौंकाने वाली हैं कि लगता है युद्ध के मैदान में इंसानियत बची ही नहीं। फिर भी उम्मीद है कि सोलारी किड जैसा कोई और भी होगा। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में आशा की किरण है।
हर गिलास बीयर के साथ एक याद जुड़ी है - कभी जीत की, कभी हार की। इस बार में हर शख्स अपने अतीत से लड़ रहा है। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में हर सीन एक कहानी कहता है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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