जब वे लोग उस सराय में दाखिल हुए, तो माहौल काफी तनावपूर्ण था। सराय वाला उनकी शक्ल देखकर घबरा गया था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ी घटना होने वाली हो। इस बीच बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा वाली कहानी का अंदाज मिलने लगा। काले कपड़ों वाले योद्धा की चाल में ही रौब झलक रहा था।
रात के बाजार का नज़ारा बेहद खूबसूरत था। पटाखे और रोशनी ने पूरे शहर को जगमगा दिया था। भीड़ में छिपे खतरे का अहसास भी हो रहा था। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा के इस भाग में दृश्य कमाल के हैं। नीली पोशाक वाली सुंदरी की चाल में भी एक अलग ही नशा था।
छत पर छिपा हुआ वह व्यक्ति किसी गुप्तचर से कम नहीं लग रहा था। कौवे के साथ उसका इशारा मतलब कुछ बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा की कहानी में अब रहस्य बढ़ने वाला है। काले वस्त्र वाले नायक की आँखों में चमक देखकर लगता है वह सब जानता है।
सराय वाले का अभिनय काफी कॉमेडिक था, उसने माहौल को हल्का करने की कोशिश की। लेकिन तीनों मेहमानों के चेहरे पर गंभीरता साफ झलक रही थी। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा में ऐसे किरदार कहानी को आगे बढ़ाते हैं। लाल पोशाक वाली योद्धा की मुद्रा से ताकत का अंदाजा होता है।
मुखिया का चेहरा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उसका नकाब और लाल आँखें किसी डरावने सपने जैसी थीं। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा में खलनायक का प्रवेश धमाकेदार हुआ है। अब देखना यह है कि नायक कैसे इस चुनौती का सामना करेगा। बनावट की बारीकी भी बहुत ऊंची है।
त्योहार की खुशियों के बीच भी युद्ध का साया मंडरा रहा है। लोग मजे कर रहे हैं लेकिन ऊपर छतों पर मौत मंडरा रही है। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा की यह विषमता बहुत गहरी है। काले कपड़ों वाले योद्धा को सब पर नज़र रखनी होगी। यह संघर्ष बहुत रोचक होने वाला है।
जब उसने अपना नकाब उतारा तो चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। लेकिन उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा के इस मोड़ पर कहानी बहुत तेज हो गई है। कमरे में बैठे सभी लोग उसकी बात सुनने के लिए बेताब थे। रहस्य बना हुआ है।
तीन दोस्तों की जोड़ी बहुत जच रही है। एक दूसरे के प्रति उनकी समझ और सम्मान देखने लायक है। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा में दोस्ती की यह मिसाल कायल कर देती है। वे जब साथ चलते हैं तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं। ऐसा लगता है वे किसी बड़े मिशन पर हैं।
रात के समय शहर की रोशनी और माहौल बहुत ही शानदार बनाया गया है। हर दीये की चमक में एक कहानी छिपी है। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा की बनावट बहुत ऊंची है। छत पर दौड़ते हुए उस व्यक्ति के खेल बहुत सटीक थे। देखने में बहुत मजा आया।
अंत में जब वह मुखिया अपनी कुर्सी पर बैठा, तो सन्नाटा छा गया। सब जानते हैं कि अब आदेश मिलने वाले हैं। बेवकूफ बना रहा, मुखिया बन के लौटा का अंत पास आता दिख रहा है। काले वस्त्र वाले नायक को अब सतर्क होना होगा। अगला भाग कब आएगा?