भूरे लिबास वाले व्यक्ति का गुस्सा और फोन के बाद उसका चेहरा बदलना बहुत ही नाटकीय था। लगता है कोई बड़ी साजिश चल रही है। इस शो की कहानी में जो मोड़ आया है वह वाकई चौंकाने वाला है। नकली का २५०, असली का खेल देखते समय ऐसा लगा कि हर किरदार के पास कोई न कोई राज है। अभिनय बहुत ही दमदार है और दर्शक को बांधे रखता है।
शयनकक्ष वाले दृश्य में जो नीली रोशनी थी उसने माहौल को बहुत ही रहस्यमयी बना दिया। ग्रे लिबास वाले आदमी ने महिला के साथ जो व्यवहार किया वह देखकर हैरानी हुई। क्या यह प्यार है या कोई चाल? नकली का २५०, असली का खेल की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है। निकट कैमरा कोनों ने भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया है।
काली पोशाक वाली महिला चुपचाप खड़ी थी लेकिन उसकी आंखों में कई सवाल थे। जब दो पुरुष आपस में उलझ रहे थे तो उसका शांत रहना संदेह पैदा करता है। नकली का २५०, असली का खेल में महिला किरदारों की मजबूती बहुत अच्छी लगी। हर पल में एक तनाव बना हुआ है जो दर्शक को अगले भाग के लिए बेचैन कर देता है।
फोन की घंटी बजते ही सब कुछ बदल गया। प्रबंधक का फोन उस आदमी के लिए किसी झटके से कम नहीं था। उसकी घबराहट साफ दिख रही थी। नकली का २५०, असली का खेल में ऐसे छोटे छोटे विवरण कहानी को आगे बढ़ाते हैं। मुझे यह पता लगाने में मजा आ रहा है कि आखिर फोन पर क्या बात हुई जो सब बदल गया।
उस बड़े बंगले का ऊपर से लिया गया दृश्य देखकर लगता है कि कहानी बहुत बड़े स्तर पर चल रही है। अमीरी और ताकत का खेल साफ झलकता है। नकली का २५०, असली का खेल की पृष्ठभूमि बहुत ही शानदार है। ऐसे स्थान पर होने वाली घटनाएं हमेशा दिलचस्प होती हैं। निर्माण टीम ने जगह का बहुत अच्छा चयन किया है जो कहानी की गंभीरता को बढ़ाता है।
जब उसने महिला को बिस्तर पर लिटाया तो उसकी हरकतों में नशा था या कोई मजबूरी। यह स्पष्ट नहीं था लेकिन तनाव बहुत था। नकली का २५०, असली का खेल में ऐसे दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। क्या वह उसकी मदद कर रहा था या फायदा उठा रहा था? यह सवाल मन में बना रहता है।
सफेद लिबास वाला युवक बहुत ही शांत लग रहा था लेकिन उसकी आंखों में चालाकी थी। वह सब कुछ जानता हुआ भी चुप था। नकली का २५०, असली का खेल में हर किरदार की अपनी एक परत है। मुझे यह अनुमान लगाने में बहुत मजा आ रहा है कि अंत में कौन जीतेगा और कौन हारेगा। कहानी बहुत पेचीदा होती जा रही है।
अंत में जो आंखों का निकट दृश्य दिखाया गया वह बहुत ही प्रभावशाली था। आंसू या डर, कुछ भी हो सकता था। नकली का २५०, असली का खेल का अंत बहुत ही तगड़ा था। अब अगला भाग कब आएगा इसका इंतजार नहीं हो रहा है। ऐसे दृश्य दर्शक के दिल पर सीधा असर डालते हैं और कहानी से जोड़ते हैं।
सभी किरदारों के कपड़े और सजावट बहुत ही शानदार थे। हर किसी का व्यक्तित्व उनके लिबास से झलक रहा था। नकली का २५०, असली का खेल में दृश्यों पर बहुत ध्यान दिया गया है। भूरा लिबास हो या ग्रे, सब कुछ किरदार के मूड के हिसाब से था। यह दिखाता है कि निर्माताओं ने हर छोटी चीज पर ध्यान दिया है।
व्यापार और निजी नाटक का यह मिश्रण बहुत ही बेहतरीन है। हर मोड़ पर नया खुलासा होता है। नकली का २५०, असली का खेल देखते समय समय का पता ही नहीं चलता। मुझे यह शो बहुत पसंद आ रहा है क्योंकि यह सामान्य कहानियों से हटकर है। हर भाग के बाद उत्सुकता बढ़ती जाती है।