जब वह दरबार में दाखिल हुआ, तो सबकी सांसें रुक गईं। बुजुर्ग मुखिया की आंखों में डर साफ दिख रहा था। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा ने इस बदले की कहानी को बहुत खूबसूरती से पिरोया है। एनिमेशन की क्वालिटी देखते ही बनती है। मुख्य पात्र का गुस्सा और ठंडा दिमाग दोनों ही कमाल के हैं। कोर्ट का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। मुझे यह देखकर अच्छा लगा कि उसने कैसे अपने अधिकारों को वापस पाया। हर दृश्य में एक नया मोड़ है जो आपको बांधे रखता है। यह शो निराश नहीं करता।
अंधेरी गुफा में भेड़ियों का दृश्य काफी डरावना था। फिर अचानक विशाल ड्रेगन का हमला देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा में एक्शन सीन्स की कमी नहीं है। जादुई शक्तियों का टकराव बहुत रंगीन दिखाया गया है। लाल कपड़ों वाली महिला की ताकत भी कम नहीं है। उसने अपने हाथों से आग के हथियार बनाए। यह शो सिर्फ बातों का नहीं, एक्शन का भी है। हर एपिसोड में नई ऊर्जा मिलती है। दर्शकों के लिए यह एक उपहार है।
नायक और नायिका के बीच का जुड़ाव बहुत गहरा लगता है। जब उन्होंने हाथ पकड़ा, तो लगा जैसे सालों का इंतज़ार खत्म हुआ हो। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा सिर्फ ताकत की नहीं, भावनाओं की भी कहानी है। बूढ़े व्यक्ति का डरना यह बताता है कि अतीत में क्या हुआ था। पृष्ठभूमि का संगीत भी बहुत भावुक था। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आई। उनकी रसायन देखने लायक है। कहानी में दिल भी है और दम भी। यह रोमांटिक एंगल बहुत अच्छा है।
शुरू में लगा कि शायद वह हार गया, लेकिन अंत में पता चला कि सब कुछ उसकी योजना थी। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा में ट्विस्ट बहुत अच्छे हैं। दरबार के सदस्यों के चेहरे के भाव बदलते रहते हैं। कोई हैरान है, तो कोई गुस्से में है। यह राजनीति और जादू का मिश्रण बहुत अच्छा लगा। सफेद बालों वाले बुजुर्ग की एक्टिंग लाजवाब है। हर पल कुछ न कुछ होता रहता है। बिल्कुल भी बोरिंग नहीं है यह शो। कहानी बहुत मजबूत है।
वह गंजा व्यक्ति काफी खतरनाक लग रहा है। उसकी आंखों में चालाकी और मुस्कान में खतरा है। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा के विलेन भी बहुत शक्तिशाली हैं। काले कपड़ों वाला मुखिया सख्त जरूर है, पर उसकी बात में वजन है। महल की सजावट बहुत भव्य और सुनहरी है। यह दुनिया बहुत विस्तृत लगती है। मुझे यह देखना पसंद है कि कैसे छोटे पात्र भी अपनी छाप छोड़ते हैं। खलनायक का इंतज़ार रहेगा। यह रोमांचक है।
गुफा का माहौल बहुत रहस्यमयी था। हरे रंग की रोशनी और कोहरा देखकर लगा जैसे किसी दूसरी दुनिया में हूं। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा की विजुअल्स पर बहुत मेहनत की गई है। पात्रों के कपड़ों की बनावट बहुत बारीक है। ड्रेगन की आंखें लाल और डरावनी थीं। जादुई मंडलियां चमक रही थीं। यह सब देखकर आंखों को सुकून मिलता है। तकनीकी पक्ष से यह शो बहुत आगे है। हर फ्रेम एक तस्वीर जैसा है। कलाकारी बेमिसाल है।
एक सीन खत्म होता है और दूसरा शुरू हो जाता है, सांस लेने का मौका नहीं मिलता। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा की रफ्तार बहुत तेज है। दरबार में बहस और फिर अचानक हमला, सब कुछ बहुत तेज है। मुझे यह पसंद आया कि नायक ने बिना डरे सामने वालों को जवाब दिया। सहयोगी पात्रों की भी अच्छी उपस्थिति है। कहानी में गहराई है लेकिन वह उलझती नहीं है। सीधा और स्पष्ट संदेश है। समय की बर्बादी नहीं होती।
सफेद दाढ़ी वाले व्यक्ति को जब सच्चाई पता चली, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा में पात्रों के भाव बहुत सटीक हैं। उनकी घबराहट यह बताती है कि नायक कितना ताकतवर हो गया है। सिंहासन के पीछे की नक्काशी बहुत सुंदर है। यह शो सत्ता की भूख को भी दिखाता है। मुझे यह मनोविज्ञान बहुत पसंद आया। हर कोई कुछ छिपा रहा है। रहस्य धीरे-धीरे खुलते हैं। बहुत गहराई है।
लाल पोशाक वाली महिला सिर्फ खड़ी नहीं है, वह लड़ती भी है। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा में महिला पात्रों को अच्छी जगह दी गई है। उसने आग के तीर चलाए और दुश्मनों को हराया। नायक के साथ उसका समर्थन बहुत अच्छा लगा। यह दिखाता है कि ताकत सिर्फ पुरुषों के पास नहीं होती। उसके गहने और हथियार भी बहुत खास हैं। मुझे उसका आत्मविश्वास बहुत पसंद आया। वह किसी से कम नहीं है। प्रेरणादायक है।
शुरू से अंत तक मैं बंधा रहा। एक्शन और ड्रामा का संतुलन बहुत अच्छा है। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा एक छिपा हुआ रत्न है। अंत ने मुझे और अधिक के लिए छोड़ दिया। एनिमेशन शैली बहुत चिकनी है। छुट्टी के दिन लगातार देखने के लिए एकदम सही है। वास्तव में मनोरंजक सामग्री है। मैं अपने दोस्तों को भी यह देखने के लिए कहूंगा। यह निराश नहीं करता है। सबको देखना चाहिए।