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नकली का 250, असली का खेलवां4एपिसोड

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नकली का 250, असली का खेल

रणवीर मेहता, मेहता ग्रुप का असली बेटा, बिछड़ने के बाद घर लौटता है। वह परिवार के लिए जान लगा देता है और कंपनी को सालाना तीस हज़ार करोड़ दिलाता है, लेकिन सालाना जश्न पर नकली बेटा सिद्धांत उसे सिर्फ 250 युआन का बोनस देकर बेइज्जत करता है और उसके अपने माता-पिता व बहन भी नकली का साथ देते हैं। अब रणवीर का धैर्य टूट चुका है, वह घर छोड़कर मेहता ग्रुप को सबक सिखाने की तैयारी करता है। क्या रणवीर अपने ही परिवार को हरा पाएगा? और यह लड़ाई कहाँ तक जाएगी?
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इस एपिसोड की समीक्षा

कार्यालय में हंगामा

कार्यालय में ये क्या हो रहा है सफेद सूट वाला व्यक्ति जमीन पर क्यों है चश्मे वाला आदमी बहुत घमंडी लग रहा है लाल पोशाक वाली महिला की आंखों में डर साफ दिख रहा था मुझे लगता है कि नकली का २५०, असली का खेल में कोई बड़ा धोखा होने वाला है सुरक्षा कर्मी भी बिना वजह नहीं रुके होंगे ये दृश्य देखकर मेरी सांसें रुक गईं ऐसे ही रोमांचक पल देखने को मिलते हैं आगे क्या होगा ये जानने की बेचैनी बढ़ रही है बहुत ही शानदार प्रस्तुति है

लाल पोशाक का रहस्य

लाल मखमली पोशाक वाली महिला का रंग उतरा हुआ था चश्मे वाले व्यक्ति ने उसका हाथ पकड़ लिया था जो काफी चौंकाने वाला था सफेद सूट वाला शख्स दर्द से कराह रहा था नकली का २५०, असली का खेल की कहानी में ये मोड़ बहुत तेज था कार वाली महिला भी बहुत परेशान लग रही थी उसने जूता छोड़ दिया था जो इस बात का संकेत है कि वो कितनी जल्दी में थी हर किरदार के चेहरे पर तनाव साफ झलक रहा था कहानी बहुत रोचक है

आंसू और जल्दबाजी

कार में बैठी महिला की आंखों में आंसू थे वो चालक से कुछ कह रही थी लेकिन वो सुन नहीं रहा था फिर वो कार से बाहर निकली और फोन पर बात करते हुए भागी नकली का २५०, असली का खेल में ये दृश्य बहुत भावुक था उसका गिरा हुआ जूता कहानी की जल्दबाजी को दिखाता है कार्यालय वाले सीन के साथ इसका क्या कनेक्शन है ये जानना जरूरी है मुझे ये ड्रामा बहुत पसंद आ रहा है अभिनय भी बहुत अच्छा लगा

चश्मे वाले की चाल

चश्मे वाले व्यक्ति की मुस्कान में बहुत चालाकी थी वो सफेद सूट वाले को नीचा दिखा रहा था लाल पोशाक वाली महिला बीच में आ गई लेकिन वो भी लाचारी महसूस कर रही थी नकली का २५०, असली का खेल में पावर डायनामिक बहुत रोचक है सुरक्षा कर्मी का व्यवहार भी बहुत रूखा था कार्यालय का माहौल एकदम तनावपूर्ण हो गया था ऐसे पल देखकर लगता है कि कोई बड़ी साजिश रची जा रही है दर्शकों को बांधे रखने वाली कहानी है

गिरा हुआ जूता

सफेद जूता गिरने का सीन बहुत प्रतीकात्मक था महिला को अपनी परवाह नहीं थी बस वो किसी तक पहुंचना चाहती थी नकली का २५०, असली का खेल की रफ्तार बहुत तेज है कार्यालय में हुई मारपीट और कार वाला दृश्य आपस में जुड़े हुए लगते हैं हर भाग के बाद रहस्य बढ़ता जाता है अभिनय बहुत स्वाभाविक लग रहा था खासकर लाल पोशाक वाली अभिनेत्री की मुझे अगला भाग देखने की जल्दी है

कॉर्पोरेट का सच

कार्यालय के बीचोंबीच ये हंगामा क्यों हुआ सफेद सूट वाला व्यक्ति बेचारा जमीन पर पड़ा था चश्मे वाले ने अपनी पावर दिखाई नकली का २५०, असली का खेल में कॉर्पोरेट दुनिया का काला सच दिखाया गया है लाल पोशाक वाली महिला की चुप्पी सब कुछ कह रही थी वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन डर रही थी ये ड्रामा सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि इमोशनल भी है प्लेटफॉर्म पर दृश्य गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है सबको देखना चाहिए

समांतर कहानियां

हल्के रंग का सूट वाली महिला की हालत देखकर बुरा लगा वो रो रही थी और भाग भी रही थी नकली का २५०, असली का खेल में हर किरदार किसी न किसी मुसीबत में फंसा हुआ है कार्यालय वाला दृश्य और रोड वाला दृश्य समांतर चल रहे हैं शायद दोनों जगह की घटनाएं एक ही वजह से हो रही हैं निर्देशन बहुत शानदार है कैमरा कोण ने तनाव को अच्छे से कैद किया है बहुत ही बेहतरीन काम है

अन्याय के खिलाफ

सुरक्षा कर्मी ने सफेद सूट वाले को पकड़ रखा था वो छटपटा रहा था लेकिन निकल नहीं पा रहा था नकली का २५०, असली का खेल में अन्याय को बहुत करीब से दिखाया गया है चश्मे वाला व्यक्ति खलनायक लग रहा है लाल पोशाक वाली महिला शायद उसकी मदद करना चाहती है कहानी में बहुत सारे मोड़ हैं मुझे ये अंदाज बहुत पसंद आ रहा है हर पल नया मोड़ लेता है ये कहानी दर्शकों के लिए है

जरूरी फोन कॉल

कार का चालक भी कुछ अजीब व्यवहार कर रहा था महिला को उससे शिकायत थी नकली का २५०, असली का खेल में हर छोटा किरदार भी महत्वपूर्ण लगता है कार्यालय में जो हुआ वो शायद इस महिला से जुड़ा है उसका फोन कॉल भी बहुत जरूरी था ये ड्रामा दर्शक को बांधे रखता है मैं लगातार देखती जा रही हूं अंत बहुत मजबूत हैं अगला भाग कब आएगा इसका इंतजार है सबके लिए

यादगार एपिसोड

अंत में जो जूता गिरा वो बहुत प्रभावशाली था महिला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा नकली का २५०, असली का खेल का ये भाग बहुत यादगार बन गया है कार्यालय की ठंडक और बाहर की भागदौड़ दोनों का विरोधाभास अच्छा था मुझे लगता है कि अगले भाग में सब कुछ खुलकर सामने आएगा ऐसे ड्रामा कम ही देखने को मिलते हैं सबको देखना चाहिए कहानी में दम है और जान भी है बहुत पसंद आया