शुरुआत में ही झटका लगता है जब गुलाबी कोट वाली महिला फोन पर रोती है। उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। फिर अचानक बेहोश होकर गिर जाती है, बिल्कुल वैसे ही जैसे नकली का २५०, असली का खेल में होता है। दृश्य बहुत भावनात्मक था और दर्शक को बांधे रखता है। गलियारे में अकेलेपन का अहसास बहुत गहरा था।
काले सूट वाली महिला का व्यवहार बहुत क्रूर लगा। उसने पैसे हवा में उड़ा दिए, जो उस समय बेचारी की हालत देखकर बहुत बुरा लगा। यह दिखाता है कि पैसा कैसे इंसान को बदल देता है। नकली का २५०, असली का खेल की कहानी में यह महत्वपूर्ण मोड़ था। गुस्सा आ रहा था देखकर।
एक हफ्ते बाद का दृश्य दिल दहला देने वाला था। वही महिला अब शव पेटी लेकर चल रही थी। उसके चेहरे पर सूनापन साफ झलक रहा था। सफेद कपड़े और काली पट्टी ने माहौल को और गंभीर बना दिया। नकली का २५०, असली का खेल में ऐसे मोड़ उम्मीद नहीं थे। बहुत दुख हुआ यह देखकर।
स्पा वाला दृश्य अचानक आया जब पुलिस ने अंदर घुसकर सबको गिरफ्तार कर लिया। हंसी मजाक चल रहा था और अचानक हथकड़ी लग गई। यह बदले की शुरुआत लग रही थी। नकली का २५०, असली का खेल में हर मोड़ पर नया तनाव है। साहसिक दृश्य और नाटक का अच्छा मिश्रण था यह वाला भाग।
टीवी पर उस आदमी को भाषण देते देख महिला की आंखें फटी की फटी रह गईं। उसे लगा था सब खत्म हो गया, पर वह जिंदा था। यह आश्चर्य बहुत बड़ा था। नकली का २५०, असली का खेल की पटकथा बहुत चालाकी से लिखी गई है। हर किसी को धोखा मिल रहा है कहानी में।
पुरस्कार समारोह में लाल पोशाक वाली महिला की एंट्री शानदार थी। उसकी आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे। जब उसने सफेद सूट वाले को देखा तो सांस रुक गई। नकली का २५०, असली का खेल का चरमोत्कर्ष बहुत धमाकेदार है। ऐसा लग रहा था कि अब असली खेल शुरू होगा।
महिला का रूपांतरण देखकर हैरानी हुई। पहले वह रोती थी, अब लाल साड़ी में बहुत खूबसूरत और ताकतवर लग रही थी। बदला लेने का जज्बा साफ दिख रहा था। नकली का २५०, असली का खेल में किरदार का विकास बहुत अच्छा है। अब वह चुप नहीं बैठने वाली है लगता है।
सफेद सूट वाला आदमी मंच पर आया तो सब हैरान रह गए। उसे मरा हुआ माना जा रहा था पर वह स्वस्थ खड़ा था। उसकी आंखों में भी चौंकने वाला भाव था। नकली का २५०, असली का खेल में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं। कहानी बहुत पेचीदा होती जा रही है अब।
पूरा वीडियो भावनात्मक उतार-चढ़ाव जैसा था। कभी रोना आता है तो कभी गुस्सा। हर दृश्य में कुछ नया खुलासा होता है। नकली का २५०, असली का खेल ने दर्शकों को बांधे रखा है। अंत में जो नजरें मिलीं उसमें हजारों बातें छिपी थीं। बहुत गजब का नाटक था यह।
आखिरी दृश्य में महिला की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सब झूठ था। नकली का २५०, असली का खेल का अंत बहुत खुला छोड़ा गया है। अब आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। नेटशॉर्ट पर देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा।