जब वह रोबोटिक सूट पहने युवक तलवार लेकर आकाश की ओर उड़ता है, तो लगता है जैसे कोई देवता युद्ध के लिए उतरा हो। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में ऐसे दृश्य दिल की धड़कन बढ़ा देते हैं। नीली रोशनी और विस्फोट का संगम देखकर रोंगटे खड़े हो गए।
उस बहु-आँखों वाले राक्षस का क्लोज़-अप शॉट इतना डरावना था कि मैंने पलकें झपकाना भी बंद कर दिया। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान के वीएफएक्स टीम ने कमाल कर दिया। जब तलवार की किरण उसकी आँख में घुसी, तो चीखने का मन किया।
जब वह युवक जमीन पर गिरकर उठता है और उसके हाथ में रोबोटिक दस्ताने हैं, तो लगता है जैसे वह हार मानने वाला नहीं। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में ऐसे पल दिखाते हैं कि इंसान की जिद कितनी ताकतवर हो सकती है। उसकी आँखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे।
जब सभी सैनिक एक साथ ऊपर देखते हैं और उनके चेहरे पर डर और उम्मीद दोनों होते हैं, तो लगता है जैसे पूरी सेना की सांसें रुक गई हों। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में ऐसे सामूहिक भावनाओं वाले दृश्य बहुत कम देखने को मिलते हैं।
अंत में जब वह विशालकाय रोबोट धुएं और आग के बीच से निकलकर सूरज की रोशनी में खड़ा होता है, तो लगता है जैसे कोई नया युग शुरू हुआ हो। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान का अंतिम दृश्य मेरे दिमाग से नहीं निकल रहा। उसकी तलवार अभी भी चमक रही थी।
पूरे वीडियो में नीली रोशनी का इस्तेमाल इतना खूबसूरती से किया गया है कि लगता है जैसे कोई सपना देख रहे हों। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान के सिनेमेटोग्राफर ने रंगों के साथ खेलकर जादू कर दिया। हर फ्रेम एक पेंटिंग जैसा लग रहा था।
जब वह युवक अपने सूट में चीखता है और उसकी आँखों में आग होती है, तो लगता है जैसे वह अपने अंदर के सभी डर को बाहर निकाल रहा हो। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान में ऐसे भावनात्मक पल दिखाते हैं कि एक्टर की मेहनत साफ दिखती है।
जब तलवार की किरण से वह राक्षस टुकड़े-टुकड़े होकर बिखरता है, तो लगता है जैसे बुराई का अंत हो गया हो। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान के एक्शन सीन्स इतने संतोषजनक हैं कि बार-बार देखने का मन करता है। विस्फोट की आवाज अभी भी कानों में गूंज रही है।
जमीन पर पड़ी धूल और हवा में तैरता धुआं ऐसे लग रहा था जैसे युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान के सेट डिजाइनर ने हर छोटी चीज पर ध्यान दिया है। उस युवक के कपड़ों पर भी मिट्टी लगी हुई थी।
पूरा वीडियो अंधेरे से शुरू होकर रोशनी की ओर जाता है, जैसे कोई कहानी निराशा से उम्मीद की ओर बढ़ रही हो। (डब्ड) कबाड़ का मेक सुल्तान की कहानी का यह प्रतीकात्मक पहलू मुझे बहुत पसंद आया। अंत में वह रोबोट रोशनी में खड़ा था जैसे नई उम्मीद का प्रतीक।
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